63. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

63. पृष्ठ
3 · आले-इमरान
وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَاَنْتُمْ تُتْلٰى عَلَيْكُمْ اٰيَاتُ اللّٰهِ وَف۪يكُمْ رَسُولُهُۜ وَمَنْ يَعْتَصِمْ بِاللّٰهِ فَقَدْ هُدِيَ اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ۟101
अब तुम इनकार कैसे कर सकते हो, जबकि तुम्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाई जा रही है और उसका रसूल तुम्हारे बीच मौजूद है? जो कोई अल्लाह को मज़बूती से पकड़ ले, वह सीधे मार्ग पर आ गया
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ حَقَّ تُقَاتِه۪ وَلَا تَمُوتُنَّ اِلَّا وَاَنْتُمْ مُسْلِمُونَ102
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो, जैसाकि उसका डर रखने का हक़ है। और तुम्हारी मृत्यु बस इस दशा में आए कि तुम मुस्लिम (आज्ञाकारी) हो
وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللّٰهِ جَم۪يعًا وَلَا تَفَرَّقُواۖ وَاذْكُرُوا نِعْمَتَ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ اِذْ كُنْتُمْ اَعْدَٓاءً فَاَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ فَاَصْبَحْتُمْ بِنِعْمَتِه۪ٓ اِخْوَانًاۚ وَكُنْتُمْ عَلٰى شَفَا حُفْرَةٍ مِنَ النَّارِ فَاَنْقَذَكُمْ مِنْهَاۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمْ اٰيَاتِه۪ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ103
और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लो और विभेद में न पड़ो। और अल्लाह की उस कृपा को याद करो जो तुमपर हुई। जब तुम आपस में एक-दूसरे के शत्रु थे तो उसने तुम्हारे दिलों को परस्पर जोड़ दिया और तुम उसकी कृपा से भाई-भाई बन गए। तुम आग के एक गड्ढे के किनारे खड़े थे, तो अल्लाह ने उससे तुम्हें बचा लिया। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयते खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम मार्ग पा लो
وَلْتَكُنْ مِنْكُمْ اُمَّةٌ يَدْعُونَ اِلَى الْخَيْرِ وَيَاْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنْكَرِۜ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ104
और तुम्हें एक ऐसे समुदाय का रूप धारण कर लेना चाहिए जो नेकी की ओर बुलाए और भलाई का आदेश दे और बुराई से रोके। यही सफलता प्राप्त करनेवाले लोग है
وَلَا تَكُونُوا كَالَّذ۪ينَ تَفَرَّقُوا وَاخْتَلَفُوا مِنْ بَعْدِ مَا جَٓاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُۜ وَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌۙ105
तुम उन लोगों की तरह न हो जाना जो विभेद में पड़ गए, और इसके पश्चात कि उनके पास खुली निशानियाँ आ चुकी थी, वे विभेद में पड़ गए। ये वही लोग है, जिनके लिए बड़ी (घोर) यातना है। (यह यातना उस दिन होगी)
يَوْمَ تَبْيَضُّ وُجُوهٌ وَتَسْوَدُّ وُجُوهٌۚ فَاَمَّا الَّذ۪ينَ اسْوَدَّتْ وُجُوهُهُمْ۠ اَكَفَرْتُمْ بَعْدَ ا۪يمَانِكُمْ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنْتُمْ تَكْفُرُونَ106
जिस दिन कितने ही चेहरे उज्ज्वल होंगे और कितने ही चेहरे काले पड़ जाएँगे, तो जिनके चेहेर काले पड़ गए होंगे (वे सदा यातना में ग्रस्त रहेंगे। खुली निशानियाँ आने का बाद जिन्होंने विभेद किया) उनसे कहा जाएगा, "क्या तुमने ईमान के पश्चात इनकार की नीति अपनाई? तो लो अब उस इनकार के बदले में जो तुम करते रहे हो, यातना का मज़ा चखो।"
وَاَمَّا الَّذ۪ينَ ابْيَضَّتْ وُجُوهُهُمْ فَف۪ي رَحْمَةِ اللّٰهِۜ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ107
रहे वे लोग जिनके चेहरे उज्ज्वल होंगे, वे अल्लाह की दयालुता की छाया में होंगे। वे उसी में सदैव रहेंगे
تِلْكَ اٰيَاتُ اللّٰهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّۜ وَمَا اللّٰهُ يُر۪يدُ ظُلْمًا لِلْعَالَم۪ينَ108
ये अल्लाह की आयतें है, जिन्हें हम हक़ के साथ तुम्हें सुना रहे है। अल्लाह संसारवालों पर किसी प्रकार का अत्याचार नहीं करना चाहता