58. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
3 · आले-इमरान
اِنَّ هٰذَا لَهُوَ الْقَصَصُ الْحَقُّۚ وَمَا مِنْ اِلٰهٍ اِلَّا اللّٰهُۜ وَاِنَّ اللّٰهَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ62
निस्संदेह यही सच्चा बयान है और अल्लाह के अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं। और अल्लाह ही प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
فَاِنْ تَوَلَّوْا فَاِنَّ اللّٰهَ عَل۪يمٌ بِالْمُفْسِد۪ينَ۟63
फिर यदि वे लोग मुँह मोड़े तो अल्लाह फ़सादियों को भली-भाँति जानता है
قُلْ يَٓا اَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا اِلٰى كَلِمَةٍ سَوَٓاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ اَلَّا نَعْبُدَ اِلَّا اللّٰهَ وَلَا نُشْرِكَ بِه۪ شَيْـًٔا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا اَرْبَابًا مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ فَاِنْ تَوَلَّوْا فَقُولُوا اشْهَدُوا بِاَنَّا مُسْلِمُونَ64
कहो, "ऐ किताबवालो! आओ एक ऐसी बात की ओर जिसे हमारे और तुम्हारे बीच समान मान्यता प्राप्त है; यह कि हम अल्लाह के अतिरिक्त किसी की बन्दगी न करें और न उसके साथ किसी चीज़ को साझी ठहराएँ और न परस्पर हममें से कोई एक-दूसरे को अल्लाह से हटकर रब बनाए।" फिर यदि वे मुँह मोड़े तो कह दो, "गवाह रहो, हम तो मुस्लिम (आज्ञाकारी) है।"
يَٓا اَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تُحَٓاجُّونَ ف۪ٓي اِبْرٰه۪يمَ وَمَٓا اُنْزِلَتِ التَّوْرٰيةُ وَالْاِنْج۪يلُ اِلَّا مِنْ بَعْدِه۪ۜ اَفَلَا تَعْقِلُونَ65
"ऐ किताबवालो! तुम इबराहीम के विषय में हमसे क्यों झगड़ते हो? जबकि तौरात और इंजील तो उसके पश्चात उतारी गई है, तो क्या तुम समझ से काम नहीं लेते?
هَٓا اَنْتُمْ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ حَاجَجْتُمْ ف۪يمَا لَكُمْ بِه۪ عِلْمٌ فَلِمَ تُحَٓاجُّونَ ف۪يمَا لَيْسَ لَكُمْ بِه۪ عِلْمٌۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ وَاَنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ66
"ये तुम लोग हो कि उसके विषय में वाद-विवाद कर चुके जिसका तुम्हें कुछ ज्ञान था। अब उसके विषय में क्यों वाद-विवाद करते हो, जिसके विषय में तुम्हें कुछ भी ज्ञान नहीं? अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते"
مَا كَانَ اِبْرٰه۪يمُ يَهُودِيًّا وَلَا نَصْرَانِيًّا وَلٰكِنْ كَانَ حَن۪يفًا مُسْلِمًاۜ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ67
इबराहीम न यहूदी था और न ईसाई, बल्कि वह तो एक ओर को होकर रहनेवाला मुस्लिम (आज्ञाकारी) था। वह कदापि मुशरिकों में से न था
اِنَّ اَوْلَى النَّاسِ بِاِبْرٰه۪يمَ لَلَّذ۪ينَ اتَّبَعُوهُ وَهٰذَا النَّبِيُّ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُواۜ وَاللّٰهُ وَلِيُّ الْمُؤْمِن۪ينَ68
निस्संदेह इबराहीम से सबसे अधिक निकटता का सम्बन्ध रखनेवाले वे लोग है जिन्होंने उसका अनुसरण किया, और यह नबी और ईमानवाले लोग। और अल्लाह ईमानवालों को समर्थक एवं सहायक है
وَدَّتْ طَٓائِفَةٌ مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ لَوْ يُضِلُّونَكُمْۜ وَمَا يُضِلُّونَ اِلَّٓا اَنْفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ69
किताबवालों में से एक गिरोह के लोगों की कामना है कि काश! वे तुम्हें पथभ्रष्ट कर सकें, जबकि वे केवल अपने-आपकों पथभ्रष्ट कर रहे है! किन्तु उन्हें इसका एहसास नहीं
يَٓا اَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَكْفُرُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَاَنْتُمْ تَشْهَدُونَ70
ऐ किताबवालों! तुम अल्लाह की आयतों का इनकार क्यों करते हो, जबकि तुम स्वयं गवाह हो?