6. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
وَاِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلٰٓئِكَةِ اِنّ۪ي جَاعِلٌ فِي الْاَرْضِ خَل۪يفَةًۜ قَالُٓوا اَتَجْعَلُ ف۪يهَا مَنْ يُفْسِدُ ف۪يهَا وَيَسْفِكُ الدِّمَٓاءَۚ وَنَحْنُ نُسَبِّحُ بِحَمْدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَۜ قَالَ اِنّ۪ٓي اَعْلَمُ مَا لَا تَعْلَمُونَ30
और याद करो जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा कि "मैं धरती में (मनुष्य को) खलीफ़ा (सत्ताधारी) बनानेवाला हूँ।" उन्होंने कहा, "क्या उसमें उसको रखेगा, जो उसमें बिगाड़ पैदा करे और रक्तपात करे और हम तेरा गुणगान करते और तुझे पवित्र कहते हैं?" उसने कहा, "मैं जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।"
وَعَلَّمَ اٰدَمَ الْاَسْمَٓاءَ كُلَّهَا ثُمَّ عَرَضَهُمْ عَلَى الْمَلٰٓئِكَةِ فَقَالَ اَنْبِؤُ۫ن۪ي بِاَسْمَٓاءِ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ31
उसने (अल्लाह ने) आदम को सारे नाम सिखाए, फिर उन्हें फ़रिश्तों के सामने पेश किया और कहा, "अगर तुम सच्चे हो तो मुझे इनके नाम बताओ।"
قَالُوا سُبْحَانَكَ لَا عِلْمَ لَنَٓا اِلَّا مَا عَلَّمْتَنَاۜ اِنَّكَ اَنْتَ الْعَل۪يمُ الْحَك۪يمُ32
वे बोले, "पाक और महिमावान है तू! तूने जो कुछ हमें बताया उसके सिवा हमें कोई ज्ञान नहीं। निस्संदेह तू सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है।"
قَالَ يَٓا اٰدَمُ اَنْبِئْهُمْ بِاَسْمَٓائِهِمْۚ فَلَمَّٓا اَنْبَاَهُمْ بِاَسْمَٓائِهِمْۙ قَالَ اَلَمْ اَقُلْ لَكُمْ اِنّ۪ٓي اَعْلَمُ غَيْبَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَاَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا كُنْتُمْ تَكْتُمُونَ33
उसने कहा, "ऐ आदम! उन्हें उन लोगों के नाम बताओ।" फिर जब उसने उन्हें उनके नाम बता दिए तो (अल्लाह ने) कहा, "क्या मैंने तुमसे कहा न था कि मैं आकाशों और धरती की छिपी बातों को जानता हूँ और मैं जानता हूँ जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो और जो कुछ छिपाते हो।"
وَاِذْ قُلْنَا لِلْمَلٰٓئِكَةِ اسْجُدُوا لِاٰدَمَ فَسَجَدُٓوا اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ اَبٰى وَاسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ الْكَافِر۪ينَ34
और याद करो जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि "आदम को सजदा करो" तो, उन्होंने सजदा किया सिवाय इबलील के; उसने इनकार कर दिया और लगा बड़ा बनने और काफ़िर हो रहा
وَقُلْنَا يَٓا اٰدَمُ اسْكُنْ اَنْتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ وَكُلَا مِنْهَا رَغَدًا حَيْثُ شِئْتُمَاۖ وَلَا تَقْرَبَا هٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِم۪ينَ35
और हमने कहा, "ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी जन्नत में रहो और वहाँ जी भर बेरोक-टोक जहाँ से तुम दोनों का जी चाहे खाओ, लेकिन इस वृक्ष के पास न जाना, अन्यथा तुम ज़ालिम ठहरोगे।"
فَاَزَلَّهُمَا الشَّيْطَانُ عَنْهَا فَاَخْرَجَهُمَا مِمَّا كَانَا ف۪يهِۖ وَقُلْنَا اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّۚ وَلَكُمْ فِي الْاَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ اِلٰى ح۪ينٍ36
अन्ततः शैतान ने उन्हें वहाँ से फिसला दिया, फिर उन दोनों को वहाँ से निकलवाकर छोड़ा, जहाँ वे थे। हमने कहा कि "उतरो, तुम एक-दूसरे के शत्रु होगे और तुम्हें एक समय तक धरती में ठहरना और बिसलना है।"
فَتَلَقّٰٓى اٰدَمُ مِنْ رَبِّه۪ كَلِمَاتٍ فَتَابَ عَلَيْهِۜ اِنَّهُ هُوَ التَّوَّابُ الرَّح۪يمُ37
फिर आदम ने अपने रब से कुछ शब्द पा लिए, तो अल्लाह ने उसकी तौबा क़बूल कर ली; निस्संदेह वही तौबा क़बूल करने वाला, अत्यन्त दयावान है