9. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

9. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
وَاِذْ قُلْنَا ادْخُلُوا هٰذِهِ الْقَرْيَةَ فَكُلُوا مِنْهَا حَيْثُ شِئْتُمْ رَغَدًا وَادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا وَقُولُوا حِطَّةٌ نَغْفِرْ لَكُمْ خَطَايَاكُمْۜ وَسَنَز۪يدُ الْمُحْسِن۪ينَ58
और जब हमने कहा था, "इस बस्ती में प्रवेश करो फिर उसमें से जहाँ से चाहो जी भर खाओ, और बस्ती के द्वार में सजदागुज़ार बनकर प्रवेश करो और कहो, "छूट हैं।" हम तुम्हारी खताओं को क्षमा कर देंगे और अच्छे से अच्छा काम करनेवालों पर हम और अधिक अनुग्रह करेंगे।"
فَبَدَّلَ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا قَوْلًا غَيْرَ الَّذ۪ي ق۪يلَ لَهُمْ فَاَنْزَلْنَا عَلَى الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا رِجْزًا مِنَ السَّمَٓاءِ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ۟59
फिर जो बात उनसे कहीं गई थी ज़ालिमों ने उसे दूसरी बात से बदल दिया। अन्ततः ज़ालिमों पर हमने, जो अवज्ञा वे कर रहे थे उसके कारण, आकाश से यातना उतारी
وَاِذِ اسْتَسْقٰى مُوسٰى لِقَوْمِه۪ فَقُلْنَا اضْرِبْ بِعَصَاكَ الْحَجَرَۜ فَانْفَجَرَتْ مِنْهُ اثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْنًاۜ قَدْ عَلِمَ كُلُّ اُنَاسٍ مَشْرَبَهُمْۜ كُلُوا وَاشْرَبُوا مِنْ رِزْقِ اللّٰهِ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْاَرْضِ مُفْسِد۪ينَ60
और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी की प्रार्थना को तो हमने कहा, "चट्टान पर अपनी लाठी मारो," तो उससे बारह स्रोत फूट निकले और हर गिरोह ने अपना-अपना घाट जान लिया - "खाओ और पियो अल्लाह का दिया और धरती में बिगाड़ फैलाते न फिरो।"
وَاِذْ قُلْتُمْ يَا مُوسٰى لَنْ نَصْبِرَ عَلٰى طَعَامٍ وَاحِدٍ فَادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُخْرِجْ لَنَا مِمَّا تُنْبِتُ الْاَرْضُ مِنْ بَقْلِهَا وَقِثَّٓائِهَا وَفُومِهَا وَعَدَسِهَا وَبَصَلِهَاۜ قَالَ اَتَسْتَبْدِلُونَ الَّذ۪ي هُوَ اَدْنٰى بِالَّذ۪ي هُوَ خَيْرٌۜ اِهْبِطُوا مِصْرًا فَاِنَّ لَكُمْ مَا سَاَلْتُمْۜ وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الذِّلَّةُ وَالْمَسْكَنَةُ وَبَٓاؤُ۫ بِغَضَبٍ مِنَ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ كَانُوا يَكْفُرُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَيَقْتُلُونَ النَّبِيّ۪نَ بِغَيْرِ الْحَقِّۜ ذٰلِكَ بِمَا عَصَوْا وَكَانُوا يَعْتَدُونَ۟61
और याद करो जब तुमने कहा था, "ऐ मूसा, हम एक ही प्रकार के खाने पर कदापि संतोष नहीं कर सकते, अतः हमारे लिए अपने रब से प्रार्थना करो कि हमारे वास्ते धरती की उपज से साग-पात और ककड़ियाँ और लहसुन और मसूर और प्याज़ निकाले।" और मूसा ने कहा, "क्या तुम जो घटिया चीज़ है उसको उससे बदलकर लेना चाहते हो जो उत्तम है? किसी नगर में उतरो, फिर जो कुछ तुमने माँगा हैं, तुम्हें मिल जाएगा" - और उनपर अपमान और हीन दशा थोप दी गई, और अल्लाह के प्रकोप के भागी हुए। यह इसलिए कि वे अल्लाह की आयतों का इनकार करते रहे और नबियों की अकारण हत्या करते थे। यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की और वे सीमा का उल्लंघन करते रहे