79. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

79. पृष्ठ
4 · अन-निसा
وَلَكُمْ نِصْفُ مَا تَرَكَ اَزْوَاجُكُمْ اِنْ لَمْ يَكُنْ لَهُنَّ وَلَدٌۚ فَاِنْ كَانَ لَهُنَّ وَلَدٌ فَلَكُمُ الرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْنَ مِنْ بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوص۪ينَ بِهَٓا اَوْ دَيْنٍۜ وَلَهُنَّ الرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْتُمْ اِنْ لَمْ يَكُنْ لَكُمْ وَلَدٌۚ فَاِنْ كَانَ لَكُمْ وَلَدٌ فَلَهُنَّ الثُّمُنُ مِمَّا تَرَكْتُمْ مِنْ بَعْدِ وَصِيَّةٍ تُوصُونَ بِهَٓا اَوْ دَيْنٍۜ وَاِنْ كَانَ رَجُلٌ يُورَثُ كَلَالَةً اَوِ امْرَاَةٌ وَلَهُٓ اَخٌ اَوْ اُخْتٌ فَلِكُلِّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا السُّدُسُۚ فَاِنْ كَانُٓوا اَكْثَرَ مِنْ ذٰلِكَ فَهُمْ شُرَكَٓاءُ فِي الثُّلُثِ مِنْ بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصٰى بِهَٓا اَوْ دَيْنٍۙ غَيْرَ مُضَٓارٍّۚ وَصِيَّةً مِنَ اللّٰهِۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَل۪يمٌۜ12
और तुम्हारी पत्नि यों ने जो कुछ छोड़ा हो, उसमें तुम्हारा आधा है, यदि उनकी सन्तान न हो। लेकिन यदि उनकी सन्तान हो तो वे छोड़े, उसमें तुम्हारा चौथाई होगा, इसके पश्चात कि जो वसीयत वे कर जाएँ वह पूरी कर दी जाए, या जो ऋण (उनपर) हो वह चुका दिया जाए। और जो कुछ तुम छोड़ जाओ, उसमें उनका (पत्ऩियों का) चौथाई हिस्सा होगा, यदि तुम्हारी कोई सन्तान न हो। लेकिन यदि तुम्हारी सन्तान है, तो जो कुछ तुम छोड़ोगे, उसमें से उनका (पत्नियों का) आठवाँ हिस्सा होगा, इसके पश्चात कि जो वसीयत तुमने की हो वह पूरी कर दी जाए, या जो ऋण हो उसे चुका दिया जाए, और यदि किसी पुरुष या स्त्री के न तो कोई सन्तान हो और न उसके माँ-बाप ही जीवित हो और उसके एक भाई या बहन हो तो उन दोनों में से प्रत्येक को छठा हिस्सा होगा। लेकिन यदि वे इससे अधिक हों तो फिर एक तिहाई में वे सब शरीक होंगे, इसके पश्चात कि जो वसीयत उसने की वह पूरी कर दी जाए या जो ऋण (उसपर) हो वह चुका दिया जाए, शर्त यह है कि वह हानिकर न हो। यह अल्लाह की ओर से ताकीदी आदेश है और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, अत्यन्त सहनशील है
تِلْكَ حُدُودُ اللّٰهِۜ وَمَنْ يُطِعِ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ وَذٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُ13
ये अल्लाह की निश्चित की हुई सीमाएँ है। जो कोई अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों का पालन करेगा, उसे अल्लाह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। उनमें वह सदैव रहेगा और यही बड़ी सफलता है
وَمَنْ يَعْصِ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُ يُدْخِلْهُ نَارًا خَالِدًا ف۪يهَاۖ وَلَهُ عَذَابٌ مُه۪ينٌ۟14
परन्तु जो अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करेगा और उसकी सीमाओं का उल्लंघन करेगा उसे अल्लाह आग में डालेगा, जिसमें वह सदैव रहेगा। और उसके लिए अपमानजनक यातना है