59. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
3 · आले-इमरान
يَٓا اَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَلْبِسُونَ الْحَقَّ بِالْبَاطِلِ وَتَكْتُمُونَ الْحَقَّ وَاَنْتُمْ تَعْلَمُونَ۟71
ऐ किताबवालो! सत्य को असत्य के साथ क्यों गड्ड-मड्ड करते और जानते-बूझते हुए सत्य को छिपाते हो?
وَقَالَتْ طَٓائِفَةٌ مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ اٰمِنُوا بِالَّذ۪ٓي اُنْزِلَ عَلَى الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَجْهَ النَّهَارِ وَاكْفُرُٓوا اٰخِرَهُ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَۚ72
किताबवालों में से एक गिरोह कहता है, "ईमानवालो पर जो कुछ उतरा है, उस पर प्रातःकाल ईमान लाओ और संध्या समय उसका इनकार कर दो, ताकि वे फिर जाएँ
وَلَا تُؤْمِنُٓوا اِلَّا لِمَنْ تَبِعَ د۪ينَكُمْۜ قُلْ اِنَّ الْهُدٰى هُدَى اللّٰهِۙ اَنْ يُؤْتٰٓى اَحَدٌ مِثْلَ مَٓا اُو۫ت۪يتُمْ اَوْ يُحَٓاجُّوكُمْ عِنْدَ رَبِّكُمْۜ قُلْ اِنَّ الْفَضْلَ بِيَدِ اللّٰهِۚ يُؤْت۪يهِ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَل۪يمٌۚ73
"और तुम अपने धर्म के अनुयायियों के अतिरिक्त किसी पर विश्वास न करो। कह दो, वास्तविक मार्गदर्शन तो अल्लाह का मार्गदर्शन है - कि कहीं जो चीज़ तुम्हें प्राप्त हो जाए, या वे तुम्हारे रब के सामने तुम्हारे ख़िलाफ़ हुज्जत कर सकें।" कह दो, "बढ़-चढ़कर प्रदान करना तो अल्लाह के हाथ में है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। और अल्लाह बड़ी समाईवाला, सब कुछ जाननेवाला है
يَخْتَصُّ بِرَحْمَتِه۪ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظ۪يمِ74
"वह जिसे चाहता है अपनी रहमत (दयालुता) के लिए ख़ास कर लेता है। और अल्लाह बड़ी उदारता दर्शानेवाला है।"
وَمِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ مَنْ اِنْ تَاْمَنْهُ بِقِنْطَارٍ يُؤَدِّه۪ٓ اِلَيْكَۚ وَمِنْهُمْ مَنْ اِنْ تَاْمَنْهُ بِد۪ينَارٍ لَا يُؤَدِّه۪ٓ اِلَيْكَ اِلَّا مَا دُمْتَ عَلَيْهِ قَٓائِمًاۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَالُوا لَيْسَ عَلَيْنَا فِي الْاُمِّيّ۪نَ سَب۪يلٌۚ وَيَقُولُونَ عَلَى اللّٰهِ الْكَذِبَ وَهُمْ يَعْلَمُونَ75
और किताबवालों में कोई तो ऐसा है कि यदि तुम उसके पास धन-दौलच का एक ढेर भी अमानत रख दो तो वह उसे तुम्हें लौटा देगा। और उनमें कोई ऐसा है कि यदि तुम एक दीनार भी उसकी अमानत में रखों, तो जब तक कि तुम उसके सिर पर सवार न हो, वह उसे तुम्हें अदा नहीं करेगा। यह इसलिए कि वे कहते है, "उन लोगों के विषय में जो किताबवाले नहीं हैं हमारी कोई पकड़ नहीं।" और वे जानते-बूझते अल्लाह पर झूठ मढ़ते है
بَلٰى مَنْ اَوْفٰى بِعَهْدِه۪ وَاتَّقٰى فَاِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُتَّق۪ينَ76
क्यों नहीं, जो कोई अपनी प्रतिज्ञा पूरी करेगा और डर रखेगा, तो अल्लाह भी डर रखनेवालों से प्रेम करता है
اِنَّ الَّذ۪ينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ اللّٰهِ وَاَيْمَانِهِمْ ثَمَنًا قَل۪يلًا اُو۬لٰٓئِكَ لَا خَلَاقَ لَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ اللّٰهُ وَلَا يَنْظُرُ اِلَيْهِمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَلَا يُزَكّ۪يهِمْۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ77
रहे वे लोग जो अल्लाह की प्रतिज्ञा और अपनी क़समों का थोड़े मूल्य पर सौदा करते हैं, उनका आख़िरत में कोई हिस्सा नहीं। अल्लाह न तो उनसे बात करेगा और न क़ियामत के दिन उनकी ओर देखेगा, और न ही उन्हें निखारेगा। उनके लिए तो दुखद यातना है