95. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

95. पृष्ठ
4 · अन-निसा
وَاِذَا كُنْتَ ف۪يهِمْ فَاَقَمْتَ لَهُمُ الصَّلٰوةَ فَلْتَقُمْ طَٓائِفَةٌ مِنْهُمْ مَعَكَ وَلْيَاْخُذُٓوا اَسْلِحَتَهُمْ۠ فَاِذَا سَجَدُوا فَلْيَكُونُوا مِنْ وَرَٓائِكُمْۖ وَلْتَاْتِ طَٓائِفَةٌ اُخْرٰى لَمْ يُصَلُّوا فَلْيُصَلُّوا مَعَكَ وَلْيَاْخُذُوا حِذْرَهُمْ وَاَسْلِحَتَهُمْۚ وَدَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْ تَغْفُلُونَ عَنْ اَسْلِحَتِكُمْ وَاَمْتِعَتِكُمْ فَيَم۪يلُونَ عَلَيْكُمْ مَيْلَةً وَاحِدَةًۜ وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ اِنْ كَانَ بِكُمْ اَذًى مِنْ مَطَرٍ اَوْ كُنْتُمْ مَرْضٰٓى اَنْ تَضَعُٓوا اَسْلِحَتَكُمْۚ وَخُذُوا حِذْرَكُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ اَعَدَّ لِلْكَافِر۪ينَ عَذَابًا مُه۪ينًا102
और जब तुम उनके बीच हो और (लड़ाई की दशा में) उन्हें नमाज़ पढ़ाने के लिए खड़े हो, जो चाहिए कि उनमें से एक गिरोह के लोग तुम्हारे साथ खड़े हो जाएँ और अपने हथियार साथ लिए रहें, और फिर जब वे सजदा कर लें तो उन्हें चाहिए कि वे हटकर तुम्हारे पीछे हो जाएँ और दूसरे गिरोंह के लोग, जिन्होंने अभी नमाज़ नही पढ़ी, आएँ और तुम्हारे साथ नमाज़ पढ़े, और उन्हें भी चाहिए कि वे भी अपने बचाव के सामान और हथियार लिए रहें। विधर्मी चाहते ही है कि वे भी अपने हथियारों और सामान से असावधान हो जाओ तो वे तुम पर एक साथ टूट पड़े। यदि वर्षा के कारण तुम्हें तकलीफ़ होती हो या तुम बीमार हो, तो तुम्हारे लिए कोई गुनाह नहीं कि अपने हथियार रख दो, फिर भी अपनी सुरक्षा का सामान लिए रहो। अल्लाह ने विधर्मियों के लिए अपमानजनक यातना तैयार कर रखी है
فَاِذَا قَضَيْتُمُ الصَّلٰوةَ فَاذْكُرُوا اللّٰهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلٰى جُنُوبِكُمْۚ فَاِذَا اطْمَاْنَنْتُمْ فَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَۚ اِنَّ الصَّلٰوةَ كَانَتْ عَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ كِتَابًا مَوْقُوتًا103
फिर जब तुम नमाज़ अदा कर चुको तो खड़े, बैठे या लेटे अल्लाह को याद करते रहो। फिर जब तुम्हें इतमीनान हो जाए तो विधिवत रूप से नमाज़ पढ़ो। निस्संदेह ईमानवालों पर समय की पाबन्दी के साथ नमाज़ पढना अनिवार्य है
وَلَا تَهِنُوا فِي ابْتِغَٓاءِ الْقَوْمِۜ اِنْ تَكُونُوا تَاْلَمُونَ فَاِنَّهُمْ يَاْلَمُونَ كَمَا تَاْلَمُونَۚ وَتَرْجُونَ مِنَ اللّٰهِ مَا لَا يَرْجُونَۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَل۪يمًا حَك۪يمًا۟104
और उन लोगों का पीछा करने में सुस्ती न दिखाओ। यदि तुम्हें दुख पहुँचता है; तो उन्हें भी दुख पहुँचता है, जिस तरह तुमको दुख पहुँचता है। और तुम अल्लाह से उस चीज़ की आशा करते हो, जिस चीज़ की वे आशा नहीं करते। अल्लाह तो सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है
اِنَّٓا اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ لِتَحْكُمَ بَيْنَ النَّاسِ بِمَٓا اَرٰيكَ اللّٰهُۜ وَلَا تَكُنْ لِلْخَٓائِن۪ينَ خَص۪يمًاۙ105
निस्संदेह हमने यह किताब हक़ के साथ उतारी है, ताकि अल्लाह ने जो कुछ तुम्हें दिखाया है उसके अनुसार लोगों के बीच फ़ैसला करो। और तुम विश्वासघाती लोगों को ओर से झगड़नेवाले न बनो