अल-कहफ - कुरान पढ़ें

18अल-कहफ
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ عَلٰى عَبْدِهِ الْكِتَابَ وَلَمْ يَجْعَلْ لَهُ عِوَجًا ۜ۔1
प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने अपने बन्दे पर यह किताब अवतरित की और उसमें (अर्थात उस बन्दे में) कोई टेढ़ नहीं रखी,
قَيِّمًا لِيُنْذِرَ بَاْسًا شَد۪يدًا مِنْ لَدُنْهُ وَيُبَشِّرَ الْمُؤْمِن۪ينَ الَّذ۪ينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ اَنَّ لَهُمْ اَجْرًا حَسَنًاۙ2
ठीक और दूरुस्त, ताकि एक कठोर आपदा से सावधान कर दे जो उसकी और से आ पड़ेगी। और मोमिनों को, जो अच्छे कर्म करते है, शुभ सूचना दे दे कि उनके लिए अच्छा बदला है;
مَاكِث۪ينَ ف۪يهِ اَبَدًاۙ3
जिसमें वे सदैव रहेंगे
وَيُنْذِرَ الَّذ۪ينَ قَالُوا اتَّخَذَ اللّٰهُ وَلَدًاۗ4
और उनको सावधान कर दे, जो कहते है, "अल्लाह सन्तानवाला है।"
مَا لَهُمْ بِه۪ مِنْ عِلْمٍ وَلَا لِاٰبَٓائِهِمْۜ كَبُرَتْ كَلِمَةً تَخْرُجُ مِنْ اَفْوَاهِهِمْۜ اِنْ يَقُولُونَ اِلَّا كَذِبًا5
इसका न उन्हें कोई ज्ञान है और न उनके बाप-दादा ही को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है। वे केवल झूठ बोलते है
فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ عَلٰٓى اٰثَارِهِمْ اِنْ لَمْ يُؤْمِنُوا بِهٰذَا الْحَد۪يثِ اَسَفًا6
अच्छा, शायद उनके पीछे, यदि उन्होंने यह बात न मानी तो तुम अफ़सोस के मारे अपने प्राण ही खो दोगे!
اِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْاَرْضِ ز۪ينَةً لَهَا لِنَبْلُوَهُمْ اَيُّهُمْ اَحْسَنُ عَمَلًا7
धरती पर जो कुछ है उसे तो हमने उसकी शोभा बनाई है, ताकि हम उनकी परीक्षा लें कि उनमें कर्म की दृष्टि से कौन उत्तम है
وَاِنَّا لَجَاعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَع۪يدًا جُرُزًاۜ8
और जो कुछ उसपर है उसे तो हम एक चटियल मैदान बना देनेवाले है
اَمْ حَسِبْتَ اَنَّ اَصْحَابَ الْكَهْفِ وَالرَّق۪يمِ كَانُوا مِنْ اٰيَاتِنَا عَجَبًا9
क्या तुम समझते हो कि गुफा और रक़ीमवाले हमारी अद्भु त निशानियों में से थे?
اِذْ اَوَى الْفِتْيَةُ اِلَى الْكَهْفِ فَقَالُوا رَبَّنَٓا اٰتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ اَمْرِنَا رَشَدًا10
जब उन नवयुवकों ने गुफ़ा में जाकर शरण ली तो कहा, "हमारे रब! हमें अपने यहाँ से दयालुता प्रदान कर और हमारे लिए हमारे अपने मामले को ठीक कर दे।"
فَضَرَبْنَا عَلٰٓى اٰذَانِهِمْ فِي الْكَهْفِ سِن۪ينَ عَدَدًاۙ11
फिर हमने उस गुफा में कई वर्षो के लिए उनके कानों पर परदा डाल दिया
ثُمَّ بَعَثْنَاهُمْ لِنَعْلَمَ اَيُّ الْحِزْبَيْنِ اَحْصٰى لِمَا لَبِثُٓوا اَمَدًا۟12
फिर हमने उन्हें भेजा, ताकि मालूम करें कि दोनों गिरोहों में से किसने याद रखा है कि कितनी अवधि तक वे रहे
نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَاَهُمْ بِالْحَقِّۜ اِنَّهُمْ فِتْيَةٌ اٰمَنُوا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَاهُمْ هُدًىۗ13
हम तुन्हें ठीक-ठीक उनका वृत्तान्त सुनाते है। वे कुछ नवयुवक थे जो अपने रब पर ईमान लाए थे, और हमने उन्हें मार्गदर्शन में बढ़ोत्तरी प्रदान की
وَرَبَطْنَا عَلٰى قُلُوبِهِمْ اِذْ قَامُوا فَقَالُوا رَبُّنَا رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ لَنْ نَدْعُوَ۬ا مِنْ دُونِه۪ٓ اِلٰهًا لَقَدْ قُلْنَٓا اِذًا شَطَطًا14
और हमने उनके दिलों को सुदृढ़ कर दिया। जब वे उठे तो उन्होंने कहा, "हमारा रब तो वही है जो आकाशों और धरती का रब है। हम उससे इतर किसी अन्य पूज्य को कदापि न पुकारेंगे। यदि हमने ऐसा किया तब तो हमारी बात हक़ से बहुत हटी हुई होगी
هٰٓؤُ۬لَٓاءِ قَوْمُنَا اتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اٰلِهَةًۜ لَوْلَا يَاْتُونَ عَلَيْهِمْ بِسُلْطَانٍ بَيِّنٍۜ فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًاۜ15
ये हमारी क़ौम के लोग है, जिन्होंने उससे इतर कुछ अन्य पूज्य-प्रभु बना लिए है। आख़िर ये उनके हक़ में कोई स्पष्ट, प्रमाण क्यों नहीं लाते! भला उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो झूठ घड़कर अल्लाह पर थोपे?
وَاِذِ اعْتَزَلْتُمُوهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ اِلَّا اللّٰهَ فَاْوُ۫ٓا اِلَى الْكَهْفِ يَنْشُرْ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِنْ رَحْمَتِه۪ وَيُهَيِّئْ لَكُمْ مِنْ اَمْرِكُمْ مِرْفَقًا16
और जबकि इनसे तुम अलग हो गए हो और उनसे भी जिनको अल्लाह के सिवा ये पूजते है, तो गुफा में चलकर शरण लो। तुम्हारा रब तुम्हारे लिए अपनी दयालुता का दामन फैला देगा और तुम्हारे लिए तुम्हारे अपने काम से सम्बन्ध में सुगमता का उपकरण उपलब्ध कराएगा।"
وَتَرَى الشَّمْسَ اِذَا طَلَعَتْ تَزَاوَرُ عَنْ كَهْفِهِمْ ذَاتَ الْيَم۪ينِ وَاِذَا غَرَبَتْ تَقْرِضُهُمْ ذَاتَ الشِّمَالِ وَهُمْ ف۪ي فَجْوَةٍ مِنْهُۜ ذٰلِكَ مِنْ اٰيَاتِ اللّٰهِۜ مَنْ يَهْدِ اللّٰهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِۚ وَمَنْ يُضْلِلْ فَلَنْ تَجِدَ لَهُ وَلِيًّا مُرْشِدًا۟17
और तुम सूर्य को उसके उदित होते समय देखते तो दिखाई देता कि वह उनकी गुफा से दाहिनी ओर को बचकर निकल जाता है और जब अस्त होता है तो उनकी बाई ओर से कतराकर निकल जाता है। और वे है कि उस (गुफा) के एक विस्तृत स्थान में हैं। यह अल्लाह की निशानियों में से है। जिसे अल्लाह मार्ग दिखाए, वही मार्ग पानेवाला है और जिसे वह भटकता छोड़ दे उसका तुम कोई सहायक मार्गदर्शक कदापि न पाओगे
وَتَحْسَبُهُمْ اَيْقَاظًا وَهُمْ رُقُودٌۗ وَنُقَلِّبُهُمْ ذَاتَ الْيَم۪ينِ وَذَاتَ الشِّمَالِۗ وَكَلْبُهُمْ بَاسِطٌ ذِرَاعَيْهِ بِالْوَص۪يدِۜ لَوِ اطَّلَعْتَ عَلَيْهِمْ لَوَلَّيْتَ مِنْهُمْ فِرَارًا وَلَمُلِئْتَ مِنْهُمْ رُعْبًا18
और तुम समझते कि वे जाग रहे है, हालाँकि वे सोए हुए होते। हम उन्हें दाएँ और बाएँ फेरते और उनका कुत्ता ड्योढ़ी पर अपनी दोनों भुजाएँ फैलाए हुए होता। यदि तुम उन्हें कहीं झाँककर देखते तो उनके पास से उलटे पाँव भाग खड़े होते और तुममें उसका भय समा जाता
وَكَذٰلِكَ بَعَثْنَاهُمْ لِيَتَسَٓاءَلُوا بَيْنَهُمْۜ قَالَ قَٓائِلٌ مِنْهُمْ كَمْ لَبِثْتُمْۜ قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا اَوْ بَعْضَ يَوْمٍۜ قَالُوا رَبُّكُمْ اَعْلَمُ بِمَا لَبِثْتُمْ فَابْعَثُٓوا اَحَدَكُمْ بِوَرِقِكُمْ هٰذِه۪ٓ اِلَى الْمَد۪ينَةِ فَلْيَنْظُرْ اَيُّهَٓا اَزْكٰى طَعَامًا فَلْيَاْتِكُمْ بِرِزْقٍ مِنْهُ وَلْيَتَلَطَّفْ وَلَا يُشْعِرَنَّ بِكُمْ اَحَدًا19
और इसी तरह हमने उन्हें उठा खड़ा किया कि वे आपस में पूछताछ करें। उनमें एक कहनेवाले ने कहा, "तुम कितना ठहरे रहे?" वे बोले, "हम यही कोई एक दिन या एक दिन से भी कम ठहरें होंगे।" उन्होंने कहा, "जितना तुम यहाँ ठहरे हो उसे तुम्हारा रब ही भली-भाँति जानता है। अब अपने में से किसी को यह चाँदी का सिक्का देकर नगर की ओर भेजो। फिर वह देख ले कि उसमें सबसे अच्छा खाना किस जगह मिलता है। तो उसमें से वह तुम्हारे लिए कुछ खाने को ले आए और चाहिए की वह नरमी और होशियारी से काम ले और किसी को तुम्हारी ख़बर न होने दे
اِنَّهُمْ اِنْ يَظْهَرُوا عَلَيْكُمْ يَرْجُمُوكُمْ اَوْ يُع۪يدُوكُمْ ف۪ي مِلَّتِهِمْ وَلَنْ تُفْلِحُٓوا اِذًا اَبَدًا20
यदि वे कहीं तुम्हारी ख़बर पा जाएँगे तो पथराव करके तुम्हें मार डालेंगे या तुम्हें अपने पंथ में लौटा ले जाएँगे और तब तो तुम कभी भी सफल न पो सकोगे।"
وَكَذٰلِكَ اَعْثَرْنَا عَلَيْهِمْ لِيَعْلَمُٓوا اَنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَاَنَّ السَّاعَةَ لَا رَيْبَ ف۪يهَاۚ اِذْ يَتَنَازَعُونَ بَيْنَهُمْ اَمْرَهُمْ فَقَالُوا ابْنُوا عَلَيْهِمْ بُنْيَانًاۜ رَبُّهُمْ اَعْلَمُ بِهِمْۜ قَالَ الَّذ۪ينَ غَلَبُوا عَلٰٓى اَمْرِهِمْ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيْهِمْ مَسْجِدًا21
इस तरह हमने लोगों को उनकी सूचना दे दी, ताकि वे जान लें कि अल्लाह का वादा सच्चा है और यह कि क़ियामत की घड़ी में कोई सन्देह नहीं है। वह समय भी उल्लेखनीय है जब वे आपस में उनके मामले में छीन-झपट कर रहे थे। फिर उन्होंने कहा, "उनपर एक भवन बना दे। उनका रब उन्हें भली-भाँति जानता है।" और जो लोग उनके मामले में प्रभावी रहे उन्होंने कहा, "हम तो उनपर अवश्य एक उपासना गृह बनाएँगे।"
سَيَقُولُونَ ثَلٰثَةٌ رَابِعُهُمْ كَلْبُهُمْۚ وَيَقُولُونَ خَمْسَةٌ سَادِسُهُمْ كَلْبُهُمْ رَجْمًا بِالْغَيْبِۚ وَيَقُولُونَ سَبْعَةٌ وَثَامِنُهُمْ كَلْبُهُمْۜ قُلْ رَبّ۪ٓي اَعْلَمُ بِعِدَّتِهِمْ مَا يَعْلَمُهُمْ اِلَّا قَل۪يلٌ۠ فَلَا تُمَارِ ف۪يهِمْ اِلَّا مِرَٓاءً ظَاهِرًۖا وَلَا تَسْتَفْتِ ف۪يهِمْ مِنْهُمْ اَحَدًا۟22
अब वे कहेंगे, "वे तीन थे और उनमें चौथा कुत्ता था।" और वे यह भी कहेंगे, "वे पाँच थे और उनमें छठा उनका कुत्ता था।" यह बिना निशाना देखे पत्थर चलाना है। और वे यह भी कहेंगे, "वे सात थे और उनमें आठवाँ उनका कुत्ता था।" कह दो, "मेरा रब उनकी संख्या को भली-भाँति जानता है।" उनको तो थोड़े ही जानते है। तुम ज़ाहिरी बात के सिवा उनके सम्बन्ध में न झगड़ो और न उनमें से किसी से उनके विषय में कुछ पूछो
وَلَا تَقُولَنَّ لِشَا۬يْءٍ اِنّ۪ي فَاعِلٌ ذٰلِكَ غَدًاۙ23
और न किसी चीज़ के विषय में कभी यह कहो, "मैं कल इसे कर दूँगा।"
اِلَّٓا اَنْ يَشَٓاءَ اللّٰهُۘ وَاذْكُرْ رَبَّكَ اِذَا نَس۪يتَ وَقُلْ عَسٰٓى اَنْ يَهْدِيَنِ رَبّ۪ي لِاَقْرَبَ مِنْ هٰذَا رَشَدًا24
बल्कि अल्लाह की इच्छा ही लागू होती है। और जब तुम भूल जाओ तो अपने रब को याद कर लो और कहो, "आशा है कि मेरा रब इससे भी क़रीब सही बात ही ओर मार्गदर्शन कर दे।"
وَلَبِثُوا ف۪ي كَهْفِهِمْ ثَلٰثَ مِائَةٍ سِن۪ينَ وَازْدَادُوا تِسْعًا25
और वे अपनी गुफा में तीन सौ वर्ष रहे और नौ वर्ष उससे अधिक
قُلِ اللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا لَبِثُواۚ لَهُ غَيْبُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ اَبْصِرْ بِه۪ وَاَسْمِعْۜ مَا لَهُمْ مِنْ دُونِه۪ مِنْ وَلِيٍّۘ وَلَا يُشْرِكُ ف۪ي حُكْمِه۪ٓ اَحَدًا26
कह दो, "अल्लाह भली-भाँति जानता है जितना वे ठहरे।" आकाशों और धरती की छिपी बात का सम्बन्ध उसी से है। वह क्या ही देखनेवाला और सुननेवाला है! उससे इतर न तो उनका कोई संरक्षक है और न वह अपने प्रभुत्व और सत्ता में किसी को साझीदार बनाता है
وَاتْلُ مَٓا اُو۫حِيَ اِلَيْكَ مِنْ كِتَابِ رَبِّكَۚ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِه۪ وَلَنْ تَجِدَ مِنْ دُونِه۪ مُلْتَحَدًا27
अपने रब की क़िताब, जो कुछ तुम्हारी ओर प्रकाशना (वह्यस) हुई, पढ़ो। कोई नहीं जो उनके बोलो को बदलनेवाला हो और न तुम उससे हटकर क शरण लेने की जगह पाओगे
وَاصْبِرْ نَفْسَكَ مَعَ الَّذ۪ينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدٰوةِ وَالْعَشِيِّ يُر۪يدُونَ وَجْهَهُ وَلَا تَعْدُ عَيْنَاكَ عَنْهُمْۚ تُر۪يدُ ز۪ينَةَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَلَا تُطِعْ مَنْ اَغْفَلْنَا قَلْبَهُ عَنْ ذِكْرِنَا وَاتَّبَعَ هَوٰيهُ وَكَانَ اَمْرُهُ فُرُطًا28
अपने आपको उन लोगों के साथ थाम रखो, जो प्रातःकाल और सायंकाल अपने रब को उसकी प्रसन्नता चाहते हुए पुकारते है और सांसारिक जीवन की शोभा की चाह में तुम्हारी आँखें उनसे न फिरें। और ऐसे व्यक्ति की बात न मानना जिसके दिल को हमने अपनी याद से ग़ाफ़िल पाया है और वह अपनी इच्छा और वासना के पीछे लगा हुआ है और उसका मामला हद से आगे बढ़ गया है
وَقُلِ الْحَقُّ مِنْ رَبِّكُمْ فَمَنْ شَٓاءَ فَلْيُؤْمِنْ وَمَنْ شَٓاءَ فَلْيَكْفُرْۙ اِنَّٓا اَعْتَدْنَا لِلظَّالِم۪ينَ نَارًاۙ اَحَاطَ بِهِمْ سُرَادِقُهَاۜ وَاِنْ يَسْتَغ۪يثُوا يُغَاثُوا بِمَٓاءٍ كَالْمُهْلِ يَشْوِي الْوُجُوهَۜ بِئْسَ الشَّرَابُۜ وَسَٓاءَتْ مُرْتَفَقًا29
कह दो, "वह सत्य है तुम्हारे रब की ओर से। तो अब जो कोई चाहे माने और जो चाहे इनकार कर दे।" हमने तो अत्याचारियों के लिए आग तैयार कर रखी है, जिसकी क़नातों ने उन्हें घेर लिया है। यदि वे फ़रियाद करेंगे तो फ़रियाद के प्रत्युत्तर में उन्हें ऐसा पानी मिलेगा जो तेल की तलछट जैसा होगा; वह उनके मुँह भून डालेगा। बहुत ही बुरा है वह पेय और बहुत ही बुरा है वह विश्रामस्थल!
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ اِنَّا لَا نُض۪يعُ اَجْرَ مَنْ اَحْسَنَ عَمَلًاۚ30
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, तो निश्चय ही किसी ऐसे व्यक्ति का प्रतिदान जिसने अच्छे कर्म किया हो, हम अकारथ नहीं करते
اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهِمُ الْاَنْهَارُ يُحَلَّوْنَ ف۪يهَا مِنْ اَسَاوِرَ مِنْ ذَهَبٍ وَيَلْبَسُونَ ثِيَابًا خُضْرًا مِنْ سُنْدُسٍ وَاِسْتَبْرَقٍ مُتَّكِـ۪ٔينَ ف۪يهَا عَلَى الْاَرَٓائِكِۜ نِعْمَ الثَّوَابُۜ وَحَسُنَتْ مُرْتَفَقًا۟31
ऐसे ही लोगों के लिए सदाबहार बाग़ है। उनके नीचे नहरें बह रही होंगी। वहाँ उन्हें सोने के कंगन पहनाए जाएँगे और वे हरे पतले और गाढ़े रेशमी कपड़े पहनेंगे और ऊँचे तख़्तों पर तकिया लगाए होंगे। क्या ही अच्छा बदला है और क्या ही अच्छा विश्रामस्थल!
وَاضْرِبْ لَهُمْ مَثَلًا رَجُلَيْنِ جَعَلْنَا لِاَحَدِهِمَا جَنَّتَيْنِ مِنْ اَعْنَابٍ وَحَفَفْنَاهُمَا بِنَخْلٍ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمَا زَرْعًاۜ32
उनके समक्ष एक उपमा प्रस्तुत करो, दो व्यक्ति है। उनमें से एक को हमने अंगूरों के दो बाग़ दिए और उनके चारों ओर हमने खजूरो के वृक्षो की बाड़ लगाई और उन दोनों के बीच हमने खेती-बाड़ी रखी
كِلْتَا الْجَنَّتَيْنِ اٰتَتْ اُكُلَهَا وَلَمْ تَظْلِمْ مِنْهُ شَيْـًٔاۙ وَفَجَّرْنَا خِلَالَهُمَا نَهَرًاۙ33
दोनों में से प्रत्येक बाग़ अपने फल लाया और इसमें कोई कमी नहीं की। और उन दोनों के बीच हमने एक नहर भी प्रवाहित कर दी
وَكَانَ لَهُ ثَمَرٌۚ فَقَالَ لِصَاحِبِه۪ وَهُوَ يُحَاوِرُهُٓ اَنَا۬ اَكْثَرُ مِنْكَ مَالًا وَاَعَزُّ نَفَرًا34
उसे ख़ूब फल और पैदावार प्राप्त हुई। इसपर वह अपने साथी से, जबकि वह उससे बातचीत कर रहा था, कहने लगा, "मैं तुझसे माल और दौलत में बढ़कर हूँ और मुझे जनशक्ति भी अधिक प्राप्त है।"
وَدَخَلَ جَنَّتَهُ وَهُوَ ظَالِمٌ لِنَفْسِه۪ۚ قَالَ مَٓا اَظُنُّ اَنْ تَب۪يدَ هٰذِه۪ٓ اَبَدًاۙ35
वह अपने हकड में ज़ालिम बनकर बाग़ में प्रविष्ट हुआ। कहने लगा, "मैं ऐसा नहीं समझता कि वह कभी विनष्ट होगा
وَمَٓا اَظُنُّ السَّاعَةَ قَٓائِمَةًۙ وَلَئِنْ رُدِدْتُ اِلٰى رَبّ۪ي لَاَجِدَنَّ خَيْرًا مِنْهَا مُنْقَلَبًا36
और मैं नहीं समझता कि वह (क़ियामत की) घड़ी कभी आएगी। और यदि मैं वास्तव में अपने रब के पास पलटा भी तो निश्चय ही पलटने की जगह इससे भी उत्तम पाऊँगा।"
قَالَ لَهُ صَاحِبُهُ وَهُوَ يُحَاوِرُهُٓ اَكَفَرْتَ بِالَّذ۪ي خَلَقَكَ مِنْ تُرَابٍ ثُمَّ مِنْ نُطْفَةٍ ثُمَّ سَوّٰيكَ رَجُلًاۜ37
उसके साथी ने उससे बातचीत करते हुए कहा, "क्या तू उस सत्ता के साथ कुफ़्र करता है जिसने तुझे मिट्टी से, फिर वीर्य से पैदा किया, फिर तुझे एक पूरा आदमी बनाया?
لٰكِنَّا۬ هُوَ اللّٰهُ رَبّ۪ي وَلَٓا اُشْرِكُ بِرَبّ۪ٓي اَحَدًا38
लेकिन मेरा रब तो वही अल्लाह है और मैं किसी को अपने रब के साथ साझीदार नहीं बनाता
وَلَوْلَٓا اِذْ دَخَلْتَ جَنَّتَكَ قُلْتَ مَا شَٓاءَ اللّٰهُۙ لَا قُوَّةَ اِلَّا بِاللّٰهِۚ اِنْ تَرَنِ اَنَا۬ اَقَلَّ مِنْكَ مَالًا وَوَلَدًاۚ39
और ऐसा क्यों न हुआ कि जब तूने अपने बाग़ में प्रवेश किया तो कहता, 'जो अल्लाह चाहे, बिना अल्लाह के कोई शक्ति नहीं?' यदि तू देखता है कि मैं धन और संतति में तुझसे कम हूँ,
فَعَسٰى رَبّ۪ٓي اَنْ يُؤْتِيَنِ خَيْرًا مِنْ جَنَّتِكَ وَيُرْسِلَ عَلَيْهَا حُسْبَانًا مِنَ السَّمَٓاءِ فَتُصْبِحَ صَع۪يدًا زَلَقًاۙ40
तो आशा है कि मेरा रब मुझे तेरे बाग़ से अच्छा प्रदान करें और तेरे इस बाग़ पर आकाश से कोई क़ुर्क़ी (आपदा) भेज दे। फिर वह साफ़ मैदान होकर रह जाए
اَوْ يُصْبِحَ مَٓاؤُ۬هَا غَوْرًا فَلَنْ تَسْتَط۪يعَ لَهُ طَلَبًا41
या उसका पानी बिलकुल नीचे उतर जाए। फिर तू उसे ढूँढ़कर न ला सके।"
وَاُح۪يطَ بِثَمَرِه۪ فَاَصْبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيْهِ عَلٰى مَٓا اَنْفَقَ ف۪يهَا وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلٰى عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَا لَيْتَن۪ي لَمْ اُشْرِكْ بِرَبّ۪ٓي اَحَدًا42
हुआ भी यही कि उसका सारा फल घिराव में आ गया। उसने उसमें जो कुछ लागत लगाई थी, उसपर वह अपनी हथेलियों को नचाता रह गया. और स्थिति यह थी कि बाग़ अपनी टट्टियों पर हा पड़ा था और वह कह रहा था, "क्या ही अच्छा होता कि मैंने अपने रब के साथ किसी को साझीदार न बनाया होता!"
وَلَمْ تَكُنْ لَهُ فِئَةٌ يَنْصُرُونَهُ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَمَا كَانَ مُنْتَصِرًاۜ43
उसका कोई जत्था न हुआ जो उसके और अल्लाह के बीच पड़कर उसकी सहायता करता और न उसे स्वयं बदला लेने की सामर्थ्य प्राप्त थी
هُنَالِكَ الْوَلَايَةُ لِلّٰهِ الْحَقِّۜ هُوَ خَيْرٌ ثَوَابًا وَخَيْرٌ عُقْبًا۟44
ऐसे अवसर पर काम बनाने का सारा अधिकार परम सत्य अल्लाह ही को प्राप्त है। वही बदला देने में सबसे अच्छा है और वही अच्छा परिणाम दिखाने की स्पष्ट से भी सर्वोत्तम है
وَاضْرِبْ لَهُمْ مَثَلَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا كَمَٓاءٍ اَنْزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَٓاءِ فَاخْتَلَطَ بِه۪ نَبَاتُ الْاَرْضِ فَاَصْبَحَ هَش۪يمًا تَذْرُوهُ الرِّيَاحُۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ مُقْتَدِرًا45
और उनके समक्ष सांसारिक जीवन की उपमा प्रस्तुत करो, यह ऐसी है जैसे पानी हो, जिसे हमने आकाश से उतारा तो उससे धरती की पौध घनी होकर परस्पर गुँथ गई। फिर वह चूरा-चूरा होकर रह गई, जिसे हवाएँ उड़ाए लिए फिरती है। अल्लाह को तो हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
اَلْمَالُ وَالْبَنُونَ ز۪ينَةُ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۚ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِنْدَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ اَمَلًا46
माल और बेटे तो केवल सांसारिक जीवन की शोभा है, जबकि बाक़ी रहनेवाली नेकियाँ ही तुम्हारे रब के यहाँ परिणाम की दृष्टि से भी उत्तम है और आशा की दृष्टि से भी वही उत्तम है
وَيَوْمَ نُسَيِّرُ الْجِبَالَ وَتَرَى الْاَرْضَ بَارِزَةًۙ وَحَشَرْنَاهُمْ فَلَمْ نُغَادِرْ مِنْهُمْ اَحَدًاۚ47
जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगे और तुम धरती को बिलकुल नग्न देखोगे और हम उन्हें इकट्ठा करेंगे तो उनमें से किसी एक को भी न छोड़ेंगे
وَعُرِضُوا عَلٰى رَبِّكَ صَفًّاۜ لَقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَاكُمْ اَوَّلَ مَرَّةٍۘ بَلْ زَعَمْتُمْ اَلَّنْ نَجْعَلَ لَكُمْ مَوْعِدًا48
वे तुम्हारे रब के सामने पंक्तिबद्ध उपस्थित किए जाएँगे - "तुम हमारे सामने आ पहुँचे, जैसा हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था। नहीं, बल्कि तुम्हारा तो यह दावा था कि हम तुम्हारे लिए वादा किया हुआ कोई समय लाएँगे ही नहीं।"
وَوُضِعَ الْكِتَابُ فَتَرَى الْمُجْرِم۪ينَ مُشْفِق۪ينَ مِمَّا ف۪يهِ وَيَقُولُونَ يَا وَيْلَتَنَا مَا لِ‌هٰذَا الْكِتَابِ لَا يُغَادِرُ صَغ۪يرَةً وَلَا كَب۪يرَةً اِلَّٓا اَحْصٰيهَاۚ وَوَجَدُوا مَا عَمِلُوا حَاضِرًاۜ وَلَا يَظْلِمُ رَبُّكَ اَحَدًا۟49
किताब (कर्मपत्रिका) रखी जाएगी तो अपराधियों को देखोंगे कि जो कुछ उसमें होगा उससे डर रहे है और कह रहे है, "हाय, हमारा दुर्भाग्य! यह कैसी किताब है कि यह न कोई छोटी बात छोड़ती है न बड़ी, बल्कि सभी को इसने अपने अन्दर समाहित कर रखा है।" जो कुछ उन्होंने किया होगा सब मौजूद पाएँगे। तुम्हारा रब किसी पर ज़ुल्म न करेगा
وَاِذْ قُلْنَا لِلْمَلٰٓئِكَةِ اسْجُدُوا لِاٰدَمَ فَسَجَدُٓوا اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ كَانَ مِنَ الْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ اَمْرِ رَبِّه۪ۜ اَفَتَتَّخِذُونَهُ وَذُرِّيَّتَهُٓ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُون۪ي وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّۜ بِئْسَ لِلظَّالِم۪ينَ بَدَلًا50
याद करो जब हमने फ़रिश्तों से कहा, "आदम को सजदा करो।" तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया। वह जिन्नों में से था। तो उसने अपने रब के आदेश का उल्लंघन किया। अब क्या तुम मुझसे इतर उसे और उसकी सन्तान को संरक्षक मित्र बनाते हो? हालाँकि वे तुम्हारे शत्रु है। क्या ही बुरा विकल्प है, जो ज़ालिमों के हाथ आया!
مَٓا اَشْهَدْتُهُمْ خَلْقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَلَا خَلْقَ اَنْفُسِهِمْۖ وَمَا كُنْتُ مُتَّخِذَ الْمُضِلّ۪ينَ عَضُدًا51
मैंने न तो आकाशों और धरती को उन्हें दिखाकर पैदा किया और न स्वयं उनको बनाने और पैदा करने के समय ही उन्हें बुलाया। मैं ऐसा नहीं हूँ कि गुमराह करनेवालों को अपनी बाहु-भुजा बनाऊँ
وَيَوْمَ يَقُولُ نَادُوا شُرَكَٓاءِيَ الَّذ۪ينَ زَعَمْتُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَج۪يبُوا لَهُمْ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمْ مَوْبِقًا52
याद करो जिस दिन वह कहेगा, "बुलाओ मेरे साझीदारों को, जिनके साझीदार होने का तुम्हें दावा था।" तो वे उनको पुकारेंगे, किन्तु वे उन्हें कोई उत्तर न देंगे और हम उनके बीच सामूहिक विनाश-स्थल निर्धारित कर देंगे
وَرَاَ الْمُجْرِمُونَ النَّارَ فَظَنُّٓوا اَنَّهُمْ مُوَاقِعُوهَا وَلَمْ يَجِدُوا عَنْهَا مَصْرِفًا۟53
अपराधी लोग आग को देखेंगे तो समझ लेंगे कि वे उसमें पड़नेवाले है और उससे बच निकलने की कोई जगह न पाएँगे
وَلَقَدْ صَرَّفْنَا ف۪ي هٰذَا الْقُرْاٰنِ لِلنَّاسِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍۜ وَكَانَ الْاِنْسَانُ اَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا54
हमने लोगों के लिए इस क़ुरआन में हर प्रकार के उत्तम विषयों को तरह-तरह से बयान किया है, किन्तु मनुष्य सबसे बढ़कर झगड़ालू है
وَمَا مَنَعَ النَّاسَ اَنْ يُؤْمِنُٓوا اِذْ جَٓاءَهُمُ الْهُدٰى وَيَسْتَغْفِرُوا رَبَّهُمْ اِلَّٓا اَنْ تَاْتِيَهُمْ سُنَّةُ الْاَوَّل۪ينَ اَوْ يَاْتِيَهُمُ الْعَذَابُ قُبُلًا55
आख़िर लोगों को, जबकि उनके पास मार्गदर्शन आ गया, तो इस बात से कि वे ईमान लाते और अपने रब से क्षमा चाहते, इसके सिवा किसी चीज़ ने नहीं रोका कि उनके लिए वही कुछ सामने आए जो पूर्व जनों के सामने आ चुका है, यहाँ तक कि यातना उनके सामने आ खड़ी हो
وَمَا نُرْسِلُ الْمُرْسَل۪ينَ اِلَّا مُبَشِّر۪ينَ وَمُنْذِر۪ينَۚ وَيُجَادِلُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ وَاتَّخَذُٓوا اٰيَات۪ي وَمَٓا اُنْذِرُوا هُزُوًا56
रसूलों को हम केवल शुभ सूचना देनेवाले और सचेतकर्त्ता बनाकर भेजते है। किन्तु इनकार करनेवाले लोग है कि असत्य के सहारे झगड़ते है, ताकि सत्य को डिगा दें। उन्होंने मेरी आयतों का और जो चेतावनी उन्हें दी गई उसका मज़ाक बना दिया है
وَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ ذُكِّرَ بِاٰيَاتِ رَبِّه۪ فَاَعْرَضَ عَنْهَا وَنَسِيَ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُۜ اِنَّا جَعَلْنَا عَلٰى قُلُوبِهِمْ اَكِنَّةً اَنْ يَفْقَهُوهُ وَف۪ٓي اٰذَانِهِمْ وَقْرًاۜ وَاِنْ تَدْعُهُمْ اِلَى الْهُدٰى فَلَنْ يَهْتَدُٓوا اِذًا اَبَدًا57
उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा समझाया गया, तो उसने उनसे मुँह फेर लिया और उसे भूल गया, जो सामान उसके हाथ आगे बढ़ा चुके है? निश्चय ही हमने उनके दिलों पर परदे डाल दिए है कि कहीं वे उसे समझ न लें और उनके कानों में बोझ डाल दिया (कि कहीं वे सुन न ले) । यद्यपि तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुलाओ, वे कभी भी मार्ग नहीं पा सकते
وَرَبُّكَ الْغَفُورُ ذُو الرَّحْمَةِۜ لَوْ يُؤَاخِذُهُمْ بِمَا كَسَبُوا لَعَجَّلَ لَهُمُ الْعَذَابَۜ بَلْ لَهُمْ مَوْعِدٌ لَنْ يَجِدُوا مِنْ دُونِه۪ مَوْئِلًا58
तुम्हारा रब अत्यन्त क्षमाशील और दयावान है। यदि वह उन्हें उसपर पकड़ता जो कुछ कि उन्होंने कमाया है तो उनपर शीघ्र ही यातना ला देता। नहीं, बल्कि उनके लिए तो वादे का एक समय निशिचत है। उससे हटकर वे बच निकलने का कोई मार्ग न पाएँगे
وَتِلْكَ الْقُرٰٓى اَهْلَكْنَاهُمْ لَمَّا ظَلَمُوا وَجَعَلْنَا لِمَهْلِكِهِمْ مَوْعِدًا۟59
और ये बस्तियाँ वे है कि जब उन्होंने अत्याचार किया तो हमने उन्हें विनष्ट कर दिया, और हमने उनके विनाश के लिए एक समय निश्चित कर रखा था
وَاِذْ قَالَ مُوسٰى لِفَتٰيهُ لَٓا اَبْرَحُ حَتّٰٓى اَبْلُغَ مَجْمَعَ الْبَحْرَيْنِ اَوْ اَمْضِيَ حُقُبًا60
याद करो, जब मूसा ने अपने युवक सेवक से कहा, "जब तक कि मैं दो दरियाओं के संगम तक न पहुँच जाऊँ चलना नहीं छोड़ूँगा, चाहे मैं यूँ ही दीर्धकाल तक सफ़र करता रहूँ।"
فَلَمَّا بَلَغَا مَجْمَعَ بَيْنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَاتَّخَذَ سَب۪يلَهُ فِي الْبَحْرِ سَرَبًا61
फिर जब वे दोनों संगम पर पहुँचे तो वे अपनी मछली से ग़ाफ़िल हो गए और उस (मछली) ने दरिया में सुरंह बनाती अपनी राह ली
فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتٰيهُ اٰتِنَا غَدَٓاءَنَاۘ لَقَدْ لَق۪ينَا مِنْ سَفَرِنَا هٰذَا نَصَبًا62
फिर जब वे वहाँ से आगे बढ़ गए तो उसने अपने सेवक से कहा, "लाओ, हमारा नाश्ता। अपने इस सफ़र में तो हमें बड़ी थकान पहुँची है।"
قَالَ اَرَاَيْتَ اِذْ اَوَيْنَٓا اِلَى الصَّخْرَةِ فَاِنّ۪ي نَس۪يتُ الْحُوتَۘ وَمَٓا اَنْسَان۪يهُ اِلَّا الشَّيْطَانُ اَنْ اَذْكُرَهُۚ وَاتَّخَذَ سَب۪يلَهُ فِي الْبَحْرِۗ عَجَبًا63
उसने कहा, "ज़रा देखिए तो सही, जब हम उस चट्टान के पास ठहरे हुए थे तो मैं मछली को भूल ही गया - और शैतान ही ने उसको याद रखने से मुझे ग़ाफ़िल कर दिया - और उसने आश्चर्य रूप से दरिया में अपनी राह ली।"
قَالَ ذٰلِكَ مَا كُنَّا نَبْغِۗ فَارْتَدَّا عَلٰٓى اٰثَارِهِمَا قَصَصًاۙ64
(मूसा ने) कहा, "यही तो है जिसे हम तलाश कर रहे थे।" फिर वे दोनों अपने पदचिन्हों को देखते हुए वापस हुए
فَوَجَدَا عَبْدًا مِنْ عِبَادِنَٓا اٰتَيْنَاهُ رَحْمَةً مِنْ عِنْدِنَا وَعَلَّمْنَاهُ مِنْ لَدُنَّا عِلْمًا65
फिर उन्होंने हमारे बन्दों में से एक बन्दे को पाया, जिसे हमने अपने पास से दयालुता प्रदान की थी और जिसे अपने पास से ज्ञान प्रदान किया था
قَالَ لَهُ مُوسٰى هَلْ اَتَّبِعُكَ عَلٰٓى اَنْ تُعَلِّمَنِ مِمَّا عُلِّمْتَ رُشْدًا66
मूसा ने उससे कहा, "क्या मैं आपके पीछे चलूँ, ताकि आप मुझे उस ज्ञान औऱ विवेक की शिक्षा दें, जो आपको दी गई है?"
قَالَ اِنَّكَ لَنْ تَسْتَط۪يعَ مَعِيَ صَبْرًا67
उसने कहा, "तुम मेरे साथ धैर्य न रख सकोगे,
وَكَيْفَ تَصْبِرُ عَلٰى مَا لَمْ تُحِطْ بِه۪ خُبْرًا68
और जो चीज़ तुम्हारे ज्ञान-परिधि से बाहर हो, उस पर तुम धैर्य कैसे रख सकते हो?"
قَالَ سَتَجِدُن۪ٓي اِنْ شَٓاءَ اللّٰهُ صَابِرًا وَلَٓا اَعْص۪ي لَكَ اَمْرًا69
(मूसा ने) कहा, "यदि अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे धैर्यवान पाएँगे। और मैं किसी मामले में भी आपकी अवज्ञा नहीं करूँगा।"
قَالَ فَاِنِ اتَّبَعْتَن۪ي فَلَا تَسْـَٔلْن۪ي عَنْ شَيْءٍ حَتّٰٓى اُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًا۟70
उसने कहा, "अच्छा, यदि तुम मेरे साथ चलते हो तो मुझसे किसी चीज़ के विषय में न पूछना, यहाँ तक कि मैं स्वयं ही तुमसे उसकी चर्चा करूँ।"
فَانْطَلَقَا۠ حَتّٰٓى اِذَا رَكِبَا فِي السَّف۪ينَةِ خَرَقَهَاۜ قَالَ اَخَرَقْتَهَا لِتُغْرِقَ اَهْلَهَاۚ لَقَدْ جِئْتَ شَيْـًٔا اِمْرًا71
अन्ततः दोनों चले, यहाँ तक कि जब नौका में सवार हुए तो उसने उसमें दरार डाल दी। (मूसा ने) कहा, "आपने इसमें दरार डाल दी, ताकि उसके सवारों को डुबो दें? आपने तो एक अनोखी हरकत कर डाली।"
قَالَ اَلَمْ اَقُلْ اِنَّكَ لَنْ تَسْتَط۪يعَ مَعِيَ صَبْرًا72
उसने कहा, "क्या मैंने कहा नहीं था कि तुम मेरे साथ धैर्य न रख सकोंगे?"
قَالَ لَا تُؤَاخِذْن۪ي بِمَا نَس۪يتُ وَلَا تُرْهِقْن۪ي مِنْ اَمْر۪ي عُسْرًا73
कहा, "जो भूल-चूक मुझसे हो गई उसपर मुझे न पकड़िए और मेरे मामलें में मुझे तंगी में न डालिए।"
فَانْطَلَقَا۠ حَتّٰٓى اِذَا لَقِيَا غُلَامًا فَقَتَلَهُۙ قَالَ اَقَتَلْتَ نَفْسًا زَكِيَّةً بِغَيْرِ نَفْسٍۜ لَقَدْ جِئْتَ شَيْـًٔا نُكْرًا74
फिर वे दोनों चले, यहाँ तक कि जब वे एक लड़के से मिले तो उसने उसे मार डाला। कहा, "क्या आपने एक अच्छी-भली जान की हत्या कर दी, बिना इसके कि किसी की हत्या का बदला लेना अभीष्ट हो? यह तो आपने बहुत ही बुरा किया!"
قَالَ اَلَمْ اَقُلْ لَكَ اِنَّكَ لَنْ تَسْتَط۪يعَ مَعِيَ صَبْرًا75
उसने कहा, "क्या मैंने तुमसे कहा नहीं था कि तुम मेरे साथ धैर्य न रख सकोगे?"
قَالَ اِنْ سَاَلْتُكَ عَنْ شَيْءٍ بَعْدَهَا فَلَا تُصَاحِبْن۪يۚ قَدْ بَلَغْتَ مِنْ لَدُنّ۪ي عُذْرًا76
कहा, "इसके बाद यदि मैं आपसे कुछ पूछूँ तो आप मुझे साथ न रखें। अब तो मेरी ओर से आप पूरी तरह उज़ को पहुँच चुके है।"
فَانْطَلَقَا۠ حَتّٰٓى اِذَٓا اَتَيَٓا اَهْلَ قَرْيَةٍۨ اسْتَطْعَمَٓا اَهْلَهَا فَاَبَوْا اَنْ يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا ف۪يهَا جِدَارًا يُر۪يدُ اَنْ يَنْقَضَّ فَاَقَامَهُۜ قَالَ لَوْ شِئْتَ لَتَّخَذْتَ عَلَيْهِ اَجْرًا77
फिर वे दोनों चले, यहाँ तक कि जब वे एक बस्तीवालों के पास पहुँचे और उनसे भोजन माँगा, किन्तु उन्होंने उनके आतिथ्य से इनकार कर दिया। फिर वहाँ उन्हें एक दीवार मिली जो गिरा चाहती थी, तो उस व्यक्ति ने उसको खड़ा कर दिया। (मूसा ने) कहा, "यदि आप चाहते तो इसकी कुछ मज़दूरी ले सकते थे।"
قَالَ هٰذَا فِرَاقُ بَيْن۪ي وَبَيْنِكَۚ سَاُنَبِّئُكَ بِتَاْو۪يلِ مَا لَمْ تَسْتَطِعْ عَلَيْهِ صَبْرًا78
उसने कहा, "यह मेरे और तुम्हारे बीच जुदाई का अवसर है। अब मैं तुमको उसकी वास्तविकता बताए दे रहा हूँ, जिसपर तुम धैर्य से काम न ले सके।"
اَمَّا السَّف۪ينَةُ فَكَانَتْ لِمَسَاك۪ينَ يَعْمَلُونَ فِي الْبَحْرِ فَاَرَدْتُ اَنْ اَع۪يبَهَا وَكَانَ وَرَٓاءَهُمْ مَلِكٌ يَاْخُذُ كُلَّ سَف۪ينَةٍ غَصْبًا79
वह जो नौका थी, कुछ निर्धन लोगों की थी जो दरिया में काम करते थे, तो मैंने चाहा कि उसे ऐबदार कर दूँ, क्योंकि आगे उनके परे एक सम्राट था, जो प्रत्येक नौका को ज़बरदस्ती छीन लेता था
وَاَمَّا الْغُلَامُ فَكَانَ اَبَوَاهُ مُؤْمِنَيْنِ فَخَش۪ينَٓا اَنْ يُرْهِقَهُمَا طُغْيَانًا وَكُفْرًاۚ80
और रहा वह लड़का, तो उसके माँ-बाप ईमान पर थे। हमें आशंका हुई कि वह सरकशी और कुफ़्र से उन्हें तंग करेगा
فَاَرَدْنَٓا اَنْ يُبْدِلَهُمَا رَبُّهُمَا خَيْرًا مِنْهُ زَكٰوةً وَاَقْرَبَ رُحْمًا81
इसलिए हमने चाहा कि उनका रब उन्हें इसके बदले दूसरी संतान दे, जो आत्मविकास में इससे अच्छा हो और दया-करूणा से अधिक निकट हो
وَاَمَّا الْجِدَارُ فَكَانَ لِغُلَامَيْنِ يَت۪يمَيْنِ فِي الْمَد۪ينَةِ وَكَانَ تَحْتَهُ كَنْزٌ لَهُمَا وَكَانَ اَبُوهُمَا صَالِحًاۚ فَاَرَادَ رَبُّكَ اَنْ يَبْلُغَٓا اَشُدَّهُمَا وَيَسْتَخْرِجَا كَنْزَهُمَاۗ رَحْمَةً مِنْ رَبِّكَۚ وَمَا فَعَلْتُهُ عَنْ اَمْر۪يۜ ذٰلِكَ تَاْو۪يلُ مَا لَمْ تَسْطِعْ عَلَيْهِ صَبْرًاۜ۟82
और रही यह दीवार तो यह दो अनाथ बालकों की है जो इस नगर में रहते है। और इसके नीचे उनका ख़जाना मौजूद है। और उनका बाप नेक था, इसलिए तुम्हारे रब ने चाहा कि वे अपनी युवावस्था को पहुँच जाएँ और अपना ख़जाना निकाल लें। यह तुम्हारे रब की दयालुता के कारण हुआ। मैंने तो अपने अधिकार से कुछ नहीं किया। यह है वास्तविकता उसकी जिसपर तुम धैर्य न रख सके।"
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنْ ذِي الْقَرْنَيْنِۜ قُلْ سَاَتْلُوا عَلَيْكُمْ مِنْهُ ذِكْرًاۜ83
वे तुमसे ज़ुलक़रनैन के विषय में पूछते हैं। कह दो, "मैं तुम्हें उसका कुछ वृतान्त सुनाता हूँ।"
اِنَّا مَكَّنَّا لَهُ فِي الْاَرْضِ وَاٰتَيْنَاهُ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ سَبَبًاۙ84
हमने उसे धरती में सत्ता प्रदान की थी और उसे हर प्रकार के संसाधन दिए थे
فَاَتْبَعَ سَبَبًا85
अतएव उसने एक अभियान का आयोजन किया
حَتّٰٓى اِذَا بَلَغَ مَغْرِبَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَغْرُبُ ف۪ي عَيْنٍ حَمِئَةٍ وَوَجَدَ عِنْدَهَا قَوْمًاۜ قُلْنَا يَا ذَا الْقَرْنَيْنِ اِمَّٓا اَنْ تُعَذِّبَ وَاِمَّٓا اَنْ تَتَّخِذَ ف۪يهِمْ حُسْنًا86
यहाँ तक कि जब वह सूर्यास्त-स्थल तक पहुँचा तो उसे मटमैले काले पानी के एक स्रोत में डूबते हुए पाया और उसके निकट उसे एक क़ौम मिली। हमने कहा, "ऐ ज़ुलक़रनैन! तुझे अधिकार है कि चाहे तकलीफ़ पहुँचाए और चाहे उनके साथ अच्छा व्यवहार करे।"
قَالَ اَمَّا مَنْ ظَلَمَ فَسَوْفَ نُعَذِّبُهُ ثُمَّ يُرَدُّ اِلٰى رَبِّه۪ فَيُعَذِّبُهُ عَذَابًا نُكْرًا87
उसने कहा, "जो कोई ज़ुल्म करेगा उसे तो हम दंड देंगे। फिर वह अपने रब की ओर पलटेगा और वह उसे कठोर यातना देगा
وَاَمَّا مَنْ اٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُ جَزَٓاءًۨ الْحُسْنٰىۚ وَسَنَقُولُ لَهُ مِنْ اَمْرِنَا يُسْرًاۜ88
किन्तु जो कोई ईमान लाया औऱ अच्छा कर्म किया, उसके लिए तो अच्छा बदला है और हम उसे अपना सहज एवं मृदुल आदेश देंगे।"
ثُمَّ اَتْبَعَ سَبَبًا89
फिर उसने एक और अभियान का आयोजन किया
حَتّٰٓى اِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلٰى قَوْمٍ لَمْ نَجْعَلْ لَهُمْ مِنْ دُونِهَا سِتْرًاۙ90
यहाँ तक कि जब वह सूर्योदय स्थल पर जा पहुँचा तो उसने उसे ऐसे लोगों पर उदित होते पाया जिनके लिए हमने सूर्य के मुक़ाबले में कोई ओट नहीं रखी थी
كَذٰلِكَۜ وَقَدْ اَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًا91
ऐसा ही हमने किया था और जो कुछ उसके पास था, उसकी हमें पूरी ख़बर थी
ثُمَّ اَتْبَعَ سَبَبًا92
उसने फिर एक अभियान का आयोजन किया,
حَتّٰٓى اِذَا بَلَغَ بَيْنَ السَّدَّيْنِ وَجَدَ مِنْ دُونِهِمَا قَوْمًاۙ لَا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًا93
यहाँ तक कि जब वह दो पर्वतों के बीच पहुँचा तो उसे उनके इस किनारे कुछ पहुँचा तो उसे उनके इस किनारे कुछ लोग मिले, जो ऐसा लगाता नहीं था कि कोई बात समझ पाते हों
قَالُوا يَا ذَا الْقَرْنَيْنِ اِنَّ يَاْجُوجَ وَمَاْجُوجَ مُفْسِدُونَ فِي الْاَرْضِ فَهَلْ نَجْعَلُ لَكَ خَرْجًا عَلٰٓى اَنْ تَجْعَلَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ سَدًّا94
उन्होंने कहा, "ऐ ज़ुलक़रनैन! याजूज और माजूज इस भूभाग में उत्पात मचाते हैं। क्या हम तुम्हें कोई कर इस बात काम के लिए दें कि तुम हमारे और उनके बीच एक अवरोध निर्मित कर दो?"
قَالَ مَا مَكَّنّ۪ي ف۪يهِ رَبّ۪ي خَيْرٌ فَاَع۪ينُون۪ي بِقُوَّةٍ اَجْعَلْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ رَدْمًاۙ95
उसने कहा, "मेरे रब ने मुझे जो कुछ अधिकार एवं शक्ति दी है वह उत्तम है। तुम तो बस बल में मेरी सहायता करो। मैं तुम्हारे और उनके बीच एक सुदृढ़ दीवार बनाए देता हूँ
اٰتُون۪ي زُبَرَ الْحَد۪يدِۜ حَتّٰٓى اِذَا سَاوٰى بَيْنَ الصَّدَفَيْنِ قَالَ انْفُخُواۜ حَتّٰٓى اِذَا جَعَلَهُ نَارًاۙ قَالَ اٰتُون۪ٓي اُفْرِغْ عَلَيْهِ قِطْرًاۜ96
मुझे लोहे के टुकड़े ला दो।" यहाँ तक कि जब दोनों पर्वतों के बीच के रिक्त स्थान को पाटकर बराबर कर दिया तो कहा, "धौंको!" यहाँ तक कि जब उसे आग कर दिया तो कहा, "मुझे पिघला हुआ ताँबा ला दो, ताकि मैं उसपर उँड़ेल दूँ।"
فَمَا اسْطَاعُٓوا اَنْ يَظْهَرُوهُ وَمَا اسْتَطَاعُوا لَهُ نَقْبًا97
तो न तो वे (याजूज, माजूज) उसपर चढ़कर आ सकते थे और न वे उसमें सेंध ही लगा सकते थे
قَالَ هٰذَا رَحْمَةٌ مِنْ رَبّ۪يۚ فَاِذَا جَٓاءَ وَعْدُ رَبّ۪ي جَعَلَهُ دَكَّٓاءَۚ وَكَانَ وَعْدُ رَبّ۪ي حَقًّاۜ98
उसने कहा, "यह मेरे रब की दयालुता है, किन्तु जब मेरे रब के वादे का समय आ जाएगा तो वह उसे ढाकर बराबर कर देगा, और मेरे रब का वादा सच्चा है।"
وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ ف۪ي بَعْضٍ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًاۙ99
उस दिन हम उन्हें छोड़ देंगे कि वे एक-दूसरे से मौज़ों की तरह परस्पर गुत्मथ-गुत्था हो जाएँगे। और "सूर" फूँका जाएगा। फिर हम उन सबको एक साथ इकट्ठा करेंगे
وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِلْكَافِر۪ينَ عَرْضًاۙ100
और उस दिन जहन्नम को इनकार करनेवालों के सामने कर देंगे
اَلَّذ۪ينَ كَانَتْ اَعْيُنُهُمْ ف۪ي غِطَٓاءٍ عَنْ ذِكْر۪ي وَكَانُوا لَا يَسْتَط۪يعُونَ سَمْعًا۟101
जिनके नेत्र मेरी अनुस्मृति की ओर से परदे में थे और जो कुछ सुन भी नहीं सकते थे
اَفَحَسِبَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنْ يَتَّخِذُوا عِبَاد۪ي مِنْ دُون۪ٓي اَوْلِيَٓاءَۜ اِنَّٓا اَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِر۪ينَ نُزُلًا102
तो क्या इनकार करनेवाले इस ख़याल में हैं कि मुझसे हटकर मेरे बन्दों को अपना हिमायती बना लें? हमने ऐसे इनकार करनेवालों के आतिथ्य-सत्कार के लिए जहन्नम तैयार कर रखा है
قُلْ هَلْ نُنَبِّئُكُمْ بِالْاَخْسَر۪ينَ اَعْمَالًاۜ103
कहो, "क्या हम तुम्हें उन लोगों की ख़बर दें, जो अपने कर्मों की स्पष्ट से सबसे बढ़कर घाटा उठानेवाले हैं?
اَلَّذ۪ينَ ضَلَّ سَعْيُهُمْ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَهُمْ يَحْسَبُونَ اَنَّهُمْ يُحْسِنُونَ صُنْعًا104
यो वे लोग है जिनका प्रयास सांसारिक जीवन में अकारथ गया और वे यही समझते है कि वे बहुत अच्छा कर्म कर रहे है
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ رَبِّهِمْ وَلِقَٓائِه۪ فَحَبِطَتْ اَعْمَالُهُمْ فَلَا نُق۪يمُ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَزْنًا105
यही वे लोग है जिन्होंने अपने रब की आयतों का और उससे मिलन का इनकार किया। अतः उनके कर्म जान को लागू हुए, तो हम क़ियामत के दिन उन्हें कोई वज़न न देंगे
ذٰلِكَ جَزَٓاؤُ۬هُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا وَاتَّخَذُٓوا اٰيَات۪ي وَرُسُل۪ي هُزُوًا106
उनका बदला वही जहन्नम है, इसलिए कि उन्होंने कुफ़्र की नीति अपनाई और मेरी आयतों और मेरे रसूलों का उपहास किया
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّاتُ الْفِرْدَوْسِ نُزُلًاۙ107
निश्चय ही जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके आतिथ्य के लिए फ़िरदौस के बाग़ होंगे,
خَالِد۪ينَ ف۪يهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًا108
जिनमें वे सदैव रहेंगे, वहाँ से हटना न चाहेंगे।"
قُلْ لَوْ كَانَ الْبَحْرُ مِدَادًا لِكَلِمَاتِ رَبّ۪ي لَنَفِدَ الْبَحْرُ قَبْلَ اَنْ تَنْفَدَ كَلِمَاتُ رَبّ۪ي وَلَوْ جِئْنَا بِمِثْلِه۪ مَدَدًا109
कहो, "यदि समुद्र मेरे रब के बोल को लिखने के लिए रोशनाई हो जाए तो इससे पहले कि मेरे रब के बोल समाप्त हों, समुद्र ही समाप्त हो जाएगा। यद्यपि हम उसके सदृश्य एक और भी समुद्र उसके साथ ला मिलाएँ।"
قُلْ اِنَّمَٓا اَنَا۬ بَشَرٌ مِثْلُكُمْ يُوحٰٓى اِلَيَّ اَنَّمَٓا اِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌۚ فَمَنْ كَانَ يَرْجُوا لِقَٓاءَ رَبِّه۪ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًا صَالِحًا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّه۪ٓ اَحَدًا110
कह दो, "मैं तो केवल तुम्हीं जैसा मनुष्य हूँ। मेरी ओर प्रकाशना की जाती है कि तुम्हारा पूज्य-प्रभु बस अकेला पूज्य-प्रभु है। अतः जो कोई अपने रब से मिलन की आशा रखता हो, उसे चाहिए कि अच्छा कर्म करे और अपने रब की बन्दगी में किसी को साझी न बनाए।"