75. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

75. पृष्ठ
3 · आले-इमरान
وَاِذْ اَخَذَ اللّٰهُ م۪يثَاقَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ لَتُبَيِّنُنَّهُ لِلنَّاسِ وَلَا تَكْتُمُونَهُۘ فَنَبَذُوهُ وَرَٓاءَ ظُهُورِهِمْ وَاشْتَرَوْا بِه۪ ثَمَنًا قَل۪يلًاۜ فَبِئْسَ مَا يَشْتَرُونَ187
याद करो जब अल्लाह ने उन लोगों से, जिन्हें किताब प्रदान की गई थी, वचन लिया था कि "उसे लोगों के सामने भली-भाँति स्पट् करोगे, उसे छिपाओगे नहीं।" किन्तु उन्होंने उसे पीठ पीछे डाल दिया और तुच्छ मूल्य पर उसका सौदा किया। कितना बुरा सौदा है जो ये कर रहे है
لَا تَحْسَبَنَّ الَّذ۪ينَ يَفْرَحُونَ بِمَٓا اَتَوْا وَيُحِبُّونَ اَنْ يُحْمَدُوا بِمَا لَمْ يَفْعَلُوا فَلَا تَحْسَبَنَّهُمْ بِمَفَازَةٍ مِنَ الْعَذَابِۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ188
तुम उन्हें कदापि यह न समझना, जो अपने किए पर ख़ुश हो रहे है और जो काम उन्होंने नहीं किए, चाहते है कि उनपर भी उनकी प्रशंसा की जाए - तो तुम उन्हें यह न समझाना कि वे यातना से बच जाएँगे, उनके लिए तो दुखद यातना है
وَلِلّٰهِ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ۟189
आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है, और अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
اِنَّ ف۪ي خَلْقِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَاخْتِلَافِ الَّيْلِ وَالنَّهَارِ لَاٰيَاتٍ لِاُو۬لِي الْاَلْبَابِۚ190
निस्सदेह आकाशों और धरती की रचना में और रात और दिन के आगे पीछे बारी-बारी आने में उन बुद्धिमानों के लिए निशानियाँ है
اَلَّذ۪ينَ يَذْكُرُونَ اللّٰهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلٰى جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ ف۪ي خَلْقِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۚ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هٰذَا بَاطِلًاۚ سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ191
जो खड़े, बैठे और अपने पहलुओं पर लेटे अल्लाह को याद करते है और आकाशों और धरती की रचना में सोच-विचार करते है। (वे पुकार उठते है,) "हमारे रब! तूने यह सब व्यर्थ नहीं बनाया है। महान है तू, अतः हमें आग की यातना से बचा ले
رَبَّنَٓا اِنَّكَ مَنْ تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ اَخْزَيْتَهُۜ وَمَا لِلظَّالِم۪ينَ مِنْ اَنْصَارٍ192
"हमारे रब, तूने जिसे आग में डाला, उसे रुसवा कर दिया। और ऐसे ज़ालिमों का कोई सहायक न होगा
رَبَّنَٓا اِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَاد۪ي لِلْا۪يمَانِ اَنْ اٰمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَاٰمَنَّاۗ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّـَٔاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْاَبْرَارِۚ193
"हमारे रब! हमने एक पुकारनेवाले को ईमान की ओर बुलाते सुना कि अपने रब पर ईमान लाओ। तो हम ईमान ले आए। हमारे रब! तो अब तू हमारे गुनाहों को क्षमा कर दे और हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें नेक और वफ़़ादार लोगों के साथ (दुनिया से) उठा
رَبَّنَا وَاٰتِنَا مَا وَعَدْتَنَا عَلٰى رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْم۪يعَادَ194
"हमारे रब! जिस चीज़ का वादा तूने अपने रसूलों के द्वारा किया वह हमें प्रदान कर और क़ियामत के दिन हमें रुसवा न करना। निस्संदेह तू अपने वादे के विरुद्ध जानेवाला नहीं है।"