97. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

97. पृष्ठ
4 · अन-निसा
لَا خَيْرَ ف۪ي كَث۪يرٍ مِنْ نَجْوٰيهُمْ اِلَّا مَنْ اَمَرَ بِصَدَقَةٍ اَوْ مَعْرُوفٍ اَوْ اِصْلَاحٍ بَيْنَ النَّاسِۜ وَمَنْ يَفْعَلْ ذٰلِكَ ابْتِغَٓاءَ مَرْضَاتِ اللّٰهِ فَسَوْفَ نُؤْت۪يهِ اَجْرًا عَظ۪يمًا114
उनकी अधिकतर काना-फूसियों में कोई भलाई नहीं होती। हाँ, जो व्यक्ति सदक़ा देने या भलाई करने या लोगों के बीच सुधार के लिए कुछ कहे, तो उसकी बात और है। और जो कोई यह काम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए करेगा, उसे हम निश्चय ही बड़ा प्रतिदान प्रदान करेंगे
وَمَنْ يُشَاقِقِ الرَّسُولَ مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُ الْهُدٰى وَيَتَّبِعْ غَيْرَ سَب۪يلِ الْمُؤْمِن۪ينَ نُوَلِّه۪ مَا تَوَلّٰى وَنُصْلِه۪ جَهَنَّمَۜ وَسَٓاءَتْ مَص۪يرًا۟115
और जो क्यक्ति, इसके पश्चात भी मार्गदर्शन खुलकर उसके सामने आ गया है, रसूल का विरोध करेगा और ईमानवालों के मार्ग के अतिरिक्त किसी और मार्ग पर चलेगा तो उसे हम उसी पर चलने देंगे, जिसको उसने अपनाया होगा और उसे जहन्नम में झोंक देंगे, और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है
اِنَّ اللّٰهَ لَا يَغْفِرُ اَنْ يُشْرَكَ بِه۪ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذٰلِكَ لِمَنْ يَشَٓاءُۜ وَمَنْ يُشْرِكْ بِاللّٰهِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَالًا بَع۪يدًا116
निस्संदेह अल्लाह इस चीज़ को क्षमा नहीं करेगा कि उसके साथ किसी को शामिल किया जाए। हाँ, इससे नीचे दर्जे के अपराध को, जिसके लिए चाहेगा, क्षमा कर देगा। जो अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराता है, तो वह भटककर बहुत दूर जा पड़ा
اِنْ يَدْعُونَ مِنْ دُونِه۪ٓ اِلَّٓا اِنَاثًاۚ وَاِنْ يَدْعُونَ اِلَّا شَيْطَانًا مَر۪يدًاۙ117
वे अल्लाह से हटकर बस कुछ देवियों को पुकारते है। और वे तो बस सरकश शैतान को पुकारते है;
لَعَنَهُ اللّٰهُۢ وَقَالَ لَاَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَص۪يبًا مَفْرُوضًاۙ118
जिसपर अल्लाह की फिटकार है। उसने कहा था, "मैं तेरे बन्दों में से एख निश्चित हिस्सा लेकर रहूँगा
وَلَاُضِلَّنَّهُمْ وَلَاُمَنِّيَنَّهُمْ وَلَاٰمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ اٰذَانَ الْاَنْعَامِ وَلَاٰمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللّٰهِۜ وَمَنْ يَتَّخِذِ الشَّيْطَانَ وَلِيًّا مِنْ دُونِ اللّٰهِ فَقَدْ خَسِرَ خُسْرَانًا مُب۪ينًاۜ119
"और उन्हें अवश्य ही भटकाऊँगा और उन्हें कामनाओं में उलझाऊँगा, और उन्हें हुक्म दूँगा तो वे चौपायों के कान फाड़ेगे, और उन्हें मैं सुझाव दूँगा तो वे अल्लाह की संरचना में परिवर्तन करेंगे।" और जिसने अल्लाह से हटकर शैतान को अपना संरक्षक और मित्र बनाया, वह खुले घाटे में पड़ गया
يَعِدُهُمْ وَيُمَنّ۪يهِمْۜ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ اِلَّا غُرُورًا120
वह उनसे वादा करता है और उन्हें कामनाओं में उलझाए रखता है, हालाँकि शैतान उनसे जो कुछ वादा करता है वह एक धोके के सिवा कुछ भी नहीं होता
اُو۬لٰٓئِكَ مَاْوٰيهُمْ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَح۪يصًا121
वही लोग है जिनका ठिकाना जहन्नम है और वे उससे अलग होने की कोई जगह न पाएँगे