74. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

74. पृष्ठ
3 · आले-इमरान
لَقَدْ سَمِعَ اللّٰهُ قَوْلَ الَّذ۪ينَ قَالُٓوا اِنَّ اللّٰهَ فَق۪يرٌ وَنَحْنُ اَغْنِيَٓاءُۢ سَنَكْتُبُ مَا قَالُوا وَقَتْلَهُمُ الْاَنْبِيَٓاءَ بِغَيْرِ حَقٍّۙ وَنَقُولُ ذُوقُوا عَذَابَ الْحَر۪يقِ181
अल्लाह उन लोगों की बात सुन चुका है जिनका कहना है कि "अल्लाह तो निर्धन है और हम धनवान है।" उनकी बात हम लिख लेंगे और नबियों को जो वे नाहक क़त्ल करते रहे है उसे भी। और हम कहेंगे, "लो, (अब) जलने की यातना का मज़ा चखो।"
ذٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ اَيْد۪يكُمْ وَاَنَّ اللّٰهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِلْعَب۪يدِۚ182
यह उसका बदला है जो तुम्हारे हाथों ने आगे भेजा। अल्लाह अपने बन्दों पर तनिक भी ज़ुल्म नहीं करता
اَلَّذ۪ينَ قَالُٓوا اِنَّ اللّٰهَ عَهِدَ اِلَيْنَٓا اَلَّا نُؤْمِنَ لِرَسُولٍ حَتّٰى يَاْتِيَنَا بِقُرْبَانٍ تَاْكُلُهُ النَّارُۜ قُلْ قَدْ جَٓاءَكُمْ رُسُلٌ مِنْ قَبْل۪ي بِالْبَيِّنَاتِ وَبِالَّذ۪ي قُلْتُمْ فَلِمَ قَتَلْتُمُوهُمْ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ183
ये वही लोग है जिनका कहना है कि "अल्लाह ने हमें ताकीद की है कि हम किसी रसूल पर ईमान न लाएँ, जबतक कि वह हमारे सामने ऐसी क़ुरबानी न पेश करे जिसे आग खा जाए।" कहो, "तुम्हारे पास मुझसे पहले कितने ही रसूल खुली निशानियाँ लेकर आ चुके है, और वे वह चीज़ भी लाए थे जिसके लिए तुम कह रहे हो। फिर यदि तुम सच्चे हो तो तुमने उन्हें क़त्ल क्यों किया?"
فَاِنْ كَذَّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَ رُسُلٌ مِنْ قَبْلِكَ جَٓاؤُ۫ بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ وَالْكِتَابِ الْمُن۪يرِ184
फिर यदि वे तुम्हें झुठलाते ही रहें, तो तुमसे पहले भी कितने ही रसूल झुठलाए जा चुके है, जो खुली निशानियाँ, 'ज़बूरें' और प्रकाशमान किताब लेकर आए थे
كُلُّ نَفْسٍ ذَٓائِقَةُ الْمَوْتِۜ وَاِنَّمَا تُوَفَّوْنَ اُجُورَكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ فَمَنْ زُحْزِحَ عَنِ النَّارِ وَاُدْخِلَ الْجَنَّةَ فَقَدْ فَازَۜ وَمَا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَٓا اِلَّا مَتَاعُ الْغُرُورِ185
प्रत्येक जीव मृत्यु का मज़ा चखनेवाला है, और तुम्हें तो क़ियामत के दिन पूरा-पूरा बदला दे दिया जाएगा। अतः जिसे आग (जहन्नम) से हटाकर जन्नत में दाख़िल कर दिया गया, वह सफल रहा। रहा सांसारिक जीवन, तो वह माया-सामग्री के सिवा कुछ भी नहीं
لَتُبْلَوُنَّ ف۪ٓي اَمْوَالِكُمْ وَاَنْفُسِكُمْ وَلَتَسْمَعُنَّ مِنَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَمِنَ الَّذ۪ينَ اَشْرَكُٓوا اَذًى كَث۪يرًاۜ وَاِنْ تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا فَاِنَّ ذٰلِكَ مِنْ عَزْمِ الْاُمُورِ186
तुम्हारें माल और तुम्हारे प्राण में तुम्हारी परीक्षा होकर रहेगी और तुम्हें उन लोगों से जिन्हें तुमसे पहले किताब प्रदान की गई थी और उन लोगों से जिन्होंने 'शिर्क' किया, बहुत-सी कष्टप्रद बातें सुननी पड़ेगी। परन्तु यदि तुम जमें रहे और (अल्लाह का) डर रखा, तो यह उन कर्मों में से है जो आवश्यक ठहरा दिया गया है