82. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

82. पृष्ठ
4 · अन-निसा
وَالْمُحْصَنَاتُ مِنَ النِّسَٓاءِ اِلَّا مَا مَلَكَتْ اَيْمَانُكُمْۚ كِتَابَ اللّٰهِ عَلَيْكُمْۘ وَاُحِلَّ لَكُمْ مَا وَرَٓاءَ ذٰلِكُمْ اَنْ تَبْتَغُوا بِاَمْوَالِكُمْ مُحْصِن۪ينَ غَيْرَ مُسَافِح۪ينَۜ فَمَا اسْتَمْتَعْتُمْ بِه۪ مِنْهُنَّ فَاٰتُوهُنَّ اُجُورَهُنَّ فَر۪يضَةًۜ وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ ف۪يمَا تَرَاضَيْتُمْ بِه۪ مِنْ بَعْدِ الْفَر۪يضَةِۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَل۪يمًا حَك۪يمًا24
और विवाहित स्त्रियाँ भी वर्जित है, सिवाय उनके जो तुम्हारी लौंडी हों। यह अल्लाह ने तुम्हारे लिए अनिवार्य कर दिया है। इनके अतिरिक्त शेष स्त्रियाँ तुम्हारे लिए वैध है कि तुम अपने माल के द्वारा उन्हें प्राप्त करो उनकी पाकदामनी की सुरक्षा के लिए, न कि यह काम स्वच्छन्द काम-तृप्ति के लिए हो। फिर उनसे दाम्पत्य जीवन का आनन्द लो तो उसके बदले उनका निश्चित किया हुए हक़ (मह्रि) अदा करो और यदि हक़ निश्चित हो जाने के पश्चात तुम आपम में अपनी प्रसन्नता से कोई समझौता कर लो, तो इसमें तुम्हारे लिए कोई दोष नहीं। निस्संदेह अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है
وَمَنْ لَمْ يَسْتَطِعْ مِنْكُمْ طَوْلًا اَنْ يَنْكِحَ الْمُحْصَنَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ فَمِنْ مَا مَلَكَتْ اَيْمَانُكُمْ مِنْ فَتَيَاتِكُمُ الْمُؤْمِنَاتِۜ وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِا۪يمَانِكُمْۜ بَعْضُكُمْ مِنْ بَعْضٍۚ فَانْكِحُوهُنَّ بِاِذْنِ اَهْلِهِنَّ وَاٰتُوهُنَّ اُجُورَهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ مُحْصَنَاتٍ غَيْرَ مُسَافِحَاتٍ وَلَا مُتَّخِذَاتِ اَخْدَانٍۚ فَاِذَٓا اُحْصِنَّ فَاِنْ اَتَيْنَ بِفَاحِشَةٍ فَعَلَيْهِنَّ نِصْفُ مَا عَلَى الْمُحْصَنَاتِ مِنَ الْعَذَابِۜ ذٰلِكَ لِمَنْ خَشِيَ الْعَنَتَ مِنْكُمْۜ وَاَنْ تَصْبِرُوا خَيْرٌ لَكُمْۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ۟25
और तुममें से जिस किसी की इतनी सामर्थ्य न हो कि पाकदामन, स्वतंत्र, ईमानवाली स्त्रियों से विवाह कर सके, तो तुम्हारी वे ईमानवाली जवान लौडियाँ ही सही जो तुम्हारे क़ब्ज़े में हो। और अल्लाह तुम्हारे ईमान को भली-भाँति जानता है। तुम सब आपस में एक ही हो, तो उनके मालिकों की अनुमति से तुम उनसे विवाह कर लो और सामान्य नियम के अनुसार उन्हें उनका हक़ भी दो। वे पाकदामनी की सुरक्षा करनेवाली हों, स्वच्छन्द काम-तृप्ति न करनेवाली हों और न वे चोरी-छिपे ग़ैरो से प्रेम करनेवाली हों। फिर जब वे विवाहिता बना ली जाएँ और उसके पश्चात कोई अश्लील कर्म कर बैठें, तो जो दंड सम्मानित स्त्रियों के लिए है, उसका आधा उनके लिए होगा। यह तुममें से उस व्यक्ति के लिए है, जिसे ख़राबी में पड़ जाने का भय हो, और यह कि तुम धैर्य से काम लो तो यह तुम्हारे लिए अधिक अच्छा है। निस्संदेह अल्लाह बहुत क्षमाशील, दयावान है
يُر۪يدُ اللّٰهُ لِيُبَيِّنَ لَكُمْ وَيَهْدِيَكُمْ سُنَنَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَيَتُوبَ عَلَيْكُمْۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ26
अल्लाह चाहता है कि तुमपर स्पष्ट कर दे और तुम्हें उन लोगों के तरीक़ों पर चलाए, जो तुमसे पहले हुए है और तुमपर दयादृष्टि करे। अल्लाह तो सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है