91. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
4 · अन-निसा
مَنْ يُطِعِ الرَّسُولَ فَقَدْ اَطَاعَ اللّٰهَۚ وَمَنْ تَوَلّٰى فَمَٓا اَرْسَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَف۪يظًاۜ80
जिसने रसूल की आज्ञा का पालन किया, उसने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया और जिसने मुँह मोड़ा तो हमने तुम्हें ऐसे लोगों पर कोई रखवाला बनाकर तो नहीं भेजा है
وَيَقُولُونَ طَاعَةٌۘ فَاِذَا بَرَزُوا مِنْ عِنْدِكَ بَيَّتَ طَٓائِفَةٌ مِنْهُمْ غَيْرَ الَّذ۪ي تَقُولُۜ وَاللّٰهُ يَكْتُبُ مَا يُبَيِّتُونَۚ فَاَعْرِضْ عَنْهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ وَك۪يلًا81
और वे दावा तो आज्ञापालन का करते है, परन्तु जब तुम्हारे पास से हटते है तो उनमें एक गिरोह अपने कथन के विपरीत रात में षड्यंत्र करता है । जो कुछ वे षड्यंत्र करते है, अल्लाह उसे लिख रहा है। तो तुम उनसे रुख़ फेर लो और अल्लाह पर भरोसा रखो, और अल्लाह का कार्यसाधक होना काफ़ी है!
اَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْاٰنَۜ وَلَوْ كَانَ مِنْ عِنْدِ غَيْرِ اللّٰهِ لَوَجَدُوا ف۪يهِ اخْتِلَافًا كَث۪يرًا82
क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते? यदि यह अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की ओर से होता, तो निश्चय ही वे इसमें बहुत-सी बेमेल बातें पाते
وَاِذَا جَٓاءَهُمْ اَمْرٌ مِنَ الْاَمْنِ اَوِ الْخَوْفِ اَذَاعُوا بِه۪ۜ وَلَوْ رَدُّوهُ اِلَى الرَّسُولِ وَاِلٰٓى اُو۬لِي الْاَمْرِ مِنْهُمْ لَعَلِمَهُ الَّذ۪ينَ يَسْتَنْبِطُونَهُ مِنْهُمْۜ وَلَوْلَا فَضْلُ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ لَاتَّبَعْتُمُ الشَّيْطَانَ اِلَّا قَل۪يلًا83
जब उनके पास निश्चिन्तता या भय की कोई बात पहुचती है तो उसे फैला देते है, हालाँकि अगर वे उसे रसूल और अपने समुदाय के उतरदायी व्यक्तियों तक पहुँचाते तो उसे वे लोग जान लेते जो उनमें उसकी जाँच कर सकते है। और यदि तुमपर अल्लाह का उदार अनुग्रह और उसकी दयालुता न होती, तो थोड़े लोगों के सिवा तुम सब शैतान के पीछे चलने लग जाते
فَقَاتِلْ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۚ لَا تُكَلَّفُ اِلَّا نَفْسَكَ وَحَرِّضِ الْمُؤْمِن۪ينَۚ عَسَى اللّٰهُ اَنْ يَكُفَّ بَاْسَ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ وَاللّٰهُ اَشَدُّ بَاْسًا وَاَشَدُّ تَنْك۪يلًا84
अतः अल्लाह के मार्ग में युद्ध करो - तुमपर तो बस तुम्हारी अपनी ही ज़िम्मेदारी है - और ईमानवालों की कमज़ोरियो को दूर करो और उन्हें (युद्ध के लिए) उभारो। इसकी बहुत सम्भावना है कि अल्लाह इनकार करनेवालों के ज़ोर को रोक लगा दे। अल्लाह बड़ा ज़ोरवाला और कठोर दंड देनेवाला है
مَنْ يَشْفَعْ شَفَاعَةً حَسَنَةً يَكُنْ لَهُ نَص۪يبٌ مِنْهَاۚ وَمَنْ يَشْفَعْ شَفَاعَةً سَيِّئَةً يَكُنْ لَهُ كِفْلٌ مِنْهَاۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ مُق۪يتًا85
जो कोई अच्छी सिफ़ारिश करेगा, उसे उसके कारण उसका प्रतिदान मिलेगा और जो बुरी सिफ़ारिश करेगा, तो उसके कारँ उसका बोझ उसपर पड़कर रहेगा। अल्लाह को तो हर चीज़ पर क़ाबू हासिल है
وَاِذَا حُيّ۪يتُمْ بِتَحِيَّةٍ فَحَيُّوا بِاَحْسَنَ مِنْهَٓا اَوْ رُدُّوهَاۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ حَس۪يبًا86
और तुम्हें जब सलामती की कोई दुआ दी जाए, तो तुम सलामती की उससे अच्छी दुआ दो या उसी को लौटा दो। निश्चय ही, अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखता है