87. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

87. पृष्ठ
4 · अन-निसा
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ لَعَنَهُمُ اللّٰهُۜ وَمَنْ يَلْعَنِ اللّٰهُ فَلَنْ تَجِدَ لَهُ نَص۪يرًاۜ52
वही है जिनपर अल्लाह ने लातन की है, और जिसपर अल्लाह लानत कर दे, उसका तुम कोई सहायक कदापि न पाओगे
اَمْ لَهُمْ نَص۪يبٌ مِنَ الْمُلْكِ فَاِذًا لَا يُؤْتُونَ النَّاسَ نَق۪يرًاۙ53
या बादशाही में इनका कोई हिस्सा है? फिर तो ये लोगों को फूटी कौड़ी तक भी न देते
اَمْ يَحْسُدُونَ النَّاسَ عَلٰى مَٓا اٰتٰيهُمُ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِه۪ۚ فَقَدْ اٰتَيْنَٓا اٰلَ اِبْرٰه۪يمَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَاٰتَيْنَاهُمْ مُلْكًا عَظ۪يمًا54
या ये लोगों से इसलिए ईर्ष्या करते है कि अल्लाह ने उन्हें अपने उदार दान से अनुग्रहित कर दिया? हमने तो इबराहीम के लोगों को किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) दी और उन्हें बड़ा राज्य प्रदान किया
فَمِنْهُمْ مَنْ اٰمَنَ بِه۪ وَمِنْهُمْ مَنْ صَدَّ عَنْهُۜ وَكَفٰى بِجَهَنَّمَ سَع۪يرًا55
फिर उनमें से कोई उसपर ईमान लाया और उसमें से किसी ने किनारा खीच लिया। और (ऐसे लोगों के लिए) जहन्नम की भड़कती आग ही काफ़ी है
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِنَا سَوْفَ نُصْل۪يهِمْ نَارًاۜ كُلَّمَا نَضِجَتْ جُلُودُهُمْ بَدَّلْنَاهُمْ جُلُودًا غَيْرَهَا لِيَذُوقُوا الْعَذَابَۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَز۪يزًا حَك۪يمًا56
जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, उन्हें हम जल्द ही आग में झोंकेंगे। जब भी उनकी खालें पक जाएँगी, तो हम उन्हें दूसरी खालों में बदल दिया करेंगे, ताकि वे यातना का मज़ा चखते ही रहें। निस्संदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۜ لَهُمْ ف۪يهَٓا اَزْوَاجٌ مُطَهَّرَةٌۘ وَنُدْخِلُهُمْ ظِلًّا ظَل۪يلًا57
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उन्हें हम ऐसे बाग़ो में दाखिल करेंगे, जिनके नीचे नहरें बह रहीं होगी, जहाँ वे सदैव रहेंगे। उनके लिए वहाँ पाक जोड़े होंगे और हम उन्हें घनी छाँव में दाखिल करेंगे
اِنَّ اللّٰهَ يَاْمُرُكُمْ اَنْ تُؤَدُّوا الْاَمَانَاتِ اِلٰٓى اَهْلِهَاۙ وَاِذَا حَكَمْتُمْ بَيْنَ النَّاسِ اَنْ تَحْكُمُوا بِالْعَدْلِۜ اِنَّ اللّٰهَ نِعِمَّا يَعِظُكُمْ بِه۪ۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ سَم۪يعًا بَصِيرًا58
अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतों को उनके हक़दारों तक पहुँचा दिया करो। और जब लोगों के बीच फ़ैसला करो, तो न्यायपूर्वक फ़ैसला करो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी नसीहत करता है। निस्सदेह, अल्लाह सब कुछ सुनता, देखता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَط۪يعُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُوا الرَّسُولَ وَاُو۬لِي الْاَمْرِ مِنْكُمْۚ فَاِنْ تَنَازَعْتُمْ ف۪ي شَيْءٍ فَرُدُّوهُ اِلَى اللّٰهِ وَالرَّسُولِ اِنْ كُنْتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۜ ذٰلِكَ خَيْرٌ وَاَحْسَنُ تَاْو۪يلًا۟59
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल का कहना मानो और उनका भी कहना मानो जो तुममें अधिकारी लोग है। फिर यदि तुम्हारे बीच किसी मामले में झगड़ा हो जाए, तो उसे तुम अल्लाह और रसूल की ओर लौटाओ, यदि तुम अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखते हो। यदि उत्तम है और परिणाम की स्पष्ट से भी अच्छा है