596. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
92 · अल-लैल93 · अज़-ज़ुहा94 · अल-इन्शिराह
لَا يَصْلٰيهَٓا اِلَّا الْاَشْقٰىۙ15
इसमें बस वही पड़ेगा जो बड़ा ही अभागा होगा,
اَلَّذ۪ي كَذَّبَ وَتَوَلّٰىۜ16
जिसने झुठलाया और मुँह फेरा
وَسَيُجَنَّبُهَا الْاَتْقٰىۙ17
और उससे बच जाएगा वह अत्यन्त परहेज़गार व्यक्ति,
اَلَّذ۪ي يُؤْت۪ي مَالَهُ يَتَزَكّٰىۚ18
जो अपना माल देकर अपने आपको निखारता है
وَمَا لِاَحَدٍ عِنْدَهُ مِنْ نِعْمَةٍ تُجْزٰىۙ19
और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो,
اِلَّا ابْتِغَٓاءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْاَعْلٰىۚ20
बल्कि इससे अभीष्ट केवल उसके अपने उच्च रब के मुख (प्रसन्नता) की चाह है
وَلَسَوْفَ يَرْضٰى21
और वह शीघ्र ही राज़ी हो जाएगा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
وَالضُّحٰىۙ1
साक्षी है चढ़ता दिन,
وَالَّيْلِ اِذَا سَجٰىۙ2
और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلٰىۜ3
तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ
وَلَلْاٰخِرَةُ خَيْرٌ لَكَ مِنَ الْاُو۫لٰىۜ4
और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है
وَلَسَوْفَ يُعْط۪يكَ رَبُّكَ فَتَرْضٰىۜ5
और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे
اَلَمْ يَجِدْكَ يَت۪يمًا فَاٰوٰىۖ6
क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?
وَوَجَدَكَ ضَٓالًّا فَهَدٰىۖ7
और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?
وَوَجَدَكَ عَٓائِلًا فَاَغْنٰىۜ8
और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?
فَاَمَّا الْيَت۪يمَ فَلَا تَقْهَرْۜ9
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
وَاَمَّا السَّٓائِلَ فَلَا تَنْهَرْۜ10
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
وَاَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ11
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَۙ1
क्या ऐसा नहीं कि हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल दिया?
وَوَضَعْنَا عَنْكَ وِزْرَكَۙ2
और तुमपर से तुम्हारा बोझ उतार दिया,
اَلَّذ۪ٓي اَنْقَضَ ظَهْرَكَۙ3
जो तुम्हारी कमर तोड़े डाल रहा था?
وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَۜ4
और तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को ऊँचा कर दिया?
فَاِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًاۙ5
अतः निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है
اِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًاۜ6
निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है
فَاِذَا فَرَغْتَ فَانْصَبْۙ7
अतः जब निवृत हो तो परिश्रम में लग जाओ,
وَاِلٰى رَبِّكَ فَارْغَبْ8
और अपने रब से लौ लगाओ