568. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

568. पृष्ठ
69 · अल-हाक़ा
فَلَيْسَ لَهُ الْيَوْمَ هٰهُنَا حَم۪يمٌۙ35
"अतः आज उसका यहाँ कोई घनिष्ट मित्र नहीं,
وَلَا طَعَامٌ اِلَّا مِنْ غِسْل۪ينٍۙ36
और न ही धोवन के सिवा कोई भोजन है,
لَا يَاْكُلُهُٓ اِلَّا الْخَاطِؤُ۫نَ۟37
"उसे ख़ताकारों (अपराधियों) के अतिरिक्त कोई नहीं खाता।"
فَلَٓا اُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَۙ38
अतः कुछ नहीं! मैं क़सम खाता हूँ उन चीज़ों की जो तुम देखते
وَمَا لَا تُبْصِرُونَۙ39
हो और उन चीज़ों को भी जो तुम नहीं देखते,
اِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَر۪يمٍۚ40
निश्चय ही वह एक प्रतिष्ठित रसूल की लाई हुई वाणी है
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍۜ قَل۪يلًا مَا تُؤْمِنُونَۙ41
वह किसी कवि की वाणी नहीं। तुम ईमान थोड़े ही लाते हो
وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍۜ قَل۪يلًا مَا تَذَكَّرُونَۜ42
और न वह किसी काहिन का वाणी है। तुम होश से थोड़े ही काम लेते हो
تَنْز۪يلٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ43
अवतरण है सारे संसार के रब की ओर से,
وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْاَقَاو۪يلِۙ44
यदि वह (नबी) हमपर थोपकर कुछ बातें घड़ता,
لَاَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَم۪ينِۙ45
तो अवश्य हम उसका दाहिना हाथ पकड़ लेते,
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَت۪ينَۘ46
फिर उसकी गर्दन की रग काट देते,
فَمَا مِنْكُمْ مِنْ اَحَدٍ عَنْهُ حَاجِز۪ينَ47
और तुममें से कोई भी इससे रोकनेवाला न होता
وَاِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِلْمُتَّق۪ينَ48
और निश्चय ही वह एक अनुस्मृति है डर रखनेवालों के लिए
وَاِنَّا لَنَعْلَمُ اَنَّ مِنْكُمْ مُكَذِّب۪ينَ49
और निश्चय ही हम जानते है कि तुममें कितने ही ऐसे है जो झुठलाते है
وَاِنَّهُ لَحَسْرَةٌ عَلَى الْكَافِر۪ينَ50
निश्चय ही वह इनकार करनेवालों के लिए सर्वथा पछतावा है,
وَاِنَّهُ لَحَقُّ الْيَق۪ينِ51
और वह बिल्कुल विश्वसनीय सत्य है।
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظ۪يمِ52
अतः तुम अपने महिमावान रब के नाम की तसबीह (गुणगान) करो
70 · अल-मआरिज
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
سَاَلَ سَٓائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍۙ1
एक माँगनेवाले ने घटित होनेवाली यातना माँगी,
لِلْكَافِر۪ينَ لَيْسَ لَهُ دَافِعٌۙ2
जो इनकार करनेवालो के लिए होगी, उसे कोई टालनेवाला नहीं,
مِنَ اللّٰهِ ذِي الْمَعَارِجِۜ3
वह अल्लाह की ओर से होगी, जो चढ़ाव के सोपानों का स्वामी है
تَعْرُجُ الْمَلٰٓئِكَةُ وَالرُّوحُ اِلَيْهِ ف۪ي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْس۪ينَ اَلْفَ سَنَةٍۚ4
फ़रिश्ते और रूह (जिबरील) उसकी ओर चढ़ते है, उस दिन में जिसकी अवधि पचास हज़ार वर्ष है
فَاصْبِرْ صَبْرًا جَم۪يلًا5
अतः धैर्य से काम लो, उत्तम धैर्य
اِنَّهُمْ يَرَوْنَهُ بَع۪يدًاۙ6
वे उसे बहुत दूर देख रहे है,
وَنَرٰيهُ قَر۪يبًاۜ7
किन्तु हम उसे निकट देख रहे है
يَوْمَ تَكُونُ السَّمَٓاءُ كَالْمُهْلِۙ8
जिस दिन आकाश तेल की तलछट जैसा काला हो जाएगा,
وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِۙ9
और पर्वत रंग-बिरंगे ऊन के सदृश हो जाएँगे
وَلَا يَسْـَٔلُ حَم۪يمٌ حَم۪يمًاۚ10
कोई मित्र किसी मित्र को न पूछेगा,