अल-हिज्र - कुरान पढ़ें

15अल-हिज्र
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓرٰ۠ تِلْكَ اٰيَاتُ الْكِتَابِ وَقُرْاٰنٍ مُب۪ينٍ1
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह किताब अर्थात स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं
رُبَمَا يَوَدُّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْ كَانُوا مُسْلِم۪ينَ2
ऐसे समय आएँगे जब इनकार करनेवाले कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता कि हम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते!
ذَرْهُمْ يَاْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا وَيُلْهِهِمُ الْاَمَلُ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ3
छोड़ो उन्हें खाएँ और मज़े उड़ाएँ और (लम्बी) आशा उन्हें भुलावे में डाले रखे। उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा!
وَمَٓا اَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ اِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَعْلُومٌ4
हमने जिस बस्ती को भी विनष्ट किया है, उसके लिए अनिवार्यतः एक निश्चित फ़ैसला रहा है!
مَا تَسْبِقُ مِنْ اُمَّةٍ اَجَلَهَا وَمَا يَسْتَاْخِرُونَ5
किसी समुदाय के लोग न अपने निश्चि‍त समय से आगे बढ़ सकते है और न वे पीछे रह सकते है
وَقَالُوا يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ي نُزِّلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ اِنَّكَ لَمَجْنُونٌۜ6
वे कहते है, "ऐ व्यक्ति, जिसपर अनुस्मरण अवतरित हुआ, तुम निश्चय ही दीवाने हो!
لَوْ مَا تَاْت۪ينَا بِالْمَلٰٓئِكَةِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ7
यदि तुम सच्चे हो तो हमारे समक्ष फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते?"
مَا نُنَزِّلُ الْمَلٰٓئِكَةَ اِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُٓوا اِذًا مُنْظَر۪ينَ8
फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है और उस समय लोगों को मुहलत नहीं मिलेगी
اِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَاِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ9
यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ ف۪ي شِيَعِ الْاَوَّل۪ينَ10
तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है
وَمَا يَاْت۪يهِمْ مِنْ رَسُولٍ اِلَّا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ11
कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने उपहास न किया हो
كَذٰلِكَ نَسْلُكُهُ ف۪ي قُلُوبِ الْمُجْرِم۪ينَۙ12
इसी तरह हम अपराधियों के दिलों में इसे उतारते है
لَا يُؤْمِنُونَ بِه۪ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْاَوَّل۪ينَ13
वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं
وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَابًا مِنَ السَّمَٓاءِ فَظَلُّوا ف۪يهِ يَعْرُجُونَۙ14
यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें,
لَقَالُٓوا اِنَّمَا سُكِّرَتْ اَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَسْحُورُونَ۟15
फिर भी वे यही कहेंगे, "हमारी आँखें मदमाती हैं, बल्कि हम लोगों पर जादू कर दिया गया है!"
وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَٓاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِر۪ينَۙ16
हमने आकाश में बुर्ज (तारा-समूह) बनाए और हमने उसे देखनेवालों के लिए सुसज्जित भी किया
وَحَفِظْنَاهَا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ رَج۪يمٍۙ17
और हर फिटकारे हुए शैतान से उसे सुरक्षित रखा -
اِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَاَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُب۪ينٌ18
यह और बात है कि किसी ने चोरी-छिपे कुछ सुनगुन ले लिया तो एक प्रत्यक्ष अग्निशिखा ने भी झपटकर उसका पीछा किया -
وَالْاَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَاَلْقَيْنَا ف۪يهَا رَوَاسِيَ وَاَنْبَتْنَا ف۪يهَا مِنْ كُلِّ شَيْءٍ مَوْزُونٍ19
और हमने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ डाल दिए और उसमें हर चीज़ नपे-तुले अन्दाज़ में उगाई
وَجَعَلْنَا لَكُمْ ف۪يهَا مَعَايِشَ وَمَنْ لَسْتُمْ لَهُ بِرَازِق۪ينَ20
और उसमें तुम्हारे गुज़र-बसर के सामान निर्मित किए, और उनको भी जिनको रोज़ी देनेवाले तुम नहीं हो
وَاِنْ مِنْ شَيْءٍ اِلَّا عِنْدَنَا خَزَٓائِنُهُۘ وَمَا نُنَزِّلُهُٓ اِلَّا بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ21
कोई भी चीज़ तो ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक ज्ञात (निश्चिंत) मात्रा के साथ उतारते है
وَاَرْسَلْنَا الرِّيَاحَ لَوَاقِحَ فَاَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَسْقَيْنَاكُمُوهُۚ وَمَٓا اَنْتُمْ لَهُ بِخَازِن۪ينَ22
हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो
وَاِنَّا لَنَحْنُ نُحْي۪ وَنُم۪يتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ23
हम ही जीवन और मृत्यु देते है और हम ही उत्तराधिकारी रह जाते है
وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِم۪ينَ مِنْكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَاْخِر۪ينَ24
हम तुम्हारे पहले के लोगों को भी जानते है और बाद के आनेवालों को भी हम जानते है
وَاِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْۜ اِنَّهُ حَك۪يمٌ عَل۪يمٌ۟25
तुम्हारा रब ही है, जो उन्हें इकट्ठा करेगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍۚ26
हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है,
وَالْجَٓانَّ خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ مِنْ نَارِ السَّمُومِ27
और उससे पहले हम जिन्नों को लू रूपी अग्नि से पैदा कर चुके थे
وَاِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلٰٓئِكَةِ اِنّ۪ي خَالِقٌ بَشَرًا مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ28
याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करनेवाला हूँ
فَاِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ ف۪يهِ مِنْ رُوح۪ي فَقَعُوا لَهُ سَاجِد۪ينَ29
तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना!"
فَسَجَدَ الْمَلٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ اَجْمَعُونَۙ30
अतएव सब के सब फ़रिश्तो ने सजदा किया,
اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ اَبٰٓى اَنْ يَكُونَ مَعَ السَّاجِد۪ينَ31
सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करनेवालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया
قَالَ يَٓا اِبْل۪يسُ مَا لَكَ اَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِد۪ينَ32
कहा, "ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करनेवालों में शामिल नहीं हुआ?"
قَالَ لَمْ اَكُنْ لِاَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ33
उसने कहा, "मैं ऐसा नहीं हूँ कि मैं उस मनुष्य को सजदा करूँ जिसको तू ने सड़े हुए गारे की खनखनाती हुए मिट्टी से बनाया।"
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَاِنَّكَ رَج۪يمٌ34
कहा, "अच्छा, तू निकल जा यहाँ से, क्योंकि तुझपर फिटकार है!
وَاِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ اِلٰى يَوْمِ الدّ۪ينِ35
निश्चय ही बदले के दिन तक तुझ पर धिक्कार है।"
قَالَ رَبِّ فَاَنْظِرْن۪ٓي اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُونَ36
उसने कहा, "मेरे रब! फिर तू मुझे उस दिन तक के लिए मुहलत दे, जबकि सब उठाए जाएँगे।"
قَالَ فَاِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَر۪ينَۙ37
कहा, "अच्छा, तुझे मुहलत है,
اِلٰى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ38
उस दिन तक के लिए जिसका समय ज्ञात एवं नियत है।"
قَالَ رَبِّ بِمَٓا اَغْوَيْتَن۪ي لَاُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْاَرْضِ وَلَاُغْوِيَنَّهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ39
उसने कहा, "मेरे रब! इसलिए कि तूने मुझे सीधे मार्ग से विचलित कर दिया है, अतः मैं भी धरती में उनके लिए मनमोहकता पैदा करूँगा और उन सबको बहकाकर रहूँगा,
اِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَص۪ينَ40
सिवाय उनके जो तेरे चुने हुए बन्दे होंगे।"
قَالَ هٰذَا صِرَاطٌ عَلَيَّ مُسْتَق۪يمٌ41
कहा, "मुझ तक पहुँचने का यही सीधा मार्ग है,
اِنَّ عِبَاد۪ي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ اِلَّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْغَاو۪ينَ42
मेरे बन्दों पर तो तेरा कुछ ज़ोर न चलेगा, सिवाय उन बहके हुए लोगों को जो तेरे पीछे हो लें
وَاِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ43
निश्चय ही जहन्नम ही का ऐसे समस्त लोगों से वादा है
لَهَا سَبْعَةُ اَبْوَابٍۜ لِكُلِّ بَابٍ مِنْهُمْ جُزْءٌ مَقْسُومٌ۟44
उसके सात द्वार है। प्रत्येक द्वार के लिए एक ख़ास हिस्सा होगा।"
اِنَّ الْمُتَّق۪ينَ ف۪ي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍۜ45
निस्संदेह डर रखनेवाले बाग़ों और स्रोतों में होंगे,
اُدْخُلُوهَا بِسَلَامٍ اٰمِن۪ينَ46
"प्रवेश करो इनमें निर्भयतापूर्वक सलामती के साथ!"
وَنَزَعْنَا مَا ف۪ي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ اِخْوَانًا عَلٰى سُرُرٍ مُتَقَابِل۪ينَ47
उनके सीनों में जो मन-मुटाव होगा उसे हम दूर कर देंगे। वे भाई-भाई बनकर आमने-सामने तख़्तों पर होंगे
لَا يَمَسُّهُمْ ف۪يهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَج۪ينَ48
उन्हें वहाँ न तो कोई थकान और तकलीफ़ पहुँचेगी औऱ न वे वहाँ से कभी निकाले ही जाएँगे
نَبِّئْ عِبَاد۪ٓي اَنّ۪ٓي اَنَا۬ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُۙ49
मेरे बन्दों को सूचित कर दो कि मैं अत्यन्त क्षमाशील, दयावान हूँ;
وَاَنَّ عَذَاب۪ي هُوَ الْعَذَابُ الْاَل۪يمُ50
और यह कि मेरी यातना भी अत्यन्त दुखदायिनी यातना है
وَنَبِّئْهُمْ عَنْ ضَيْفِ اِبْرٰه۪يمَۢ51
और उन्हें इबराहीम के अतिथियों का वृत्तान्त सुनाओ,
اِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًاۜ قَالَ اِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ52
जब वे उसके यहाँ आए और उन्होंने सलाम किया तो उसने कहा, "हमें तो तुमसे डर लग रहा है।"
قَالُوا لَا تَوْجَلْ اِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَل۪يمٍ53
वे बोले, "डरो नहीं, हम तुम्हें एक ज्ञानवान पुत्र की शुभ सूचना देते है।"
قَالَ اَبَشَّرْتُمُون۪ي عَلٰٓى اَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ54
उसने कहा, "क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो, इस अवस्था में कि मेरा बुढापा आ गया है? तो अब मुझे किस बात की शुभ सूचना दे रहे हो?"
قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْقَانِط۪ينَ55
उन्होंने कहा, "हम तुम्हें सच्ची शुभ सूचना दे रहे हैं, तो तुम निराश न हो"
قَالَ وَمَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّه۪ٓ اِلَّا الضَّٓالُّونَ56
उसने कहा, "अपने रब की दयालुता से पथभ्रष्टों के सिवा और कौन निराश होगा?"
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ اَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ57
उसने कहा, "ऐ दूतो, तुम किस अभियान पर आए हो?"
قَالُٓوا اِنَّٓا اُرْسِلْنَٓا اِلٰى قَوْمٍ مُجْرِم۪ينَۙ58
वे बोले, "हम तो एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है,
اِلَّٓا اٰلَ لُوطٍۜ اِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ59
सिवाय लूत के घरवालों के। उन सबको तो हम बचा लेंगे,
اِلَّا امْرَاَتَهُ قَدَّرْنَٓاۙ اِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِر۪ينَ۟60
सिवाय उसकी पत्नी के - हमने निश्चित कर दिया है, वह तो पीछे रह जानेवालों में रहेंगी।"
فَلَمَّا جَٓاءَ اٰلَ لُوطٍۨ الْمُرْسَلُونَۙ61
फिर जब ये दूत लूत के यहाँ पहुँचे,
قَالَ اِنَّكُمْ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ62
तो उसने कहा, "तुम तो अपरिचित लोग हो।"
قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا ف۪يهِ يَمْتَرُونَ63
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हम तो तुम्हारे पास वही चीज़ लेकर आए है, जिसके विषय में वे सन्देह कर रहे थे
وَاَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَاِنَّا لَصَادِقُونَ64
और हम तुम्हारे पास यक़ीनी चीज़ लेकर आए है, और हम बिलकुल सच कह रहे है
فَاَسْرِ بِاَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ الَّيْلِ وَاتَّبِعْ اَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ اَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ65
अतएव अब तुम अपने घरवालों को लेकर रात्रि के किसी हिस्से में निकल जाओ, और स्वयं उन सबके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे। बस चले जाओ, जिधर का तुम्हे आदेश है।"
وَقَضَيْنَٓا اِلَيْهِ ذٰلِكَ الْاَمْرَ اَنَّ دَابِرَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِح۪ينَ66
हमने उसे अपना यह फ़ैसला पहुँचा दिया कि प्रातः होते-होते उनकी जड़ कट चुकी होगी
وَجَٓاءَ اَهْلُ الْمَد۪ينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ67
इतने में नगर के लोग ख़ुश-ख़ुश आ पहुँचे
قَالَ اِنَّ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ ضَيْف۪ي فَلَا تَفْضَحُونِۙ68
उसने कहा, "ये मेरे अतिथि है। मेरी फ़ज़ीहत मत करना,
وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَلَا تُخْزُونِ69
अल्लाह का डर ऱखो, मुझे रुसवा न करो।"
قَالُٓوا اَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَم۪ينَ70
उन्होंने कहा, "क्या हमने तुम्हें दुनिया भर के लोगों का ज़िम्मा लेने से रोका नहीं था?"
قَالَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ بَنَات۪ٓي اِنْ كُنْتُمْ فَاعِل۪ينَۜ71
उसने कहा, "तुमको यदि कुछ करना है, तो ये मेरी (क़ौम की) बेटियाँ (विधितः विवाह के लिए) मौजूद है।"
لَعَمْرُكَ اِنَّهُمْ لَف۪ي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ72
तुम्हारे जीवन की सौगन्ध, वे अपनी मस्ती में खोए हुए थे,
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِق۪ينَۙ73
अन्ततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया,
فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجّ۪يلٍۜ74
और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया, और उनपर कंकरीले पत्थर बरसाए
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّم۪ينَ75
निश्चय ही इसमें भापनेवालों के लिए निशानियाँ है
وَاِنَّهَا لَبِسَب۪يلٍ مُق۪يمٍ76
और वह (बस्ती) सार्वजनिक मार्ग पर है
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِلْمُؤْمِن۪ينَۜ77
निश्चय ही इसमें मोमिनों के लिए एक बड़ी निशानी है
وَاِنْ كَانَ اَصْحَابُ الْاَيْكَةِ لَظَالِم۪ينَۙ78
और निश्चय ही ऐसा वाले भी अत्याचारी थे,
فَانْتَقَمْنَا مِنْهُمْۢ وَاِنَّهُمَا لَبِاِمَامٍ مُب۪ينٍۜ۟79
फिर हमने उनसे भी बदला लिया, और ये दोनों (भू-भाग) खुले मार्ग पर स्थित है
وَلَقَدْ كَذَّبَ اَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَل۪ينَۙ80
हिज्रवाले भी रसूलों को झुठला चुके है
وَاٰتَيْنَاهُمْ اٰيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِض۪ينَۙ81
हमने तो उन्हें अपनी निशानियाँ प्रदान की थी, परन्तु वे उनकी उपेक्षा ही करते रहे
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا اٰمِن۪ينَ82
वे बड़ी बेफ़िक्री से पहाड़ो को काट-काटकर घर बनाते थे
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِح۪ينَۙ83
अन्ततः एक भयानक आवाज़ ने प्रातः होते- होते उन्हें आ लिया
فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَۜ84
फिर जो कुछ वे कमाते रहे, वह उनके कुछ काम न आ सका
وَمَا خَلَقْنَا السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَٓا اِلَّا بِالْحَقِّۜ وَاِنَّ السَّاعَةَ لَاٰتِيَةٌ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَم۪يلَ85
हमने तो आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके मध्य है, सोद्देश्य पैदा किया है, और वह क़ियामत की घड़ी तो अनिवार्यतः आनेवाली है। अतः तुम भली प्रकार दरगुज़र (क्षमा) से काम लो
اِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَل۪يمُ86
निश्चय ही तुम्हारा रब ही बड़ा पैदा करनेवाला, सब कुछ जाननेवाला है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَاكَ سَبْعًا مِنَ الْمَثَان۪ي وَالْقُرْاٰنَ الْعَظ۪يمَ87
हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया-
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ اِلٰى مَا مَتَّعْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِن۪ينَ88
जो कुछ सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दी है, तुम उसपर अपनी आँखें न पसारो और न उनपर दुखी हो, तुम तो अपनी भुजाएँ मोमिनों के लिए झुकाए रखो,
وَقُلْ اِنّ۪ٓي اَنَا۬ النَّذ۪يرُ الْمُب۪ينُۚ89
और कह दो, "मैं तो साफ़-साफ़ चेतावनी देनेवाला हूँ।"
كَمَٓا اَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِم۪ينَۙ90
जिस प्रकार हमने हिस्सा-बख़रा करनेवालों पर उतारा था,
اَلَّذ۪ينَ جَعَلُوا الْقُرْاٰنَ عِض۪ينَ91
जिन्होंने (अपने) क़ुरआन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला
فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ92
अब तुम्हारे रब की क़सम! हम अवश्य ही उन सबसे उसके विषय में पूछेंगे
عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ93
जो कुछ वे करते रहे।
فَاصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَاَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِك۪ينَ94
अतः तु्म्हें जिस चीज़ का आदेश हुआ है, उसे हाँक-पुकारकर बयान कर दो, और मुशरिको की ओर ध्यान न दो
اِنَّا كَفَيْنَاكَ الْمُسْتَهْزِء۪ينَۙ95
उपहास करनेवालों के लिए हम तुम्हारी ओर से काफ़ी है
اَلَّذ۪ينَ يَجْعَلُونَ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ96
जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूज्य-प्रभु ठहराते है, तो शीघ्र ही उन्हें मालूम हो जाएगा!
وَلَقَدْ نَعْلَمُ اَنَّكَ يَض۪يقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَۙ97
हम जानते है कि वे जो कुछ कहते है, उससे तुम्हारा दिल तंग होता है
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُنْ مِنَ السَّاجِد۪ينَۙ98
तो तुम अपने रब का गुणगान करो और सजदा करनेवालों में सम्मिलित रहो
وَاعْبُدْ رَبَّكَ حَتّٰى يَاْتِيَكَ الْيَق۪ينُ99
और अपने रब की बन्दगी में लगे रहो, यहाँ तक कि जो यक़ीनी है, वह तुम्हारे सामने आ जाए