78. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

78. पृष्ठ
4 · अन-निसा
لِلرِّجَالِ نَص۪يبٌ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْاَقْرَبُونَۖ وَلِلنِّسَٓاءِ نَص۪يبٌ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْاَقْرَبُونَ مِمَّا قَلَّ مِنْهُ اَوْ كَثُرَۜ نَص۪يبًا مَفْرُوضًا7
पुरुषों का उस माल में एक हिस्सा है जो माँ-बाप और नातेदारों ने छोड़ा हो; और स्त्रियों का भी उस माल में एक हिस्सा है जो माल माँ-बाप और नातेदारों ने छोड़ा हो - चाह वह थोड़ा हो या अधिक हो - यह हिस्सा निश्चित किया हुआ है
وَاِذَا حَضَرَ الْقِسْمَةَ اُو۬لُوا الْقُرْبٰى وَالْيَتَامٰى وَالْمَسَاك۪ينُ فَارْزُقُوهُمْ مِنْهُ وَقُولُوا لَهُمْ قَوْلًا مَعْرُوفًا8
और जब बाँटने के समय नातेदार और अनाथ और मुहताज उपस्थित हो तो उन्हें भी उसमें से (उनका हिस्सा) दे दो और उनसे भली बात करो
وَلْيَخْشَ الَّذ۪ينَ لَوْ تَرَكُوا مِنْ خَلْفِهِمْ ذُرِّيَّةً ضِعَافًا خَافُوا عَلَيْهِمْۖ فَلْيَتَّقُوا اللّٰهَ وَلْيَقُولُوا قَوْلًا سَد۪يدًا9
और लोगों को डरना चाहिए कि यदि वे स्वयं अपने पीछे अपने निर्बल बच्चे छोड़ते तो उन्हें उन बच्चों के विषय में कितना भय होता। तो फिर उन्हें अल्लाह से डरना चाहिए और ठीक सीधी बात कहनी चाहिए
اِنَّ الَّذ۪ينَ يَاْكُلُونَ اَمْوَالَ الْيَتَامٰى ظُلْمًا اِنَّمَا يَاْكُلُونَ ف۪ي بُطُونِهِمْ نَارًاۜ وَسَيَصْلَوْنَ سَع۪يرًا۟10
जो लोग अनाथों के माल अन्याय के साथ खाते है, वास्तव में वे अपने पेट आग से भरते है, और वे अवश्य भड़कती हुई आग में पड़ेगे
يُوص۪يكُمُ اللّٰهُ ف۪ٓي اَوْلَادِكُمْ لِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ الْاُنْثَيَيْنِۚ فَاِنْ كُنَّ نِسَٓاءً فَوْقَ اثْنَتَيْنِ فَلَهُنَّ ثُلُثَا مَا تَرَكَۚ وَاِنْ كَانَتْ وَاحِدَةً فَلَهَا النِّصْفُۜ وَلِاَبَوَيْهِ لِكُلِّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا السُّدُسُ مِمَّا تَرَكَ اِنْ كَانَ لَهُ وَلَدٌۚ فَاِنْ لَمْ يَكُنْ لَهُ وَلَدٌ وَوَرِثَهُٓ اَبَوَاهُ فَلِاُمِّهِ الثُّلُثُۚ فَاِنْ كَانَ لَهُٓ اِخْوَةٌ فَلِاُمِّهِ السُّدُسُ مِنْ بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوص۪ي بِهَٓا اَوْ دَيْنٍۜ اٰبَٓاؤُ۬كُمْ وَاَبْنَٓاؤُ۬كُمْۚ لَا تَدْرُونَ اَيُّهُمْ اَقْرَبُ لَكُمْ نَفْعًاۚ فَر۪يضَةً مِنَ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَل۪يمًا حَك۪يمًا11
अल्लाह तुम्हारी सन्तान के विषय में तुम्हें आदेश देता है कि दो बेटियों के हिस्से के बराबर एक बेटे का हिस्सा होगा; और यदि दो से अधिक बेटियाँ ही हो तो उनका हिस्सा छोड़ी हुई सम्पत्ति का दो तिहाई है। और यदि वह अकेली हो तो उसके लिए आधा है। और यदि मरनेवाले की सन्तान हो जो उसके माँ-बाप में से प्रत्येक का उसके छोड़े हुए माल का छठा हिस्सा है। और यदि वह निस्संतान हो और उसके माँ-बाप ही उसके वारिस हों, तो उसकी माँ का हिस्सा तिहाई होगा। और यदि उसके भाई भी हो, तो उसका माँ का छठा हिस्सा होगा। ये हिस्से, वसीयत जो वह कर जाए पूरी करने या ऋण चुका देने के पश्चात है। तुम्हारे बाप भी है और तुम्हारे बेटे भी। तुम नहीं जानते कि उनमें से लाभ पहुँचाने की दृष्टि से कौन तुमसे अधिक निकट है। यह हिस्सा अल्लाह का निश्चित किया हुआ है। अल्लाह सब कुछ जानता, समझता है