561. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
66 · अत-तहरीम
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا تُوبُٓوا اِلَى اللّٰهِ تَوْبَةً نَصُوحًاۜ عَسٰى رَبُّكُمْ اَنْ يُكَفِّرَ عَنْكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۙ يَوْمَ لَا يُخْزِي اللّٰهُ النَّبِيَّ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُۚ نُورُهُمْ يَسْعٰى بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَبِاَيْمَانِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَٓا اَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَاۚ اِنَّكَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ8
ऐ ईमान लानेवाले! अल्लाह के आगे तौबा करो, विशुद्ध तौबा। बहुत सम्भव है कि तुम्हारा रब तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे और तुम्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरे बह रही होंगी, जिस दिन अल्लाह नबी को और उनको जो ईमान लाकर उसके साथ हुए, रुसवा न करेगा। उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा होगा और उनके दाहिने हाथ मे होगा। वे कह रहे होंगे, "ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे और हमें क्षमा कर। निश्चय ही तू हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है।"
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ جَاهِدِ الْكُفَّارَ وَالْمُنَافِق۪ينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْۜ وَمَاْوٰيهُمْ جَهَنَّمُۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ9
ऐ नबी! इनकार करनेवालों और कपटाचारियों से जिहाद करो और उनके साथ सख़्ती से पेश आओ। उनका ठिकाना जहन्नम है और वह अन्ततः पहुँचने की बहुत बुरी जगह है
ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا لِلَّذ۪ينَ كَفَرُوا امْرَاَتَ نُوحٍ وَامْرَاَتَ لُوطٍۜ كَانَتَا تَحْتَ عَبْدَيْنِ مِنْ عِبَادِنَا صَالِحَيْنِ فَخَانَتَاهُمَا فَلَمْ يُغْنِيَا عَنْهُمَا مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔا وَق۪يلَ ادْخُلَا النَّارَ مَعَ الدَّاخِل۪ينَ10
अल्लाह ने इनकार करनेवालों के लिए नूह की स्त्री और लूत की स्त्री की मिसाल पेश की है। वे हमारे बन्दों में से दो नेक बन्दों के अधीन थीं। किन्तु उन दोनों स्त्रियों ने उनसे विश्वासघात किया तो अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ काम न आ सके और कह दिया गया, "प्रवेश करनेवालों के साथ दोनों आग में प्रविष्ट हो जाओ।"
وَضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا امْرَاَتَ فِرْعَوْنَۢ اِذْ قَالَتْ رَبِّ ابْنِ ل۪ي عِنْدَكَ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ وَنَجِّن۪ي مِنْ فِرْعَوْنَ وَعَمَلِه۪ وَنَجِّن۪ي مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَۙ11
और ईमान लानेवालों के लिए अल्लाह ने फ़िरऔन की स्त्री की मिसाल पेश की है, जबकि उसने कहा, "ऐ मेरे रब! तू मेरे लिए अपने पास जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन और उसके कर्म से छुटकारा दे, और छुटकारा दे मुझे ज़ालिम लोगों से।"
وَمَرْيَمَ ابْنَتَ عِمْرٰنَ الَّت۪ٓي اَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا ف۪يهِ مِنْ رُوحِنَا وَصَدَّقَتْ بِكَلِمَاتِ رَبِّهَا وَكُتُبِه۪ وَكَانَتْ مِنَ الْقَانِت۪ينَ12
और इमरान की बेटी मरयम की मिसाल पेश ही है जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की थी, फिर हमने उस स्त्री के भीतर अपनी रूह फूँक दी और उसने अपने रब के बोलों और उसकी किताबों की पुष्टि की और वह भक्ति-प्रवृत्त आज्ञाकारियों में से थी