99. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
4 · अन-निसा
وَاِنِ امْرَاَةٌ خَافَتْ مِنْ بَعْلِهَا نُشُوزًا اَوْ اِعْرَاضًا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَٓا اَنْ يُصْلِحَا بَيْنَهُمَا صُلْحًاۜ وَالصُّلْحُ خَيْرٌۜ وَاُحْضِرَتِ الْاَنْفُسُ الشُّحَّۜ وَاِنْ تُحْسِنُوا وَتَتَّقُوا فَاِنَّ اللّٰهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَب۪يرًا128
यदि किसी स्त्री को अपने पति की और से दुर्व्यवहार या बेरुख़ी का भय हो, तो इसमें उनके लिए कोई दोष नहीं कि वे दोनों आपस में मेल-मिलाप की कोई राह निकाल ले। और मेल-मिलाव अच्छी चीज़ है। और मन तो लोभ एवं कृपणता के लिए उद्यत रहता है। परन्तु यदि तुम अच्छा व्यवहार करो और (अल्लाह का) भय रखो, तो अल्लाह को निश्चय ही जो कुछ तुम करोगे उसकी खबर रहेगी
وَلَنْ تَسْتَط۪يعُٓوا اَنْ تَعْدِلُوا بَيْنَ النِّسَٓاءِ وَلَوْ حَرَصْتُمْ فَلَا تَم۪يلُوا كُلَّ الْمَيْلِ فَتَذَرُوهَا كَالْمُعَلَّقَةِۜ وَاِنْ تُصْلِحُوا وَتَتَّقُوا فَاِنَّ اللّٰهَ كَانَ غَفُورًا رَح۪يمًا129
और चाहे तुम कितना ही चाहो, तुममें इसकी सामर्थ्य नहीं हो सकती कि औरतों के बीच पूर्ण रूप से न्याय कर सको। तो ऐसा भी न करो कि किसी से पूर्णरूप से फिर जाओ, जिसके परिणामस्वरूप वह ऐसी हो जाए, जैसे उसका पति खो गया हो। परन्तु यदि तुम अपना व्यवहार ठीक रखो और (अल्लाह से) डरते रहो, तो निस्संदेह अल्लाह भी बड़ा क्षमाशील, दयावान है
وَاِنْ يَتَفَرَّقَا يُغْنِ اللّٰهُ كُلًّا مِنْ سَعَتِه۪ۜ وَكَانَ اللّٰهُ وَاسِعًا حَك۪يمًا130
और यदि दोनों अलग ही हो जाएँ तो अल्लाह अपनी समाई से एक को दूसरे से बेपररवाह कर देगा। अल्लाह बड़ी समाईवाला, तत्वदर्शी है
وَلِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَلَقَدْ وَصَّيْنَا الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَاِيَّاكُمْ اَنِ اتَّقُوا اللّٰهَۜ وَاِنْ تَكْفُرُوا فَاِنَّ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَنِيًّا حَم۪يدًا131
आकाशों और धरती में जो कुछ है, सब अल्लाह ही का है। तुमसे पहले जिन्हें किताब दी गई थी, उन्हें और तुम्हें भी हमने ताकीद की है कि "अल्लाह का डर रखो।" यदि तुम इनकार करते हो, तो इससे क्या होने का? आकाशों और धरती में जो कुछ है, सब अल्लाह ही का रहेगा। अल्लाह तो निस्पृह, प्रशंसनीय है
وَلِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ وَك۪يلًا132
हाँ, आकाशों और धरती में जो कुछ है, अल्लाह ही का है और अल्लाह कार्यसाधक की हैसियत से काफ़ी है
اِنْ يَشَاْ يُذْهِبْكُمْ اَيُّهَا النَّاسُ وَيَاْتِ بِاٰخَر۪ينَۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَلٰى ذٰلِكَ قَد۪يرًا133
ऐ लोगों! यदि वह चाहे तो तुम्हें हटा दे और तुम्हारी जगह दूसरों को ले आए। अल्लाह को इसकी पूरी सामर्थ्य है
مَنْ كَانَ يُر۪يدُ ثَوَابَ الدُّنْيَا فَعِنْدَ اللّٰهِ ثَوَابُ الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِۜ وَكَانَ اللّٰهُ سَم۪يعًا بَص۪يرًا۟134
जो कोई दुनिया का बदला चाहता है, तो अल्लाह के पास दुनिया का बदला भी है और आख़िरत का भी। अल्लाह सब कुछ सुनता, देखता है