1. अल-फ़ातिहा2. अल-बक़रा3. आले-इमरान4. अन-निसा5. अल-माइदा6. अल-अनाम7. अल-आराफ़8. अल-अनफाल9. अत-तौबा10. यूनुस11. हूद12. यूसुफ़13. अर-रअद14. इब्राहीम15. अल-हिज्र16. अन-नहल17. अल-इसरा18. अल-कहफ19. मरियम20. ता हा21. अल-अंबिया22. अल-हज23. अल-मोमिनून24. अन-नूर25. अल-फुरकान26. अश-शुअरा27. अन-नमल28. अल-क़सस29. अल-अंकबूत30. अर-रूम31. लुक़मान32. अस-सजदा33. अल-अहज़ाब34. सबा35. फ़ातिर36. यासीन37. अस-साफ्फ़ात38. साद39. अज़-ज़ुमर40. ग़ाफिर41. हामीम अस-सजदा42. अश-शूरा43. अज़-ज़ुख़रुफ़44. अद-दुखान45. अल-जासिया46. अल-अहक़ाफ़47. मुहम्मद48. अल-फतह49. अल-हुजरात50. काफ51. अज़-ज़ारियात52. अत-तूर53. अन-नज्म54. अल-क़मर55. अर-रहमान56. अल-वाकिया57. अल-हदीद58. अल-मुजादिला59. अल-हश्र60. अल-मुमतहिना61. अस-सफ्फ़62. अल-जुमुआ63. अल-मुनाफ़िक़ून64. अत-तग़ाबुन65. अत-तलाक66. अत-तहरीम67. अल-मुल्क68. अल-क़लम69. अल-हाक़ा70. अल-मआरिज71. नूह72. अल-जिन73. अल-मुज़्ज़म्मिल74. अल-मुद्दस्सिर75. अल-क़ियामा76. अल-इंसान77. अल-मुरसालात78. अन्नब'अ79. अन-नाज़िआत80. अबस81. अत-तकवीर82. अल-इंफितार83. अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन84. अल-इन्शिकाक़85. अल-बुरूज86. अत-तारिक़87. अल-आ'ला88. अल-ग़ाशिया89. अल-फ़जर90. अल-बलद91. अश-शम्स92. अल-लैल93. अज़-ज़ुहा94. अल-इन्शिराह95. अत-तिन96. अल-अलक़97. अल-क़द्र98. अल-बैय्यिना99. अज़-ज़लज़ला100. अल-आदियात100. अल-आदियात101. अल-क़ारिया102. अत-तकासुर103. अल-अस्र104. अल-हुमज़ा105. अल-फ़ील106. क़ुरैश107. अल-माउं108. अल-कौसर109. अल-काफ़िरून110. अन-नस्र111. अल-मसद112. अल-इख़लास113. अल-फ़लक114. अन्नास
1. अल-फ़ातिहा2. अल-बक़रा3. आले-इमरान4. अन-निसा5. अल-माइदा6. अल-अनाम7. अल-आराफ़8. अल-अनफाल9. अत-तौबा10. यूनुस11. हूद12. यूसुफ़13. अर-रअद14. इब्राहीम15. अल-हिज्र16. अन-नहल17. अल-इसरा18. अल-कहफ19. मरियम20. ता हा21. अल-अंबिया22. अल-हज23. अल-मोमिनून24. अन-नूर25. अल-फुरकान26. अश-शुअरा27. अन-नमल28. अल-क़सस29. अल-अंकबूत30. अर-रूम31. लुक़मान32. अस-सजदा33. अल-अहज़ाब34. सबा35. फ़ातिर36. यासीन37. अस-साफ्फ़ात38. साद39. अज़-ज़ुमर40. ग़ाफिर41. हामीम अस-सजदा42. अश-शूरा43. अज़-ज़ुख़रुफ़44. अद-दुखान45. अल-जासिया46. अल-अहक़ाफ़47. मुहम्मद48. अल-फतह49. अल-हुजरात50. काफ51. अज़-ज़ारियात52. अत-तूर53. अन-नज्म54. अल-क़मर55. अर-रहमान56. अल-वाकिया57. अल-हदीद58. अल-मुजादिला59. अल-हश्र60. अल-मुमतहिना61. अस-सफ्फ़62. अल-जुमुआ63. अल-मुनाफ़िक़ून64. अत-तग़ाबुन65. अत-तलाक66. अत-तहरीम67. अल-मुल्क68. अल-क़लम69. अल-हाक़ा70. अल-मआरिज71. नूह72. अल-जिन73. अल-मुज़्ज़म्मिल74. अल-मुद्दस्सिर75. अल-क़ियामा76. अल-इंसान77. अल-मुरसालात78. अन्नब'अ79. अन-नाज़िआत80. अबस81. अत-तकवीर82. अल-इंफितार83. अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन84. अल-इन्शिकाक़85. अल-बुरूज86. अत-तारिक़87. अल-आ'ला88. अल-ग़ाशिया89. अल-फ़जर90. अल-बलद91. अश-शम्स92. अल-लैल93. अज़-ज़ुहा94. अल-इन्शिराह95. अत-तिन96. अल-अलक़97. अल-क़द्र98. अल-बैय्यिना99. अज़-ज़लज़ला100. अल-आदियात100. अल-आदियात101. अल-क़ारिया102. अत-तकासुर103. अल-अस्र104. अल-हुमज़ा105. अल-फ़ील106. क़ुरैश107. अल-माउं108. अल-कौसर109. अल-काफ़िरून110. अन-नस्र111. अल-मसद112. अल-इख़लास113. अल-फ़लक114. अन्नास
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ وَقُرْآنٍ مُبِينٍ1
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह किताब अर्थात स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं
رُبَمَا يَوَدُّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْ كَانُوا مُسْلِمِينَ2
ऐसे समय आएँगे जब इनकार करनेवाले कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता कि हम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते!
ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا وَيُلْهِهِمُ الْأَمَلُ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ3
छोड़ो उन्हें खाएँ और मज़े उड़ाएँ और (लम्बी) आशा उन्हें भुलावे में डाले रखे। उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा!
وَمَا أَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَعْلُومٌ4
हमने जिस बस्ती को भी विनष्ट किया है, उसके लिए अनिवार्यतः एक निश्चित फ़ैसला रहा है!
مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ5
किसी समुदाय के लोग न अपने निश्चित समय से आगे बढ़ सकते है और न वे पीछे रह सकते है
وَقَالُوا يَا أَيُّهَا الَّذِي نُزِّلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌ6
वे कहते है, "ऐ व्यक्ति, जिसपर अनुस्मरण अवतरित हुआ, तुम निश्चय ही दीवाने हो!
لَوْ مَا تَأْتِينَا بِالْمَلَائِكَةِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ7
यदि तुम सच्चे हो तो हमारे समक्ष फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते?"
مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُنْظَرِينَ8
फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है और उस समय लोगों को मुहलत नहीं मिलेगी
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ9
यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ10
तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है
وَمَا يَأْتِيهِمْ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ11
कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने उपहास न किया हो
كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ12
इसी तरह हम अपराधियों के दिलों में इसे उतारते है
لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ13
वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं
وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَابًا مِنَ السَّمَاءِ فَظَلُّوا فِيهِ يَعْرُجُونَ14
यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें,
لَقَالُوا إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَسْحُورُونَ15
फिर भी वे यही कहेंगे, "हमारी आँखें मदमाती हैं, बल्कि हम लोगों पर जादू कर दिया गया है!"
وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِرِينَ16
हमने आकाश में बुर्ज (तारा-समूह) बनाए और हमने उसे देखनेवालों के लिए सुसज्जित भी किया
وَحَفِظْنَاهَا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ رَجِيمٍ17
और हर फिटकारे हुए शैतान से उसे सुरक्षित रखा -
إِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُبِينٌ18
यह और बात है कि किसी ने चोरी-छिपे कुछ सुनगुन ले लिया तो एक प्रत्यक्ष अग्निशिखा ने भी झपटकर उसका पीछा किया -
وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْبَتْنَا فِيهَا مِنْ كُلِّ شَيْءٍ مَوْزُونٍ19
और हमने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ डाल दिए और उसमें हर चीज़ नपे-तुले अन्दाज़ में उगाई
وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ وَمَنْ لَسْتُمْ لَهُ بِرَازِقِينَ20
और उसमें तुम्हारे गुज़र-बसर के सामान निर्मित किए, और उनको भी जिनको रोज़ी देनेवाले तुम नहीं हो
وَإِنْ مِنْ شَيْءٍ إِلَّا عِنْدَنَا خَزَائِنُهُ وَمَا نُنَزِّلُهُ إِلَّا بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ21
कोई भी चीज़ तो ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक ज्ञात (निश्चिंत) मात्रा के साथ उतारते है
وَأَرْسَلْنَا الرِّيَاحَ لَوَاقِحَ فَأَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَسْقَيْنَاكُمُوهُ وَمَا أَنْتُمْ لَهُ بِخَازِنِينَ22
हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो
وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ23
हम ही जीवन और मृत्यु देते है और हम ही उत्तराधिकारी रह जाते है
وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنْكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ24
हम तुम्हारे पहले के लोगों को भी जानते है और बाद के आनेवालों को भी हम जानते है
وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ25
तुम्हारा रब ही है, जो उन्हें इकट्ठा करेगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ26
हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है,
وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ مِنْ نَارِ السَّمُومِ27
और उससे पहले हम जिन्नों को लू रूपी अग्नि से पैदा कर चुके थे
وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ28
याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करनेवाला हूँ
فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِنْ رُوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ29
तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना!"
فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ30
अतएव सब के सब फ़रिश्तो ने सजदा किया,
إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ أَنْ يَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ31
सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करनेवालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया
قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ32
कहा, "ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करनेवालों में शामिल नहीं हुआ?"
قَالَ لَمْ أَكُنْ لِأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ33
उसने कहा, "मैं ऐसा नहीं हूँ कि मैं उस मनुष्य को सजदा करूँ जिसको तू ने सड़े हुए गारे की खनखनाती हुए मिट्टी से बनाया।"
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ34
कहा, "अच्छा, तू निकल जा यहाँ से, क्योंकि तुझपर फिटकार है!
وَإِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ الدِّينِ35
निश्चय ही बदले के दिन तक तुझ पर धिक्कार है।"
قَالَ رَبِّ فَأَنْظِرْنِي إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ36
उसने कहा, "मेरे रब! फिर तू मुझे उस दिन तक के लिए मुहलत दे, जबकि सब उठाए जाएँगे।"
قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِينَ37
कहा, "अच्छा, तुझे मुहलत है,
إِلَىٰ يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ38
उस दिन तक के लिए जिसका समय ज्ञात एवं नियत है।"
قَالَ رَبِّ بِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ39
उसने कहा, "मेरे रब! इसलिए कि तूने मुझे सीधे मार्ग से विचलित कर दिया है, अतः मैं भी धरती में उनके लिए मनमोहकता पैदा करूँगा और उन सबको बहकाकर रहूँगा,
إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ40
सिवाय उनके जो तेरे चुने हुए बन्दे होंगे।"
قَالَ هَـٰذَا صِرَاطٌ عَلَيَّ مُسْتَقِيمٌ41
कहा, "मुझ तक पहुँचने का यही सीधा मार्ग है,
إِنَّ عِبَادِي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ إِلَّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْغَاوِينَ42
मेरे बन्दों पर तो तेरा कुछ ज़ोर न चलेगा, सिवाय उन बहके हुए लोगों को जो तेरे पीछे हो लें
وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ43
निश्चय ही जहन्नम ही का ऐसे समस्त लोगों से वादा है
لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَابٍ لِكُلِّ بَابٍ مِنْهُمْ جُزْءٌ مَقْسُومٌ44
उसके सात द्वार है। प्रत्येक द्वार के लिए एक ख़ास हिस्सा होगा।"
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ45
निस्संदेह डर रखनेवाले बाग़ों और स्रोतों में होंगे,
ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آمِنِينَ46
"प्रवेश करो इनमें निर्भयतापूर्वक सलामती के साथ!"
وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ47
उनके सीनों में जो मन-मुटाव होगा उसे हम दूर कर देंगे। वे भाई-भाई बनकर आमने-सामने तख़्तों पर होंगे
لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَجِينَ48
उन्हें वहाँ न तो कोई थकान और तकलीफ़ पहुँचेगी औऱ न वे वहाँ से कभी निकाले ही जाएँगे
نَبِّئْ عِبَادِي أَنِّي أَنَا الْغَفُورُ الرَّحِيمُ49
मेरे बन्दों को सूचित कर दो कि मैं अत्यन्त क्षमाशील, दयावान हूँ;
وَأَنَّ عَذَابِي هُوَ الْعَذَابُ الْأَلِيمُ50
और यह कि मेरी यातना भी अत्यन्त दुखदायिनी यातना है
وَنَبِّئْهُمْ عَنْ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ51
और उन्हें इबराहीम के अतिथियों का वृत्तान्त सुनाओ,
إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا قَالَ إِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ52
जब वे उसके यहाँ आए और उन्होंने सलाम किया तो उसने कहा, "हमें तो तुमसे डर लग रहा है।"
قَالُوا لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ53
वे बोले, "डरो नहीं, हम तुम्हें एक ज्ञानवान पुत्र की शुभ सूचना देते है।"
قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِي عَلَىٰ أَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ54
उसने कहा, "क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो, इस अवस्था में कि मेरा बुढापा आ गया है? तो अब मुझे किस बात की शुभ सूचना दे रहे हो?"
قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْقَانِطِينَ55
उन्होंने कहा, "हम तुम्हें सच्ची शुभ सूचना दे रहे हैं, तो तुम निराश न हो"
قَالَ وَمَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ56
उसने कहा, "अपने रब की दयालुता से पथभ्रष्टों के सिवा और कौन निराश होगा?"
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ57
उसने कहा, "ऐ दूतो, तुम किस अभियान पर आए हो?"
قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُجْرِمِينَ58
वे बोले, "हम तो एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है,
إِلَّا آلَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ59
सिवाय लूत के घरवालों के। उन सबको तो हम बचा लेंगे,
إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَا ۙ إِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِرِينَ60
सिवाय उसकी पत्नी के - हमने निश्चित कर दिया है, वह तो पीछे रह जानेवालों में रहेंगी।"
فَلَمَّا جَاءَ آلَ لُوطٍ الْمُرْسَلُونَ61
फिर जब ये दूत लूत के यहाँ पहुँचे,
قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ62
तो उसने कहा, "तुम तो अपरिचित लोग हो।"
قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا فِيهِ يَمْتَرُونَ63
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हम तो तुम्हारे पास वही चीज़ लेकर आए है, जिसके विषय में वे सन्देह कर रहे थे
وَأَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ64
और हम तुम्हारे पास यक़ीनी चीज़ लेकर आए है, और हम बिलकुल सच कह रहे है
فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَاتَّبِعْ أَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ65
अतएव अब तुम अपने घरवालों को लेकर रात्रि के किसी हिस्से में निकल जाओ, और स्वयं उन सबके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे। बस चले जाओ, जिधर का तुम्हे आदेश है।"
وَقَضَيْنَا إِلَيْهِ ذَٰلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَـٰؤُلَاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِحِينَ66
हमने उसे अपना यह फ़ैसला पहुँचा दिया कि प्रातः होते-होते उनकी जड़ कट चुकी होगी
وَجَاءَ أَهْلُ الْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ67
इतने में नगर के लोग ख़ुश-ख़ुश आ पहुँचे
قَالَ إِنَّ هَـٰؤُلَاءِ ضَيْفِي فَلَا تَفْضَحُونِ68
उसने कहा, "ये मेरे अतिथि है। मेरी फ़ज़ीहत मत करना,
وَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ69
अल्लाह का डर ऱखो, मुझे रुसवा न करो।"
قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ70
उन्होंने कहा, "क्या हमने तुम्हें दुनिया भर के लोगों का ज़िम्मा लेने से रोका नहीं था?"
قَالَ هَـٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِنْ كُنْتُمْ فَاعِلِينَ71
उसने कहा, "तुमको यदि कुछ करना है, तो ये मेरी (क़ौम की) बेटियाँ (विधितः विवाह के लिए) मौजूद है।"
لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ72
तुम्हारे जीवन की सौगन्ध, वे अपनी मस्ती में खोए हुए थे,
فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ73
अन्ततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया,
فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجِّيلٍ74
और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया, और उनपर कंकरीले पत्थर बरसाए
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّمِينَ75
निश्चय ही इसमें भापनेवालों के लिए निशानियाँ है
وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُقِيمٍ76
और वह (बस्ती) सार्वजनिक मार्ग पर है
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِلْمُؤْمِنِينَ77
निश्चय ही इसमें मोमिनों के लिए एक बड़ी निशानी है
وَإِنْ كَانَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ لَظَالِمِينَ78
और निश्चय ही ऐसा वाले भी अत्याचारी थे,
فَانْتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُبِينٍ79
फिर हमने उनसे भी बदला लिया, और ये दोनों (भू-भाग) खुले मार्ग पर स्थित है
وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ80
हिज्रवाले भी रसूलों को झुठला चुके है
وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ81
हमने तो उन्हें अपनी निशानियाँ प्रदान की थी, परन्तु वे उनकी उपेक्षा ही करते रहे
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ82
वे बड़ी बेफ़िक्री से पहाड़ो को काट-काटकर घर बनाते थे
فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ83
अन्ततः एक भयानक आवाज़ ने प्रातः होते- होते उन्हें आ लिया
فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ84
फिर जो कुछ वे कमाते रहे, वह उनके कुछ काम न आ सका
وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ ۗ وَإِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ ۖ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَمِيلَ85
हमने तो आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके मध्य है, सोद्देश्य पैदा किया है, और वह क़ियामत की घड़ी तो अनिवार्यतः आनेवाली है। अतः तुम भली प्रकार दरगुज़र (क्षमा) से काम लो
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَلِيمُ86
निश्चय ही तुम्हारा रब ही बड़ा पैदा करनेवाला, सब कुछ जाननेवाला है
وَلَقَدْ آتَيْنَاكَ سَبْعًا مِنَ الْمَثَانِي وَالْقُرْآنَ الْعَظِيمَ87
हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया-
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ88
जो कुछ सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दी है, तुम उसपर अपनी आँखें न पसारो और न उनपर दुखी हो, तुम तो अपनी भुजाएँ मोमिनों के लिए झुकाए रखो,
وَقُلْ إِنِّي أَنَا النَّذِيرُ الْمُبِينُ89
और कह दो, "मैं तो साफ़-साफ़ चेतावनी देनेवाला हूँ।"
كَمَا أَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِمِينَ90
जिस प्रकार हमने हिस्सा-बख़रा करनेवालों पर उतारा था,
الَّذِينَ جَعَلُوا الْقُرْآنَ عِضِينَ91
जिन्होंने (अपने) क़ुरआन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला
فَوَرَبِّكَ لَنَسْأَلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ92
अब तुम्हारे रब की क़सम! हम अवश्य ही उन सबसे उसके विषय में पूछेंगे
عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ93
जो कुछ वे करते रहे।
فَاصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ94
अतः तु्म्हें जिस चीज़ का आदेश हुआ है, उसे हाँक-पुकारकर बयान कर दो, और मुशरिको की ओर ध्यान न दो
إِنَّا كَفَيْنَاكَ الْمُسْتَهْزِئِينَ95
उपहास करनेवालों के लिए हम तुम्हारी ओर से काफ़ी है
الَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَـٰهًا آخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ96
जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूज्य-प्रभु ठहराते है, तो शीघ्र ही उन्हें मालूम हो जाएगा!
وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ97
हम जानते है कि वे जो कुछ कहते है, उससे तुम्हारा दिल तंग होता है
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُنْ مِنَ السَّاجِدِينَ98
तो तुम अपने रब का गुणगान करो और सजदा करनेवालों में सम्मिलित रहो
وَاعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ الْيَقِينُ99
और अपने रब की बन्दगी में लगे रहो, यहाँ तक कि जो यक़ीनी है, वह तुम्हारे सामने आ जाए