92. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

92. पृष्ठ
4 · अन-निसा
اَللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ لَيَجْمَعَنَّكُمْ اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِ لَا رَيْبَ ف۪يهِۜ وَمَنْ اَصْدَقُ مِنَ اللّٰهِ حَد۪يثًا۟87
अल्लाह के सिवा कोई इष्ट -पूज्य नहीं। वह तुम्हें क़ियामत के दिन की ओर ले जाकर इकट्ठा करके रहेगा, जिसके आने में कोई संदेह नहीं, और अल्लाह से बढ़कर सच्ची बात और किसकी हो सकती है
فَمَا لَكُمْ فِي الْمُنَافِق۪ينَ فِئَتَيْنِ وَاللّٰهُ اَرْكَسَهُمْ بِمَا كَسَبُواۜ اَتُر۪يدُونَ اَنْ تَهْدُوا مَنْ اَضَلَّ اللّٰهُۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَلَنْ تَجِدَ لَهُ سَب۪يلًا88
फिर तुम्हें क्या हो गया है कि कपटाचारियों (मुनाफ़िक़ो) के विषय में तुम दो गिरोह हो रहे हो, यद्यपि अल्लाह ने तो उनकी करतूतों के कारण उन्हें उल्टा फेर दिया है? क्या तुम उसे मार्ग पर लाना चाहते हो जिसे अल्लाह ने गुमराह छोड़ दिया है? हालाँकि जिसे अल्लाह मार्ग न दिखाए, उसके लिए तुम कदापि कोई मार्ग नहीं पा सकते
وَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ كَمَا كَفَرُوا فَتَكُونُونَ سَوَٓاءً فَلَا تَتَّخِذُوا مِنْهُمْ اَوْلِيَٓاءَ حَتّٰى يُهَاجِرُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۜ فَاِنْ تَوَلَّوْا فَخُذُوهُمْ وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ وَجَدْتُمُوهُمْۖ وَلَا تَتَّخِذُوا مِنْهُمْ وَلِيًّا وَلَا نَص۪يرًاۙ89
वे तो चाहते है कि जिस प्रकार वे स्वयं अधर्मी है, उसी प्रकार तुम भी अधर्मी बनकर उन जैसे हो जाओ; तो तुम उनमें से अपने मित्र न बनाओ, जब तक कि वे अल्लाह के मार्ग में घरबार न छोड़े। फिर यदि वे इससे पीठ फेरें तो उन्हें पकड़ो, और उन्हें क़त्ल करो जहाँ कही भी उन्हें पाओ - तो उनमें से किसी को न अपना मित्र बनाना और न सहायक -
اِلَّا الَّذ۪ينَ يَصِلُونَ اِلٰى قَوْمٍ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ م۪يثَاقٌ اَوْ جَٓاؤُ۫كُمْ حَصِرَتْ صُدُورُهُمْ اَنْ يُقَاتِلُوكُمْ اَوْ يُقَاتِلُوا قَوْمَهُمْۜ وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ لَسَلَّطَهُمْ عَلَيْكُمْ فَلَقَاتَلُوكُمْۚ فَاِنِ اعْتَزَلُوكُمْ فَلَمْ يُقَاتِلُوكُمْ وَاَلْقَوْا اِلَيْكُمُ السَّلَمَۙ فَمَا جَعَلَ اللّٰهُ لَكُمْ عَلَيْهِمْ سَب۪يلًا90
सिवाय उन लोगों के जो ऐसे लोगों से सम्बन्ध रखते हों, जिनसे तुम्हारे और उनकी बीच कोई समझौता हो या वे तुम्हारे पास इस दशा में आएँ कि उनके दिल इससे तंग हो रहे हों कि वे तुमसे लड़े या अपने लोगों से लड़ाई करें। यदि अल्लाह चाहता तो उन्हें तुमपर क़ाबू दे देता। फिर तो वे तुमसे अवश्य लड़ते; तो यदि वे तुमसे अलग रहें और तुमसे न लड़ें और संधि के लिए तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाएँ तो उनके विरुद्ध अल्लाह ने तुम्हारे लिए कोई रास्ता नहीं रखा है
سَتَجِدُونَ اٰخَر۪ينَ يُر۪يدُونَ اَنْ يَاْمَنُوكُمْ وَيَاْمَنُوا قَوْمَهُمْۜ كُلَّمَا رُدُّٓوا اِلَى الْفِتْنَةِ اُرْكِسُوا ف۪يهَاۚ فَاِنْ لَمْ يَعْتَزِلُوكُمْ وَيُلْقُٓوا اِلَيْكُمُ السَّلَمَ وَيَكُفُّٓوا اَيْدِيَهُمْ فَخُذُوهُمْ وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْۜ وَاُو۬لٰٓئِكُمْ جَعَلْنَا لَكُمْ عَلَيْهِمْ سُلْطَانًا مُب۪ينًا۟91
अब तुम कुछ ऐसे लोगों को भी पाओगे, जो चाहते है कि तुम्हारी ओर से निश्चिन्त होकर रहें और अपने लोगों की ओर से भी निश्चिन्त होकर रहे। परन्तु जब भी वे फ़साद और उपद्रव की ओर फेरे गए तो वे उसी में औधे जो गिरे। तो यदि वे तुमसे अलग-थलग न रहें और तुम्हारी ओर सुलह का हाथ न बढ़ाएँ, और अपने हाथ न रोकें, तो तुम उन्हें पकड़ो और क़त्ल करो, जहाँ कहीं भी तुम उन्हें पाओ। उनके विरुद्ध हमने तुम्हें खुला अधिकार दे रखा है