563. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
67 · अल-मुल्क
وَاَسِرُّوا قَوْلَكُمْ اَوِ اجْهَرُوا بِه۪ۜ اِنَّهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ13
तुम अपनी बात छिपाओ या उसे व्यक्त करो, वह तो सीनों में छिपी बातों तक को जानता है
اَلَا يَعْلَمُ مَنْ خَلَقَۜ وَهُوَ اللَّط۪يفُ الْخَب۪يرُ۟14
क्या वह नहीं जानेगा जिसने पैदा किया? वह सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है
هُوَ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ ذَلُولًا فَامْشُوا ف۪ي مَنَاكِبِهَا وَكُلُوا مِنْ رِزْقِه۪ۜ وَاِلَيْهِ النُّشُورُ15
वही तो है जिसने तुम्हारे लिए धरती को वशीभूत किया। अतः तुम उसके (धरती के) कन्धों पर चलो और उसकी रोज़ी में से खाओ, उसी की ओर दोबारा उठकर (जीवित होकर) जाना है
ءَاَمِنْتُمْ مَنْ فِي السَّمَٓاءِ اَنْ يَخْسِفَ بِكُمُ الْاَرْضَ فَاِذَا هِيَ تَمُورُۙ16
क्या तुम उससे निश्चिन्त हो जो आकाश में है कि तुम्हें धरती में धँसा दे, फिर क्या देखोगे कि वह डाँवाडोल हो रही है?
اَمْ اَمِنْتُمْ مَنْ فِي السَّمَٓاءِ اَنْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًاۜ فَسَتَعْلَمُونَ كَيْفَ نَذ۪يرِ17
या तुम उससे निश्चिन्त हो जो आकाश में है कि वह तुमपर पथराव करनेवाली वायु भेज दे? फिर तुम जान लोगे कि मेरी चेतावनी कैसी होती है
وَلَقَدْ كَذَّبَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَكَيْفَ كَانَ نَك۪يرِ18
उन लोगों ने भी झुठलाया जो उनसे पहले थे, फिर कैसा रहा मेरा इनकार!
اَوَلَمْ يَرَوْا اِلَى الطَّيْرِ فَوْقَهُمْ صَٓافَّاتٍ وَيَقْبِضْنَۜ مَا يُمْسِكُهُنَّ اِلَّا الرَّحْمٰنُۜ اِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ بَص۪يرٌ19
क्या उन्होंने अपने ऊपर पक्षियों को पंक्तबन्द्ध पंख फैलाए और उन्हें समेटते नहीं देखा? उन्हें रहमान के सिवा कोई और नहीं थामें रहता। निश्चय ही वह हर चीज़ को देखता है
اَمَّنْ هٰذَا الَّذ۪ي هُوَ جُنْدٌ لَكُمْ يَنْصُرُكُمْ مِنْ دُونِ الرَّحْمٰنِۜ اِنِ الْكَافِرُونَ اِلَّا ف۪ي غُرُورٍۚ20
या वह कौन है जो तुम्हारी सेना बनकर रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी सहायता करे। इनकार करनेवाले तो बस धोखे में पड़े हुए है
اَمَّنْ هٰذَا الَّذ۪ي يَرْزُقُكُمْ اِنْ اَمْسَكَ رِزْقَهُۚ بَلْ لَجُّوا ف۪ي عُتُوٍّ وَنُفُورٍ21
या वह कौन है जो तुम्हें रोज़ी दे, यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? नहीं, बल्कि वे तो सरकशी और नफ़रत ही पर अड़े हुए है
اَفَمَنْ يَمْش۪ي مُكِبًّا عَلٰى وَجْهِه۪ٓ اَهْدٰٓى اَمَّنْ يَمْش۪ي سَوِيًّا عَلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ22
तो क्या वह व्यक्ति जो अपने मुँह के बल औंधा चलता हो वह अधिक सीधे मार्ग पर ह या वह जो सीधा होकर सीधे मार्ग पर चल रहा है?
قُلْ هُوَ الَّذ۪ٓي اَنْشَاَكُمْ وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْاَبْصَارَ وَالْاَفْـِٔدَةَۜ قَل۪يلًا مَا تَشْكُرُونَ23
कह दो, "वही है जिसने तुम्हें पैदा किया और तुम्हारे लिए कान और आँखे और दिल बनाए। तुम कृतज्ञता थोड़े ही दिखाते हो।"
قُلْ هُوَ الَّذ۪ي ذَرَاَكُمْ فِي الْاَرْضِ وَاِلَيْهِ تُحْشَرُونَ24
कह दो, "वही है जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और उसी की ओर तुम एकत्र किए जा रहे हो।"
وَيَقُولُونَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ25
वे कहते है, "यदि तुम सच्चे हो तो यह वादा कब पूरा होगा?"
قُلْ اِنَّمَا الْعِلْمُ عِنْدَ اللّٰهِۖ وَاِنَّمَٓا اَنَا۬ نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌ26
कह दो, "इसका ज्ञान तो बस अल्लाह ही के पास है और मैं तो एक स्पष्ट॥ सचेत करनेवाला हूँ।"