566. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

566. पृष्ठ
68 · अल-क़लम
خَاشِعَةً اَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌۜ وَقَدْ كَانُوا يُدْعَوْنَ اِلَى السُّجُودِ وَهُمْ سَالِمُونَ43
उनकी निगाहें झुकी हुई होंगी, ज़िल्लत (अपमान) उनपर छा रही होगी। उन्हें उस समय भी सजदा करने के लिए बुलाया जाता था जब वे भले-चंगे थे
فَذَرْن۪ي وَمَنْ يُكَذِّبُ بِهٰذَا الْحَد۪يثِۜ سَنَسْتَدْرِجُهُمْ مِنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَۙ44
अतः तुम मुझे छोड़ दो और उसको जो इस वाणी को झुठलाता है। हम ऐसों को क्रमशः (विनाश की ओर) ले जाएँगे, ऐसे तरीक़े से कि वे नहीं जानते
وَاُمْل۪ي لَهُمْۜ اِنَّ كَيْد۪ي مَت۪ينٌ45
मैं उन्हें ढील दे रहा हूँ। निश्चय ही मेरी चाल बड़ी मज़बूत है
اَمْ تَسْـَٔلُهُمْ اَجْرًا فَهُمْ مِنْ مَغْرَمٍ مُثْقَلُونَۚ46
(क्या वे यातना ही चाहते हैं) या तुम उनसे कोई बदला माँग रहे हो कि वे तावान के बोझ से दबे जाते हों?
اَمْ عِنْدَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ47
या उनके पास परोक्ष का ज्ञान है तो वे लिख रहे हैं?
فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُنْ كَصَاحِبِ الْحُوتِۢ اِذْ نَادٰى وَهُوَ مَكْظُومٌۜ48
तो अपने रब के आदेश हेतु धैर्य से काम लो और मछलीवाले (यूनुस अलै॰) की तरह न हो जाना, जबकि उसने पुकारा था इस दशा में कि वह ग़म में घुट रहा था।
لَوْلَٓا اَنْ تَدَارَكَهُ نِعْمَةٌ مِنْ رَبِّه۪ لَنُبِذَ بِالْعَرَٓاءِ وَهُوَ مَذْمُومٌ49
यदि उसके रब की अनुकम्पा उसके साथ न हो जाती तो वह अवश्य ही चटियल मैदान में बुरे हाल में डाल दिया जाता।
فَاجْتَبٰيهُ رَبُّهُ فَجَعَلَهُ مِنَ الصَّالِح۪ينَ50
अन्ततः उसके रब ने उसे चुन लिया और उसे अच्छे लोगों में सम्मिलित कर दिया
وَاِنْ يَكَادُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَيُزْلِقُونَكَ بِاَبْصَارِهِمْ لَمَّا سَمِعُوا الذِّكْرَ وَيَقُولُونَ اِنَّهُ لَمَجْنُونٌۢ51
जब वे लोग, जिन्होंने इनकार किया, ज़िक्र (क़ुरआन) सुनते है और कहते है, "वह तो दीवाना है!" तो ऐसा लगता है कि वे अपनी निगाहों के ज़ोर से तुम्हें फिसला देंगे
وَمَا هُوَ اِلَّا ذِكْرٌ لِلْعَالَم۪ينَ52
हालाँकि वह सारे संसार के लिए एक अनुस्मृति है
69 · अल-हाक़ा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلْحَٓاقَّةُۙ1
होकर रहनेवाली!
مَا الْحَٓاقَّةُۚ2
क्या है वह होकर रहनेवाली?
وَمَٓا اَدْرٰيكَ مَا الْحَٓاقَّةُۜ3
और तुम क्या जानो कि क्या है वह होकर रहनेवाली?
كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌ بِالْقَارِعَةِ4
समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया,
فَاَمَّا ثَمُودُ فَاُهْلِكُوا بِالطَّاغِيَةِ5
फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए
وَاَمَّا عَادٌ فَاُهْلِكُوا بِر۪يحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍۙ6
और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए
سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ اَيَّامٍۙ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ ف۪يهَا صَرْعٰىۙ كَاَنَّهُمْ اَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍۚ7
अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े है मानो वे खजूर के जर्जर तने हों
فَهَلْ تَرٰى لَهُمْ مِنْ بَاقِيَةٍ8
अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है?