64. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
3 · आले-इमरान
وَلِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَاِلَى اللّٰهِ تُرْجَعُ الْاُمُورُ۟109
आकाशों और धरती मे जो कुछ है अल्लाह ही का है, और सारे मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते है
كُنْتُمْ خَيْرَ اُمَّةٍ اُخْرِجَتْ لِلنَّاسِ تَاْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَتَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنْكَرِ وَتُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِۜ وَلَوْ اٰمَنَ اَهْلُ الْكِتَابِ لَكَانَ خَيْرًا لَهُمْۜ مِنْهُمُ الْمُؤْمِنُونَ وَاَكْثَرُهُمُ الْفَاسِقُونَ110
तुम एक उत्तम समुदाय हो, जो लोगों के समक्ष लाया गया है। तुम नेकी का हुक्म देते हो और बुराई से रोकते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। और यदि किताबवाले भी ईमान लाते तो उनके लिए यह अच्छा होता। उनमें ईमानवाले भी हैं, किन्तु उनमें अधिकतर लोग अवज्ञाकारी ही हैं
لَنْ يَضُرُّوكُمْ اِلَّٓا اَذًىۜ وَاِنْ يُقَاتِلُوكُمْ يُوَلُّوكُمُ الْاَدْبَارَ۠ ثُمَّ لَا يُنْصَرُونَ111
थोड़ा दुख पहुँचाने के अतिरिक्त वे तुम्हारा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते। और यदि वे तुमसे लड़ेंगे, तो तुम्हें पीठ दिखा जाएँगे, फिर उन्हें कोई सहायता भी न मिलेगी
ضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الذِّلَّةُ اَيْنَ مَا ثُقِفُٓوا اِلَّا بِحَبْلٍ مِنَ اللّٰهِ وَحَبْلٍ مِنَ النَّاسِ وَبَٓاؤُ۫ بِغَضَبٍ مِنَ اللّٰهِ وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الْمَسْكَنَةُۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ كَانُوا يَكْفُرُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَيَقْتُلُونَ الْاَنْبِيَٓاءَ بِغَيْرِ حَقٍّۜ ذٰلِكَ بِمَا عَصَوْا وَكَانُوا يَعْتَدُونَ۠112
वे जहाँ कहीं भी पाए गए उनपर ज़िल्लत (अपमान) थोप दी गई। किन्तु अल्लाह की रस्सी थामें या लोगों का रस्सी, तो और बात है। वे ल्लाह के प्रकोप के पात्र हुए और उनपर दशाहीनता थोप दी गई। यह इसलिए कि वे अल्लाह की आयतों का इनकार और नबियों को नाहक़ क़त्ल करते रहे है। और यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की और सीमोल्लंघन करते रहे
لَيْسُوا سَوَٓاءًۜ مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ اُمَّةٌ قَٓائِمَةٌ يَتْلُونَ اٰيَاتِ اللّٰهِ اٰنَٓاءَ الَّيْلِ وَهُمْ يَسْجُدُونَ۠113
ये सब एक जैसे नहीं है। किताबवालों में से कुछ ऐसे लोग भी है जो सीधे मार्ग पर है और रात की घड़ियों में अल्लाह की आयतें पढ़ते है और वे सजदा करते रहनेवाले है
يُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَيَاْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنْكَرِ وَيُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِۜ وَاُو۬لٰٓئِكَ مِنَ الصَّالِح۪ينَ114
वे अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखते है और नेकी का हुक्म देते और बुराई से रोकते है और नेक कामों में अग्रसर रहते है, और वे अच्छे लोगों में से है
وَمَا يَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَلَنْ يُكْفَرُوهُۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِالْمُتَّق۪ينَ115
जो नेकी भी वे करेंगे, उसकी अवमानना न होगी। अल्लाह का डर रखनेवालो से भली-भाँति परिचित है