57. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
3 · आले-इमरान
رَبَّنَٓا اٰمَنَّا بِمَٓا اَنْزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِد۪ينَ53
"हमारे रब! तूने जो कुछ उतारा है, हम उसपर ईमान लाए और इस रसूल का अनुसरण स्वीकार किया। अतः तू हमें गवाही देनेवालों में लिख ले।"
وَمَكَرُوا وَمَكَرَ اللّٰهُۜ وَاللّٰهُ خَيْرُ الْمَاكِر۪ينَ۟54
और वे चाल चले तो अल्लाह ने भी उसका तोड़ किया और अल्लाह उत्तम तोड़ करनेवाला है
اِذْ قَالَ اللّٰهُ يَا ع۪يسٰٓى اِنّ۪ي مُتَوَفّ۪يكَ وَرَافِعُكَ اِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ الَّذ۪ينَ اتَّبَعُوكَ فَوْقَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِۚ ثُمَّ اِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَاَحْكُمُ بَيْنَكُمْ ف۪يمَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ55
जब अल्लाह ने कहा, "ऐ ईसा! मैं तुझे अपने क़ब्जे में ले लूँगा और तुझे अपनी ओर उठा लूँगा और अविश्वासियों (की कुचेष्टाओं) से तुझे पाक कर दूँगा और तेरे अनुयायियों को क़ियामत के दिन तक लोगों के ऊपर रखूँगा, जिन्होंने इनकार किया। फिर मेरी ओर तुम्हें लौटना है। फिर मैं तुम्हारे बीच उन चीज़ों का फ़ैसला कर दूँगा, जिनके विषय में तुम विभेद करते रहे हो
فَاَمَّا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا فَاُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَد۪يدًا فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِۘ وَمَا لَهُمْ مِنْ نَاصِر۪ينَ56
"तो जिन लोगों ने इनकार की नीति अपनाई, उन्हें दुनिया और आख़िरत में कड़ी यातना दूँगा। उनका कोई सहायक न होगा।"
وَاَمَّا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفّ۪يهِمْ اُجُورَهُمْۜ وَاللّٰهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِم۪ينَ57
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उन्हें वह उनका पूरा-पूरा बदला देगा। अल्लाह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता
ذٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْاٰيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَك۪يمِ58
ये आयतें है और हिकमत (तत्वज्ञान) से परिपूर्ण अनुस्मारक, जो हम तुम्हें सुना रहे हैं
اِنَّ مَثَلَ ع۪يسٰى عِنْدَ اللّٰهِ كَمَثَلِ اٰدَمَۜ خَلَقَهُ مِنْ تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ59
निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि में ईसा की मिसाल आदम जैसी है कि उसे मिट्टी से बनाया, फिर उससे कहा, "हो जा", तो वह हो जाता है
اَلْحَقُّ مِنْ رَبِّكَ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْمُمْتَر۪ينَ60
यह हक़ तुम्हारे रब की ओर से हैं, तो तुम संदेह में न पड़ना
فَمَنْ حَٓاجَّكَ ف۪يهِ مِنْ بَعْدِ مَا جَٓاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ اَبْنَٓاءَنَا وَاَبْنَٓاءَكُمْ وَنِسَٓاءَنَا وَنِسَٓاءَكُمْ وَاَنْفُسَنَا وَاَنْفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَلْ لَعْنَتَ اللّٰهِ عَلَى الْكَاذِب۪ينَ61
अब इसके पश्चात कि तुम्हारे पास ज्ञान आ चुका है, कोई तुमसे इस विषय में कुतर्क करे तो कह दो, "आओ, हम अपने बेटों को बुला लें और तुम भी अपने बेटों को बुला लो, और हम अपनी स्त्रियों को बुला लें और तुम भी अपनी स्त्रियों को बुला लो, और हम अपने को और तुम अपने को ले आओ, फिर मिलकर प्रार्थना करें और झूठों पर अल्लाह की लानत भेजे।"