595. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
91 · अश-शम्स92 · अल-लैल
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
وَالشَّمْسِ وَضُحٰيهَاۙۖ1
साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा,
وَالْقَمَرِ اِذَا تَلٰيهَاۙۖ2
और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए,
وَالنَّهَارِ اِذَا جَلّٰيهَاۙۖ3
और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे,
وَالَّيْلِ اِذَا يَغْشٰيهَاۙۖ4
और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले
وَالسَّمَٓاءِ وَمَا بَنٰيهَاۙۖ5
और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया,
وَالْاَرْضِ وَمَا طَحٰيهَاۙۖ6
और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया
وَنَفْسٍ وَمَا سَوّٰيهَاۙۖ7
और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा
فَاَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوٰيهَاۙۖ8
फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी
قَدْ اَفْلَحَ مَنْ زَكّٰيهَاۙۖ9
सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया
وَقَدْ خَابَ مَنْ دَسّٰيهَاۜ10
और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوٰيهَاۙۖ11
समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया,
اِذِ انْبَعَثَ اَشْقٰيهَاۙۖ12
जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ,
فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللّٰهِ نَاقَةَ اللّٰهِ وَسُقْيٰيهَا۠13
तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, "सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।"
فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَاۙۖ فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُمْ بِذَنْبِهِمْ فَسَوّٰيهَاۙۖ14
किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया
وَلَا يَخَافُ عُقْبٰيهَا15
और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
وَالَّيْلِ اِذَا يَغْشٰىۙ1
साक्षी है रात जबकि वह छा जाए,
وَالنَّهَارِ اِذَا تَجَلّٰىۙ2
और दिन जबकि वह प्रकाशमान हो,
وَمَا خَلَقَ الذَّكَرَ وَالْاُنْثٰىۙ3
और नर और मादा का पैदा करना,
اِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتّٰىۜ4
कि तुम्हारा प्रयास भिन्न-भिन्न है
فَاَمَّا مَنْ اَعْطٰى وَاتَّقٰىۙ5
तो जिस किसी ने दिया और डर रखा,
وَصَدَّقَ بِالْحُسْنٰىۙ6
और अच्छी चीज़ की पुष्टि की,
فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْيُسْرٰىۜ7
हम उस सहज ढंग से उस चीज का पात्र बना देंगे, जो सहज और मृदुल (सुख-साध्य) है
وَاَمَّا مَنْ بَخِلَ وَاسْتَغْنٰىۙ8
रहा वह व्यक्ति जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती,
وَكَذَّبَ بِالْحُسْنٰىۙ9
और अच्छी चीज़ को झुठला दिया,
فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرٰىۜ10
हम उसे सहज ढंग से उस चीज़ का पात्र बना देंगे, जो कठिन चीज़ (कष्ट-साध्य) है
وَمَا يُغْن۪ي عَنْهُ مَالُهُٓ اِذَا تَرَدّٰىۜ11
और उसका माल उसके कुछ काम न आएगा, जब वह (सिर के बल) खड्ड में गिरेगा
اِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدٰىۘ12
निस्संदेह हमारे ज़िम्मे है मार्ग दिखाना
وَاِنَّ لَنَا لَلْاٰخِرَةَ وَالْاُو۫لٰى13
और वास्तव में हमारे अधिकार में है आख़िरत और दुनिया भी
فَاَنْذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظّٰىۚ14
अतः मैंने तुम्हें दहकती आग से सावधान कर दिया