89. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

89. पृष्ठ
4 · अन-निसा
وَلَوْ اَنَّا كَتَبْنَا عَلَيْهِمْ اَنِ اقْتُلُٓوا اَنْفُسَكُمْ اَوِ اخْرُجُوا مِنْ دِيَارِكُمْ مَا فَعَلُوهُ اِلَّا قَل۪يلٌ مِنْهُمْۜ وَلَوْ اَنَّهُمْ فَعَلُوا مَا يُوعَظُونَ بِه۪ لَكَانَ خَيْرًا لَهُمْ وَاَشَدَّ تَثْب۪يتًاۙ66
और यदि कहीं हमने उन्हें आदेश दिया होता कि "अपनों को क़त्ल करो या अपने घरों से निकल जाओ।" तो उनमें से थोड़े ही ऐसा करते। हालाँकि जो नसीहत उन्हें दी जाती है, अगर वे उसे व्यवहार में लाते तो यह बात उनके लिए अच्छी होती और ज़्यादा ज़माव पैदा करनेवाली होती
وَاِذًا لَاٰتَيْنَاهُمْ مِنْ لَدُنَّٓا اَجْرًا عَظ۪يمًاۙ67
और उस समय हम उन्हें अपनी ओर से निश्चय ही बड़ा बदला प्रदान करते
وَلَهَدَيْنَاهُمْ صِرَاطًا مُسْتَق۪يمًا68
और उन्हें सीधे मार्ग पर लगा देते
وَمَنْ يُطِعِ اللّٰهَ وَالرَّسُولَ فَاُو۬لٰٓئِكَ مَعَ الَّذ۪ينَ اَنْعَمَ اللّٰهُ عَلَيْهِمْ مِنَ النَّبِيّ۪نَ وَالصِّدّ۪يق۪ينَ وَالشُّهَدَٓاءِ وَالصَّالِح۪ينَۚ وَحَسُنَ اُو۬لٰٓئِكَ رَف۪يقًاۜ69
जो अल्लाह और रसूल की आज्ञा का पालन करता है, तो ऐसे ही लोग उन लोगों के साथ है जिनपर अल्लाह की कृपा स्पष्ट रही है - वे नबी, सिद्दीक़, शहीद और अच्छे लोग है। और वे कितने अच्छे साथी है
ذٰلِكَ الْفَضْلُ مِنَ اللّٰهِۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ عَل۪يمًا۟70
यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है। और काफ़ी है अल्लाह, इस हाल में कि वह भली-भाँति जानता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا خُذُوا حِذْرَكُمْ فَانْفِرُوا ثُبَاتٍ اَوِ انْفِرُوا جَم۪يعًا71
ऐ ईमान लानेवालो! अपने बचाव की साम्रगी (हथियार आदि) सँभालो। फिर या तो अलग-अलग टुकड़ियों में निकलो या इकट्ठे होकर निकलो
وَاِنَّ مِنْكُمْ لَمَنْ لَيُبَطِّئَنَّۚ فَاِنْ اَصَابَتْكُمْ مُص۪يبَةٌ قَالَ قَدْ اَنْعَمَ اللّٰهُ عَلَيَّ اِذْ لَمْ اَكُنْ مَعَهُمْ شَه۪يدًا72
तुमसे से कोई ऐसा भी है जो ढीला पड़ जाता है, फिर यदि तुमपर कोई मुसीबत आए तो कहने लगता है कि अल्लाह ने मुझपर कृपा की कि मैं इन लोगों के साथ न गया
وَلَئِنْ اَصَابَكُمْ فَضْلٌ مِنَ اللّٰهِ لَيَقُولَنَّ كَاَنْ لَمْ تَكُنْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُ مَوَدَّةٌ يَا لَيْتَن۪ي كُنْتُ مَعَهُمْ فَاَفُوزَ فَوْزًا عَظ۪يمًا73
परन्तु यदि अल्लाह की ओर से तुमपर कोई उदार अनुग्रह हो तो वह इस प्रकार से जैसे तुम्हारे और उनके बीच प्रेम का कोई सम्बन्ध ही नहीं, कहता है, "क्या ही अच्छा होता कि मैं भी उनके साथ होता, तो बड़ी सफलता प्राप्त करता।"
فَلْيُقَاتِلْ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ الَّذ۪ينَ يَشْرُونَ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا بِالْاٰخِرَةِۜ وَمَنْ يُقَاتِلْ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ فَيُقْتَلْ اَوْ يَغْلِبْ فَسَوْفَ نُؤْت۪يهِ اَجْرًا عَظ۪يمًا74
तो जो लोग आख़िरत (परलोक) के बदले सांसारिक जीवन का सौदा करें, तो उन्हें चाहिए कि अल्लाह के मार्ग में लड़े। जो अल्लाह के मार्ग में लड़ेगी, चाहे वह मारा जाए या विजयी रहे, उसे हम शीघ्र ही बड़ा बदला प्रदान करेंगे