83. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
4 · अन-निसा
وَاللّٰهُ يُر۪يدُ اَنْ يَتُوبَ عَلَيْكُمْ وَيُر۪يدُ الَّذ۪ينَ يَتَّبِعُونَ الشَّهَوَاتِ اَنْ تَم۪يلُوا مَيْلًا عَظ۪يمًا27
और अल्लाह चाहता है कि जो तुमपर दयादृष्टि करे, किन्तु जो लोग अपनी तुच्छ इच्छाओं का पालन करते है, वे चाहते है कि तुम राह से हटकर बहुत दूर जा पड़ो
يُر۪يدُ اللّٰهُ اَنْ يُخَفِّفَ عَنْكُمْۚ وَخُلِقَ الْاِنْسَانُ ضَع۪يفًا28
अल्लाह चाहता है कि तुमपर से बोझ हलका कर दे, क्योंकि इनसान निर्बल पैदा किया गया है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَاْكُلُٓوا اَمْوَالَكُمْ بَيْنَكُمْ بِالْبَاطِلِ اِلَّٓا اَنْ تَكُونَ تِجَارَةً عَنْ تَرَاضٍ مِنْكُمْ وَلَا تَقْتُلُٓوا اَنْفُسَكُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ بِكُمْ رَح۪يمًا29
ऐ ईमान लानेवालो! आपस में एक-दूसरे के माल ग़लत तरीक़े से न खाओ - यह और बात है कि तुम्हारी आपस में रज़ामन्दी से कोई सौदा हो - और न अपनों की हत्या करो। निस्संदेह अल्लाह तुमपर बहुत दयावान है
وَمَنْ يَفْعَلْ ذٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْل۪يهِ نَارًاۜ وَكَانَ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرًا30
और जो कोई ज़ुल्म और ज़्यादती से ऐसा करेगा, तो उसे हम जल्द ही आग में झोंक देंगे, और यह अल्लाह के लिए सरल है
اِنْ تَجْتَنِبُوا كَبَٓائِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنْكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُمْ مُدْخَلًا كَر۪يمًا31
यदि तुम उन बड़े गुनाहों से बचते रहो, जिनसे तुम्हे रोका जा रहा है, तो हम तुम्हारी बुराइयों को तुमसे दूर कर देंगे और तुम्हें प्रतिष्ठित स्थान में प्रवेश कराएँगे
وَلَا تَتَمَنَّوْا مَا فَضَّلَ اللّٰهُ بِه۪ بَعْضَكُمْ عَلٰى بَعْضٍۜ لِلرِّجَالِ نَص۪يبٌ مِمَّا اكْتَسَبُوا وَلِلنِّسَٓاءِ نَص۪يبٌ مِمَّا اكْتَسَبْنَۜ وَسْـَٔلُوا اللّٰهَ مِنْ فَضْلِه۪ۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمًا32
और उसकी कामना न करो जिसमें अल्लाह ने तुमसे किसी को किसी से उच्च रखा है। पुरुषों ने जो कुछ कमाया है, उसके अनुसार उनका हिस्सा है और स्त्रियों ने जो कुछ कमाया है, उसके अनुसार उनका हिस्सा है। अल्लाह से उसका उदार दान चाहो। निस्संदेह अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है
وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْاَقْرَبُونَۜ وَالَّذ۪ينَ عَقَدَتْ اَيْمَانُكُمْ فَاٰتُوهُمْ نَص۪يبَهُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَه۪يدًا۟33
और प्रत्येक माल के लिए, जो माँ-बाप और नातेदार छोड़ जाएँ, हमने वासिस ठहरा दिए है और जिन लोगों से अपनी क़समों के द्वारा तुम्हारा पक्का मामला हुआ हो, तो उन्हें भी उनका हिस्सा दो। निस्संदेह हर चीज़ अल्लाह के समक्ष है