ता हा - कुरान पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
طٰهٰۜ1
ता॰ हा॰।
مَٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْقُرْاٰنَ لِتَشْقٰىۙ2
हमने तुमपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं उतारा कि तुम मशक़्क़त में पड़ जाओ
اِلَّا تَذْكِرَةً لِمَنْ يَخْشٰىۙ3
यह तो बस एक अनुस्मृति है, उसके लिए जो डरे,
تَنْز۪يلًا مِمَّنْ خَلَقَ الْاَرْضَ وَالسَّمٰوَاتِ الْعُلٰىۜ4
भली-भाँति अवतरित हुआ है उस सत्ता की ओर से, जिसने पैदा किया है धरती और उच्च आकाशों को
اَلرَّحْمٰنُ عَلَى الْعَرْشِ اسْتَوٰى5
वह रहमान है, जो राजासन पर विराजमान हुआ
لَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ الثَّرٰى6
उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है और जो कुछ इन दोनों के मध्य है और जो कुछ आर्द्र मिट्टी के नीचे है
وَاِنْ تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَاِنَّهُ يَعْلَمُ السِّرَّ وَاَخْفٰى7
तुम चाहे बात पुकार कर कहो (या चुपके से), वह तो छिपी हुई और अत्यन्त गुप्त बात को भी जानता है
اَللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ لَهُ الْاَسْمَٓاءُ الْحُسْنٰى8
अल्लाह, कि उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभू नहीं। उसके नाम बहुत ही अच्छे हैं।
وَهَلْ اَتٰيكَ حَد۪يثُ مُوسٰىۢ9
क्या तुम्हें मूसा की भी ख़बर पहुँची?
اِذْ رَاٰ نَارًا فَقَالَ لِاَهْلِهِ امْكُثُٓوا اِنّ۪ٓي اٰنَسْتُ نَارًا لَعَلّ۪ٓي اٰت۪يكُمْ مِنْهَا بِقَبَسٍ اَوْ اَجِدُ عَلَى النَّارِ هُدًى10
जबकि उसने एक आग देखी तो उसने अपने घरवालों से कहा, "ठहरो! मैंने एक आग देखी है। शायद कि तुम्हारे लिए उसमें से कोई अंगारा ले आऊँ या उस आग पर मैं मार्ग का पता पा लूँ।"
فَلَمَّٓا اَتٰيهَا نُودِيَ يَا مُوسٰى11
फिर जब वह वहाँ पहुँचा तो पुकारा गया, "ऐ मूसा!
اِنّ۪ٓي اَنَا۬ رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَۚ اِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًىۜ12
मैं ही तेरा रब हूँ। अपने जूते उतार दे। तू पवित्र घाटी 'तुवा' में है
وَاَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحٰى13
मैंने तुझे चुन लिया है। अतः सुन, जो कुछ प्रकाशना की जाती है
اِنَّن۪ٓي اَنَا اللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّٓا اَنَا۬ فَاعْبُدْن۪يۙ وَاَقِمِ الصَّلٰوةَ لِذِكْر۪ي14
निस्संदेह मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तू मेरी बन्दगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर
اِنَّ السَّاعَةَ اٰتِيَةٌ اَكَادُ اُخْف۪يهَا لِتُجْزٰى كُلُّ نَفْسٍ بِمَا تَسْعٰى15
निश्चय ही वह (क़ियामत की) घड़ी आनेवाली है - शीघ्र ही उसे लाऊँगा, उसे छिपाए रखता हूँ - ताकि प्रत्येक व्यक्ति जो प्रयास वह करता है, उसका बदला पाए
فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَنْ لَا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوٰيهُ فَتَرْدٰى16
अतः जो कोई उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी वासना के पीछे पड़ा है, वह तुझे उससे रोक न दे, अन्यथा तू विनष्ट हो जाएगा
وَمَا تِلْكَ بِيَم۪ينِكَ يَا مُوسٰى17
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?"
قَالَ هِيَ عَصَايَۚ اَتَوَكَّؤُ۬ا عَلَيْهَا وَاَهُشُّ بِهَا عَلٰى غَنَم۪ي وَلِيَ ف۪يهَا مَاٰرِبُ اُخْرٰى18
उसने कहा, "यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और इससे मेरी दूसरी ज़रूरतें भी पूरी होती है।"
قَالَ اَلْقِهَا يَا مُوسٰى19
कहा, "डाल दे उसे, ऐ मूसा!"
فَاَلْقٰيهَا فَاِذَا هِيَ حَيَّةٌ تَسْعٰى20
अतः उसने डाल दिया। सहसा क्या देखते है कि वह एक साँप है, जो दौड़ रहा है
قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ۠ سَنُع۪يدُهَا س۪يرَتَهَا الْاُولٰى21
कहा, "इसे पकड़ ले और डर मत। हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे
وَاضْمُمْ يَدَكَ اِلٰى جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَٓاءَ مِنْ غَيْرِ سُٓوءٍ اٰيَةً اُخْرٰىۙ22
और अपने हाथ अपने बाज़ू की ओर समेट ले। वह बिना किसी ऐब के रौशन दूसरी निशानी के रूप में निकलेगा
لِنُرِيَكَ مِنْ اٰيَاتِنَا الْكُبْرٰىۚ23
इसलिए कि हम तुझे अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
اِذْهَبْ اِلٰى فِرْعَوْنَ اِنَّهُ طَغٰى۟24
तू फ़िरऔन के पास जा। वह बहुत सरकश हो गया है।"
قَالَ رَبِّ اشْرَحْ ل۪ي صَدْر۪يۙ25
उसने निवेदन किया, "मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे
وَيَسِّرْ ل۪ٓي اَمْر۪يۙ26
और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे
وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَان۪يۙ27
और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे।
يَفْقَهُوا قَوْل۪يۖ28
कि वे मेरी बात समझ सकें
وَاجْعَلْ ل۪ي وَز۪يرًا مِنْ اَهْل۪يۙ29
और मेरे लिए अपने घरवालों में से एक सहायक नियुक्त कर दें,
هٰرُونَ اَخ۪يۚ30
हारून को, जो मेरा भाई है
اُشْدُدْ بِه۪ٓ اَزْر۪يۙ31
उसके द्वारा मेरी कमर मज़बूत कर
وَاَشْرِكْهُ ف۪ٓي اَمْر۪يۙ32
और उसे मेरे काम में शरीक कर दें,
كَيْ نُسَبِّحَكَ كَث۪يرًاۙ33
कि हम अधिक से अधिक तेरी तसबीह करें
وَنَذْكُرَكَ كَث۪يرًاۜ34
और तुझे ख़ूब याद करें
اِنَّكَ كُنْتَ بِنَا بَص۪يرًا35
निश्चय ही तू हमें खूब देख रहा है।"
قَالَ قَدْ اُو۫ت۪يتَ سُؤْلَكَ يَا مُوسٰى36
कहा, "दिया गया तुझे जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً اُخْرٰىۙ37
हम तो तुझपर एक बार और भी उपकार कर चुके है
اِذْ اَوْحَيْنَٓا اِلٰٓى اُمِّكَ مَا يُوحٰىۙ38
जब हमने तेरी माँ के दिल में यह बात डाली थी, जो अब प्रकाशना की जा रही है,
اَنِ اقْذِف۪يهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِف۪يهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَاْخُذْهُ عَدُوٌّ ل۪ي وَعَدُوٌّ لَهُۜ وَاَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِنّ۪يۚ وَلِتُصْنَعَ عَلٰى عَيْن۪يۢ39
कि उसको सन्दूक में रख दे; फिर उसे दरिया में डाल दे; फिर दरिया उसे तट पर डाल दे कि उसे मेरा शत्रु और उसका शत्रु उठा ले। मैंने अपनी ओर से तुझपर अपना प्रेम डाला। (ताकि तू सुरक्षित रहे) और ताकि मेरी आँख के सामने तेरा पालन-पोषण हो
اِذْ تَمْش۪ٓي اُخْتُكَ فَتَقُولُ هَلْ اَدُلُّكُمْ عَلٰى مَنْ يَكْفُلُهُۜ فَرَجَعْنَاكَ اِلٰٓى اُمِّكَ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَۜ وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنَاكَ مِنَ الْغَمِّ وَفَتَنَّاكَ فُتُونًا۠ فَلَبِثْتَ سِن۪ينَ ف۪ٓي اَهْلِ مَدْيَنَ ثُمَّ جِئْتَ عَلٰى قَدَرٍ يَا مُوسٰى40
याद कर जबकि तेरी बहन जाती और कहती थी, क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ जो इसका पालन-पोषण अपने ज़िम्मे ले ले? इस प्रकार हमने फिर तुझे तेरी माँ के पास पहुँचा दिया, ताकि उसकी आँख ठंड़ी हो और वह शोकाकुल न हो। और हमने तुझे भली-भाँति परखा। फिर तू कई वर्ष मदयन के लोगों में ठहरा रहा। फिर ऐ मूसा! तू ख़ास समय पर आ गया है
وَاصْطَنَعْتُكَ لِنَفْس۪يۚ41
हमने तुझे अपने लिए तैयार किया है
اِذْهَبْ اَنْتَ وَاَخُوكَ بِاٰيَات۪ي وَلَا تَنِيَا ف۪ي ذِكْر۪يۚ42
जो, तू और तेरी भाई मेरी निशानियो के साथ; और मेरी याद में ढ़ीले मत पड़ना
اِذْهَبَٓا اِلٰى فِرْعَوْنَ اِنَّهُ طَغٰىۚ43
जाओ दोनों, फ़िरऔन के पास, वह सरकश हो गया है
فَقُولَا لَهُ قَوْلًا لَيِّنًا لَعَلَّهُ يَتَذَكَّرُ اَوْ يَخْشٰى44
उससे नर्म बात करना, कदाचित वह ध्यान दे या डरे।"
قَالَا رَبَّنَٓا اِنَّنَا نَخَافُ اَنْ يَفْرُطَ عَلَيْنَٓا اَوْ اَنْ يَطْغٰى45
दोनों ने कहा, "ऐ हमारे रब! हमें इसका भय है कि वह हमपर ज़्यादती करे या सरकशी करने लग जाए।"
قَالَ لَا تَخَافَٓا اِنَّن۪ي مَعَكُمَٓا اَسْمَعُ وَاَرٰى46
कहा, "डरो नहीं, मै तुम्हारे साथ हूँ। सुनता और देखता हूँ
فَاْتِيَاهُ فَقُولَٓا اِنَّا رَسُولَا رَبِّكَ فَاَرْسِلْ مَعَنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ وَلَا تُعَذِّبْهُمْۜ قَدْ جِئْنَاكَ بِاٰيَةٍ مِنْ رَبِّكَۜ وَالسَّلَامُ عَلٰى مَنِ اتَّبَعَ الْهُدٰى47
अतः जाओ, उसके पास और कहो, हम तेरे रब के रसूल है। इसराईल की सन्तान को हमारे साथ भेज दे। और उन्हें यातना न दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए है। और सलामती है उसके लिए जो संमार्ग का अनुसरण करे!
اِنَّا قَدْ اُوحِيَ اِلَيْنَٓا اَنَّ الْعَذَابَ عَلٰى مَنْ كَذَّبَ وَتَوَلّٰى48
निस्संदेह हमारी ओर प्रकाशना हुई है कि यातना उसके लिए है, जो झुठलाए और मुँह फेरे।"
قَالَ فَمَنْ رَبُّكُمَا يَا مُوسٰى49
उसने कहा, "अच्छा, तुम दोनों का रब कौन है, मूसा?"
قَالَ رَبُّنَا الَّذ۪ٓي اَعْطٰى كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدٰى50
कहा, "हमारा रब वह है जिसने हर चीज़ को उसकी आकृति दी, फिर तदनुकूव निर्देशन किया।"
قَالَ فَمَا بَالُ الْقُرُونِ الْاُولٰى51
उसने कहा, "अच्छा तो उन नस्लों का क्या हाल है, जो पहले थी?"
قَالَ عِلْمُهَا عِنْدَ رَبّ۪ي ف۪ي كِتَابٍۚ لَا يَضِلُّ رَبّ۪ي وَلَا يَنْسٰىۘ52
कहा, "उसका ज्ञान मेरे रब के पास एक किताब में सुरक्षित है। मेरा रब न चूकता है और न भूलता है।"
اَلَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ مَهْدًا وَسَلَكَ لَكُمْ ف۪يهَا سُبُلًا وَاَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءًۜ فَاَخْرَجْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْ نَبَاتٍ شَتّٰى53
"वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को पालना (बिछौना) बनाया और उसने तुम्हारे लिए रास्ते निकाले और आकाश से पानी उतारा। फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे निकाले
كُلُوا وَارْعَوْا اَنْعَامَكُمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِاُو۬لِي النُّهٰى۟54
खाओ और अपने चौपायों को भी चराओ! निस्संदेह इसमें बुद्धिमानों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَف۪يهَا نُع۪يدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً اُخْرٰى55
उसी से हमने तुम्हें पैदा किया और उसी में हम तुम्हें लौटाते है और उसी से तुम्हें दूसरी बार निकालेंगे।"
وَلَقَدْ اَرَيْنَاهُ اٰيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَاَبٰى56
और हमने फ़िरऔन को अपनी सब निशानियाँ दिखाई, किन्तु उसने झुठलाया और इनकार किया।-
قَالَ اَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ اَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسٰى57
उसने कहा, "ऐ मूसा! क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि अपने जादू से हमको हमारे अपने भूभाग से निकाल दे?
فَلَنَاْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِثْلِه۪ فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَا نُخْلِفُهُ نَحْنُ وَلَٓا اَنْتَ مَكَانًا سُوًى58
अच्छा, हम भी तेरे पास ऐसा ही जादू लाते है। अब हमारे और अपने बीच एक निश्चित स्थान ठहरा ले, कोई बीच की जगह, न हम इसके विरुद्ध जाएँ और न तू।"
قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزّ۪ينَةِ وَاَنْ يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى59
कहा, "उत्सव का दिन तुम्हारे वादे का है और यह कि लोग दिन चढ़े इकट्ठे हो जाएँ।"
فَتَوَلّٰى فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُ ثُمَّ اَتٰى60
तब फ़िरऔन ने पलटकर अपने सारे हथकंडे जुटाए। और आ गया
قَالَ لَهُمْ مُوسٰى وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُمْ بِعَذَابٍۚ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرٰى61
मूसा ने उन लोगों से कहा, "तबाही है तुम्हारी; झूठ घड़कर अल्लाह पर न थोपो कि वह तुम्हें एक यातना से विनष्ट कर दे और झूठ जिस किसी ने भी घड़कर थोपा, वह असफल रहा।"
فَتَنَازَعُٓوا اَمْرَهُمْ بَيْنَهُمْ وَاَسَرُّوا النَّجْوٰى62
इसपर उन्होंने परस्पर बड़ा मतभेद किया औऱ और चुपके-चुपके कानाफूसी की
قَالُٓوا اِنْ هٰذَانِ لَسَاحِرَانِ يُر۪يدَانِ اَنْ يُخْرِجَاكُمْ مِنْ اَرْضِكُمْ بِسِحْرِهِمَا وَيَذْهَبَا بِطَر۪يقَتِكُمُ الْمُثْلٰى63
कहने लगे, "ये दोनों जादूगर है, चाहते है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारे भूभाग से निकाल बाहर करें। और तुम्हारी उत्तम और उच्च प्रणाली को तहस-नहस करके रख दे।"
فَاَجْمِعُوا كَيْدَكُمْ ثُمَّ ائْتُوا صَفًّاۚ وَقَدْ اَفْلَحَ الْيَوْمَ مَنِ اسْتَعْلٰى64
अतः तुम सब मिलकर अपना उपाय जुटा लो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आओ। आज तो प्रभावी रहा, वही सफल है।"
قَالُوا يَا مُوسٰٓى اِمَّٓا اَنْ تُلْقِيَ وَاِمَّٓا اَنْ نَكُونَ اَوَّلَ مَنْ اَلْقٰى65
वे बोले, "ऐ मूसा! या तो तुम फेंको या फिर हम पहले फेंकते हैं।"
قَالَ بَلْ اَلْقُواۚ فَاِذَا حِبَالُهُمْ وَعِصِيُّهُمْ يُخَيَّلُ اِلَيْهِ مِنْ سِحْرِهِمْ اَنَّهَا تَسْعٰى66
कहा, "नहीं, बल्कि तुम्हीं फेंको।" फिर अचानक क्या देखते है कि उनकी रस्सियाँ और लाठियाँ उनके जादू से उनके ख़याल में दौड़ती हुई प्रतीत हुई
فَاَوْجَسَ ف۪ي نَفْسِه۪ خ۪يفَةً مُوسٰى67
और मूसा अपने जी में डरा
قُلْنَا لَا تَخَفْ اِنَّكَ اَنْتَ الْاَعْلٰى68
हमने कहा, "मत डर! निस्संदेह तू ही प्रभावी रहेगा।
وَاَلْقِ مَا ف۪ي يَم۪ينِكَ تَلْقَفْ مَا صَنَعُواۜ اِنَّمَا صَنَعُوا كَيْدُ سَاحِرٍۜ وَلَا يُفْلِحُ السَّاحِرُ حَيْثُ اَتٰى69
और डाल दे जो तेरे दाहिने हाथ में है। जो कुछ उन्होंने रचा है, वह उसे निगल जाएगा। जो कुछ उन्होंने रचा है, वह तो बस जादूगर का स्वांग है और जादूगर सफल नहीं होता, चाहे वह जैसे भी आए।"
فَاُلْقِيَ السَّحَرَةُ سُجَّدًا قَالُٓوا اٰمَنَّا بِرَبِّ هٰرُونَ وَمُوسٰى70
अन्ततः जादूगर सजदे में गिर पड़े, बोले, "हम हारून और मूसा के रब पर ईमान ले आए।"
قَالَ اٰمَنْتُمْ لَهُ قَبْلَ اَنْ اٰذَنَ لَكُمْۜ اِنَّهُ لَكَب۪يرُكُمُ الَّذ۪ي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَۚ فَلَاُقَطِّعَنَّ اَيْدِيَكُمْ وَاَرْجُلَكُمْ مِنْ خِلَافٍ وَلَاُصَلِّبَنَّكُمْ ف۪ي جُذُوعِ النَّخْلِۘ وَلَتَعْلَمُنَّ اَيُّنَٓا اَشَدُّ عَذَابًا وَاَبْقٰى71
उसने कहा, "तुमने मान लिया उसको, इससे पहले कि मैं तुम्हें इसकी अनुज्ञा देता? निश्चय ही यह तुम सबका प्रमुख है, जिसने जादू सिखाया है। अच्छा, अब मैं तुम्हारा हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और खंजूर के तनों पर तुम्हें सूली दे दूँगा। तब तुम्हें अवश्य ही मालूम हो जाएगा कि हममें से किसकी यातना अधिक कठोर और स्थायी है!"
قَالُوا لَنْ نُؤْثِرَكَ عَلٰى مَا جَٓاءَنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالَّذ۪ي فَطَرَنَا فَاقْضِ مَٓا اَنْتَ قَاضٍۜ اِنَّمَا تَقْض۪ي هٰذِهِ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَاۜ72
उन्होंने कहा, "जो स्पष्ट निशानियाँ हमारे सामने आ चुकी है उनके मुक़ाबले में सौगंध है उस सत्ता की, जिसने हमें पैदा किया है, हम कदापि तुझे प्राथमिकता नहीं दे सकते। तो जो कुछ तू फ़ैसला करनेवाला है, कर ले। तू बस इसी सांसारिक जीवन का फ़ैसला कर सकता है
اِنَّٓا اٰمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَٓا اَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِۜ وَاللّٰهُ خَيْرٌ وَاَبْقٰى73
हम तो अपने रब पर ईमान ले आए, ताकि वह हमारी खताओं को माफ़ कर दे औऱ इस जादू को भी जिसपर तूने हमें बाध्य किया। अल्लाह की उत्तम और शेष रहनेवाला है।" -
اِنَّهُ مَنْ يَاْتِ رَبَّهُ مُجْرِمًا فَاِنَّ لَهُ جَهَنَّمَۜ لَا يَمُوتُ ف۪يهَا وَلَا يَحْيٰى74
सत्य यह है कि जो कोई अपने रब के पास अपराधी बनकर आया उसके लिए जहन्नम है, जिसमें वह न मरेगा और न जिएगा
وَمَنْ يَاْتِه۪ مُؤْمِنًا قَدْ عَمِلَ الصَّالِحَاتِ فَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمُ الدَّرَجَاتُ الْعُلٰىۙ75
और जो कोई उसके पास मोमिन होकर आया, जिसने अच्छे कर्म किए होंगे, तो ऐसे लोगों के लिए तो ऊँचे दर्जें है
جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ وَذٰلِكَ جَزٰٓؤُ۬ا مَنْ تَزَكّٰى۟76
अदन के बाग़ है, जिनके नीचें नहरें बहती होंगी। उनमें वे सदैव रहेंगे। यह बदला है उसका जिसने स्वयं को विकसित किया--
وَلَقَدْ اَوْحَيْنَٓا اِلٰى مُوسٰٓى اَنْ اَسْرِ بِعِبَاد۪ي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَر۪يقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًاۚ لَا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشٰى77
और हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "रातों रात मेरे बन्दों को लेकर निकल पड़, और उनके लिए दरिया में सूखा मार्ग निकाल ले। न तो तुझे पीछा किए जाने औऱ न पकड़े जाने का भय हो और न किसी अन्य चीज़ से तुझे डर लगे।"
فَاَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِه۪ فَغَشِيَهُمْ مِنَ الْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْۜ78
फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया। अन्ततः पानी उनपर छा गया, जैसाकि उसे उनपर छा जाना था
وَاَضَلَّ فِرْعَوْنُ قَوْمَهُ وَمَا هَدٰى79
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को पथभ्रष्ट किया और मार्ग न दिखाया
يَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ قَدْ اَنْجَيْنَاكُمْ مِنْ عَدُوِّكُمْ وَوٰعَدْنَاكُمْ جَانِبَ الطُّورِ الْاَيْمَنَ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكُمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوٰى80
ऐ ईसराईल की सन्तान! हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रु से छुटकारा दिया और तुमसे तूर के दाहिने छोर का वादा किया और तुमपर मग्न और सलवा उतारा,
كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَلَا تَطْغَوْا ف۪يهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَب۪يۚ وَمَنْ يَحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَب۪ي فَقَدْ هَوٰى81
"खाओ, जो कुछ पाक अच्छी चीज़े हमने तुम्हें प्रदान की है, किन्तु इसमें हद से आगे न बढ़ो कि तुमपर मेरा प्रकोप टूट पड़े और जिस किसी पर मेरा प्रकोप टूटा, वह तो गिरकर ही रहा
وَاِنّ۪ي لَغَفَّارٌ لِمَنْ تَابَ وَاٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا ثُمَّ اهْتَدٰى82
और जो तौबा कर ले और ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, फिर सीधे मार्ग पर चलता रहे, उसके लिए निश्चय ही मैं अत्यन्त क्षमाशील हूँ।" -
وَمَٓا اَعْجَلَكَ عَنْ قَوْمِكَ يَا مُوسٰى83
"और अपनी क़ौम को छोड़कर तुझे शीघ्र आने पर किस चीज़ ने उभारा, ऐ मूसा?"
قَالَ هُمْ اُو۬لَٓاءِ عَلٰٓى اَثَر۪ي وَعَجِلْتُ اِلَيْكَ رَبِّ لِتَرْضٰى84
उसने कहा, "वे मेरे पीछे ही और मैं जल्दी बढ़कर आया तेरी ओर, ऐ रब! ताकि तू राज़ी हो जाए।"
قَالَ فَاِنَّا قَدْ فَتَنَّا قَوْمَكَ مِنْ بَعْدِكَ وَاَضَلَّهُمُ السَّامِرِيُّ85
कहा, "अच्छा, तो हमने तेरे पीछे तेरी क़ौम के लोगों को आज़माइश में डाल दिया है। और सामरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर डाला।"
فَرَجَعَ مُوسٰٓى اِلٰى قَوْمِه۪ غَضْبَانَ اَسِفًاۚ قَالَ يَا قَوْمِ اَلَمْ يَعِدْكُمْ رَبُّكُمْ وَعْدًا حَسَنًاۜ اَفَطَالَ عَلَيْكُمُ الْعَهْدُ اَمْ اَرَدْتُمْ اَنْ يَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبٌ مِنْ رَبِّكُمْ فَاَخْلَفْتُمْ مَوْعِد۪ي86
तब मूसा अत्यन्त क्रोध और खेद में डूबा हुआ अपनी क़ौम के लोगों की ओर पलटा। कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! क्या तुमसे तुम्हारे रब ने अच्छा वादा नहीं किया था? क्या तुमपर लम्बी मुद्दत गुज़र गई या तुमने यही चाहा कि तुमपर तुम्हारे रब का प्रकोप ही टूटे कि तुमने मेरे वादे के विरुद्ध आचरण किया?"
قَالُوا مَٓا اَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلٰكِنَّا حُمِّلْنَٓا اَوْزَارًا مِنْ ز۪ينَةِ الْقَوْمِ فَقَذَفْنَاهَا فَكَذٰلِكَ اَلْقَى السَّامِرِيُّۙ87
उन्होंने कहा, "हमने आपसे किए हुए वादे के विरुद्ध अपने अधिकार से कुछ नहीं किया, बल्कि लोगों के ज़ेवरों के बोझ हम उठाए हुए थे, फिर हमने उनको (आग में) फेंक दिया, सामरी ने इसी तरह प्रेरित किया था।"
فَاَخْرَجَ لَهُمْ عِجْلًا جَسَدًا لَهُ خُوَارٌ فَقَالُوا هٰذَٓا اِلٰهُكُمْ وَاِلٰهُ مُوسٰى فَنَسِيَۜ88
और उसने उनके लिए एक बछड़ा ढालकर निकाला, एक धड़ जिसकी आवाज़ बैल की थी। फिर उन्होंने कहा, "यही तुम्हारा इष्ट-पूज्य है और मूसा का भी इष्ट -पूज्य है, किन्तु वह भूल गया है।"
اَفَلَا يَرَوْنَ اَلَّا يَرْجِعُ اِلَيْهِمْ قَوْلًاۙ وَلَا يَمْلِكُ لَهُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا۟89
क्या वे देखते न थे कि न वह किसी बात का उत्तर देता है और न उसे उनकी हानि का कुछ अधिकार प्राप्त है और न लाभ का?
وَلَقَدْ قَالَ لَهُمْ هٰرُونُ مِنْ قَبْلُ يَا قَوْمِ اِنَّمَا فُتِنْتُمْ بِه۪ۚ وَاِنَّ رَبَّكُمُ الرَّحْمٰنُ فَاتَّبِعُون۪ي وَاَط۪يعُٓوا اَمْر۪ي90
और हारून इससे पहले उनसे कह भी चुका था कि "मेरी क़ौम के लोगों! तुम इसके कारण बस फ़ितने में पड़ गए हो। तुम्हारा रब तो रहमान है। अतः तुम मेरा अनुसरण करो और मेरी बात मानो।"
قَالُوا لَنْ نَبْرَحَ عَلَيْهِ عَاكِف۪ينَ حَتّٰى يَرْجِعَ اِلَيْنَا مُوسٰى91
उन्होंने कहा, "जब तक मूसा लौटकर हमारे पास न आ जाए, हम तो इससे ही लगे बैठे रहेंगे।"
قَالَ يَا هٰرُونُ مَا مَنَعَكَ اِذْ رَاَيْتَهُمْ ضَلُّواۙ92
उसने कहा, "ऐ हारून! जब तुमने देखा कि ये पथभ्रष्ट हो गए है, तो किस चीज़ ने तुम्हें रोका
اَلَّا تَتَّبِعَنِۜ اَفَعَصَيْتَ اَمْر۪ي93
कि तुमने मेरा अनुसरण न किया? क्या तुमने मेरे आदेश की अवहेलना की?"
قَالَ يَبْنَؤُمَّ لَا تَاْخُذْ بِلِحْيَت۪ي وَلَا بِرَاْس۪يۚ اِنّ۪ي خَش۪يتُ اَنْ تَقُولَ فَرَّقْتَ بَيْنَ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ وَلَمْ تَرْقُبْ قَوْل۪ي94
उसने कहा, "ऐ मेरी माँ के बेटे! मेरी दाढ़ी न पकड़ और न मेरा सिर! मैं डरा कि तू कहेंगा कि तूने इसराईल की सन्तान में फूट डाल दी और मेरी बात पर ध्यान न दिया।"
قَالَ فَمَا خَطْبُكَ يَا سَامِرِيُّ95
(मूसा ने) कहा, "ऐ सामरी! तेरा क्या मामला है?"
قَالَ بَصُرْتُ بِمَا لَمْ يَبْصُرُوا بِه۪ فَقَبَضْتُ قَبْضَةً مِنْ اَثَرِ الرَّسُولِ فَنَبَذْتُهَا وَكَذٰلِكَ سَوَّلَتْ ل۪ي نَفْس۪ي96
उसने कहा, "मुझे उसकी सूझ प्राप्त हुई, जिसकी सूझ उन्हें प्राप्त॥ न हुई। फिर मैंने रसूल के पद-चिन्ह से एक मुट्ठी उठा ली। फिर उसे डाल दिया और मेरे जी ने मुझे कुछ ऐसा ही सुझाया।"
قَالَ فَاذْهَبْ فَاِنَّ لَكَ فِي الْحَيٰوةِ اَنْ تَقُولَ لَا مِسَاسَۖ وَاِنَّ لَكَ مَوْعِدًا لَنْ تُخْلَفَهُۚ وَانْظُرْ اِلٰٓى اِلٰهِكَ الَّذ۪ي ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفًاۜ لَنُحَرِّقَنَّهُ ثُمَّ لَنَنْسِفَنَّهُ فِي الْيَمِّ نَسْفًا97
कहा, "अच्छा, तू जा! अब इस जीवन में तेरे लिए यही है कि कहता रहे, कोई छुए नहीं! और निश्चित वादा है, जो तेरे लिए एक निश्चित वादा है, जो तुझपर से कदापि न टलेगा। और देख अपने इष्ट-पूज्य को जिसपर तू रीझा-जमा बैठा था! हम उसे जला डालेंगे, फिर उसे चूर्ण-विचूर्ण करके दरिया में बिखेर देंगे।"
اِنَّمَٓا اِلٰهُكُمُ اللّٰهُ الَّذ۪ي لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ وَسِعَ كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا98
"तुम्हारा पूज्य-प्रभु तो बस वही अल्लाह है, जिसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। वह अपने ज्ञान से हर चीज़ पर हावी है।"
كَذٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ اَنْبَٓاءِ مَا قَدْ سَبَقَۚ وَقَدْ اٰتَيْنَاكَ مِنْ لَدُنَّا ذِكْرًاۚ99
इस प्रकार विगत वृत्तांत हम तुम्हें सुनाते है और हमने तुम्हें अपने पास से एक अनुस्मृति प्रदान की है
مَنْ اَعْرَضَ عَنْهُ فَاِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وِزْرًاۙ100
जिस किसी ने उससे मुँह मोड़ा, वह निश्चय ही क़ियामत के दिन एक बोझ उठाएगा
خَالِد۪ينَ ف۪يهِۜ وَسَٓاءَ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ حِمْلًاۙ101
ऐसे दिन सदैव इसी वबाल में पड़े रहेंगे और क़ियामत के दिन उनके हक़ में यह बहुत ही बुरा बोझ सिद्ध होगा
يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ وَنَحْشُرُ الْمُجْرِم۪ينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًاۚ102
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम अपराधियों को उस दिन इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि उनकी आँखे नीली पड़ गई होंगी
يَتَخَافَتُونَ بَيْنَهُمْ اِنْ لَبِثْتُمْ اِلَّا عَشْرًا103
वे आपस में चुपके-चुपके कहेंगे कि "तुम बस दस ही दिन ठहरे हो।"
نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ اِذْ يَقُولُ اَمْثَلُهُمْ طَر۪يقَةً اِنْ لَبِثْتُمْ اِلَّا يَوْمًا۟104
हम भली-भाँति जानते है जो कुछ वे कहेंगे, जबकि उनका सबसे अच्छी सम्मतिवाला कहेगा, "तुम तो बस एक ही दिन ठहरे हो।"
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ الْجِبَالِ فَقُلْ يَنْسِفُهَا رَبّ۪ي نَسْفًاۙ105
वे तुमसे पर्वतों के विषय में पूछते है। कह दो, "मेरा रब उन्हें छूल की तरह उड़ा देगा,
فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًاۙ106
और धरती को एक समतल चटियल मैदान बनाकर छोड़ेगा
لَا تَرٰى ف۪يهَا عِوَجًا وَلَٓا اَمْتًا107
तुम उसमें न कोई सिलवट देखोगे और न ऊँच-नीच।"
يَوْمَئِذٍ يَتَّبِعُونَ الدَّاعِيَ لَا عِوَجَ لَهُۚ وَخَشَعَتِ الْاَصْوَاتُ لِلرَّحْمٰنِ فَلَا تَسْمَعُ اِلَّا هَمْسًا108
उस दिन वे पुकारनेवाले के पीछे चल पड़ेंगे और उसके सामने कोई अकड़ न दिखाई जा सकेगी। आवाज़े रहमान के सामने दब जाएँगी। एक हल्की मन्द आवाज़ के अतिरिक्त तुम कुछ न सुनोगे
يَوْمَئِذٍ لَا تَنْفَعُ الشَّفَاعَةُ اِلَّا مَنْ اَذِنَ لَهُ الرَّحْمٰنُ وَرَضِيَ لَهُ قَوْلًا109
उस दिन सिफ़ारिश काम न आएगी। यह और बात है कि किसी के लिए रहमान अनुज्ञा दे और उसके लिए बात करने को पसन्द करे
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُح۪يطُونَ بِه۪ عِلْمًا110
वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है, किन्तु वे अपने ज्ञान से उसपर हावी नहीं हो सकते
وَعَنَتِ الْوُجُوهُ لِلْحَيِّ الْقَيُّومِۜ وَقَدْ خَابَ مَنْ حَمَلَ ظُلْمًا111
चेहरे उस जीवन्त, शाश्वत सत्ता के आगे झुकें होंगे। असफल हुआ वह जिसने ज़ुल्म का बोझ उठाया
وَمَنْ يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا يَخَافُ ظُلْمًا وَلَا هَضْمًا112
किन्तु जो कोई अच्छे कर्म करे और हो वह मोमिन, तो उसे न तो किसी ज़ुल्म का भय होगा और न हक़ मारे जाने का
وَكَذٰلِكَ اَنْزَلْنَاهُ قُرْاٰنًا عَرَبِيًّا وَصَرَّفْنَا ف۪يهِ مِنَ الْوَع۪يدِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ اَوْ يُحْدِثُ لَهُمْ ذِكْرًا113
और इस प्रकार हमने इसे अरबी क़ुरआन के रूप में अवतरित किया है और हमने इसमें तरह-तरह से चेतावनी दी है, ताकि वे डर रखें या यह उन्हें होश दिलाए
فَتَعَالَى اللّٰهُ الْمَلِكُ الْحَقُّۚ وَلَا تَعْجَلْ بِالْقُرْاٰنِ مِنْ قَبْلِ اَنْ يُقْضٰٓى اِلَيْكَ وَحْيُهُۘ وَقُلْ رَبِّ زِدْن۪ي عِلْمًا114
अतः सर्वोच्च है अल्लाह, सच्चा सम्राट! क़ुरआन के (फ़ैसले के) सिलसिले में जल्दी न करो, जब तक कि वह पूरा न हो जाए। तेरी ओर उसकी प्रकाशना हो रही है। और कहो, "मेरे रब, मुझे ज्ञान में अभिवृद्धि प्रदान कर।"
وَلَقَدْ عَهِدْنَٓا اِلٰٓى اٰدَمَ مِنْ قَبْلُ فَنَسِيَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُ عَزْمًا۟115
और हमने इससे पहले आदम से वचन लिया था, किन्तु वह भूल गया और हमने उसमें इरादे की मज़बूती न पाई
وَاِذْ قُلْنَا لِلْمَلٰٓئِكَةِ اسْجُدُوا لِاٰدَمَ فَسَجَدُٓوا اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ اَبٰى116
और जब हमने फ़रिश्तों से कहा, "आदम को सजदा करो।" तो उन्होंने सजदा किया सिवाय इबलीस के, वह इनकार कर बैठा
فَقُلْنَا يَٓا اٰدَمُ اِنَّ هٰذَا عَدُوٌّ لَكَ وَلِزَوْجِكَ فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا مِنَ الْجَنَّةِ فَتَشْقٰى117
इसपर हमने कहा, "ऐ आदम! निश्चय ही यह तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का शत्रु है। ऐसा न हो कि तुम दोनों को जन्नत से निकलवा दे और तुम तकलीफ़ में पड़ जाओ
اِنَّ لَكَ اَلَّا تَجُوعَ ف۪يهَا وَلَا تَعْرٰىۙ118
तुम्हारे लिए तो ऐसा है कि न तुम यहाँ भूखे रहोगे और न नंगे
وَاَنَّكَ لَا تَظْمَؤُ۬ا ف۪يهَا وَلَا تَضْحٰى119
और यह कि न यहाँ प्यासे रहोगे और न धूप की तकलीफ़ उठाओगे।"
فَوَسْوَسَ اِلَيْهِ الشَّيْطَانُ قَالَ يَٓا اٰدَمُ هَلْ اَدُلُّكَ عَلٰى شَجَرَةِ الْخُلْدِ وَمُلْكٍ لَا يَبْلٰى120
फिर शैतान ने उसे उकसाया। कहने लगा, "ऐ आदम! क्या मैं तुझे शाश्वत जीवन के वृक्ष का पता दूँ और ऐसे राज्य का जो कभी जीर्ण न हो?"
فَاَكَلَا مِنْهَا فَبَدَتْ لَهُمَا سَوْاٰتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِنْ وَرَقِ الْجَنَّةِۘ وَعَصٰٓى اٰدَمُ رَبَّهُ فَغَوٰىۖ121
अन्ततः उन दोनों ने उसमें से खा लिया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी छिपाने की चीज़े उनके आगे खुल गई और वे दोनों अपने ऊपर जन्नत के पत्ते जोड-जोड़कर रखने लगे। और आदम ने अपने रब की अवज्ञा की, तो वह मार्ग से भटक गया
ثُمَّ اجْتَبٰيهُ رَبُّهُ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدٰى122
इसके पश्चात उसके रब ने उसे चुन लिया और दोबारा उसकी ओर ध्यान दिया और उसका मार्गदर्शन किया
قَالَ اهْبِطَا مِنْهَا جَم۪يعًا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّۚ فَاِمَّا يَاْتِيَنَّكُمْ مِنّ۪ي هُدًى فَمَنِ اتَّبَعَ هُدَايَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقٰى123
कहा, "तुम दोनों के दोनों यहाँ से उतरो! तुम्हारे कुछ लोग कुछ के शत्रु होंगे। फिर यदि मेरी ओर से तुम्हें मार्गदर्शन पहुँचे, तो जिस किसी ने मेरे मार्गदर्शन का अनुपालन किया, वह न तो पथभ्रष्ट होगा और न तकलीफ़ में पड़ेगा
وَمَنْ اَعْرَضَ عَنْ ذِكْر۪ي فَاِنَّ لَهُ مَع۪يشَةً ضَنْكًا وَنَحْشُرُهُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ اَعْمٰى124
और जिस किसी ने मेरी स्मृति से मुँह मोडा़ तो उसका जीवन संकीर्ण होगा और क़ियामत के दिन हम उसे अंधा उठाएँगे।"
قَالَ رَبِّ لِمَ حَشَرْتَن۪ٓي اَعْمٰى وَقَدْ كُنْتُ بَص۪يرًا125
वह कहेगा, "ऐ मेरे रब! तूने मुझे अंधा क्यों उठाया, जबकि मैं आँखोंवाला था?"
قَالَ كَذٰلِكَ اَتَتْكَ اٰيَاتُنَا فَنَس۪يتَهَاۚ وَكَذٰلِكَ الْيَوْمَ تُنْسٰى126
वह कहेगा, "इसी प्रकार (तू संसार में अंधा रहा था) । तेरे पास मेरी आयतें आई थी, तो तूने उन्हें भूला दिया था। उसी प्रकार आज तुझे भुलाया जा रहा है।"
وَكَذٰلِكَ نَجْز۪ي مَنْ اَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِنْ بِاٰيَاتِ رَبِّه۪ۜ وَلَعَذَابُ الْاٰخِرَةِ اَشَدُّ وَاَبْقٰى127
इसी प्रकार हम उसे बदला देते है जो मर्यादा का उल्लंघन करे और अपने रब की आयतों पर ईमान न लाए। और आख़िरत की यातना तो अत्यन्त कठोर और अधिक स्थायी है
اَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ اَهْلَكْنَا قَبْلَهُمْ مِنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ ف۪ي مَسَاكِنِهِمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِاُو۬لِي النُّهٰى۟128
फिर क्या उनको इससे भी मार्ग न मिला कि हम उनसे पहले कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुके है, जिनकी बस्तियों में वे चलते-फिरते है? निस्संदेह बुद्धिमानों के लिए इसमें बहुत-सी निशानियाँ है
وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ لَكَانَ لِزَامًا وَاَجَلٌ مُسَمًّىۜ129
यदि तेरे रब की ओर से पहले ही एक बात निश्चित न हो गई होती और एक अवधि नियत न की जा चुकी होती, तो अवश्य ही उन्हें यातना आ पकड़ती
فَاصْبِرْ عَلٰى مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَاۚ وَمِنْ اٰنَٓائِ الَّيْلِ فَسَبِّحْ وَاَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضٰى130
अतः जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और अपने रब का गुणगान करो, सूर्योदय से पहले और उसके डूबने से पहले, और रात की घड़ियों में भी तसबीह करो, और दिन के किनारों पर भी, ताकि तुम राज़ी हो जाओ
وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ اِلٰى مَا مَتَّعْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ ف۪يهِۜ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَاَبْقٰى131
और उसकी ओर आँख उठाकर न देखो, जो कुछ हमने उनमें से विभिन्न लोगों को उपभोग के लिए दे रखा है, ताकि हम उसके द्वारा उन्हें आज़माएँ। वह तो बस सांसारिक जीवन की शोभा है। तुम्हारे रब की रोज़ी उत्तम भी है और स्थायी भी
وَاْمُرْ اَهْلَكَ بِالصَّلٰوةِ وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَاۜ لَا نَسْـَٔلُكَ رِزْقًاۜ نَحْنُ نَرْزُقُكَۜ وَالْعَاقِبَةُ لِلتَّقْوٰى132
और अपने लोगों को नमाज़ का आदेश करो और स्वयं भी उसपर जमे रहो। हम तुमसे कोई रोज़ी नहीं माँगते। रोज़ी हम ही तुम्हें देते है, और अच्छा परिणाम तो धर्मपरायणता ही के लिए निश्चित है
وَقَالُوا لَوْلَا يَاْت۪ينَا بِاٰيَةٍ مِنْ رَبِّه۪ۜ اَوَلَمْ تَاْتِهِمْ بَيِّنَةُ مَا فِي الصُّحُفِ الْاُولٰى133
और वे कहते है कि "यह अपने रब की ओर से हमारे पास कोई निशानी क्यों नहीं लाता?" क्या उनके पास उसका स्पष्ट प्रमाण नहीं आ गया, जो कुछ कि पहले की पुस्तकों में उल्लिखित है?
وَلَوْ اَنَّٓا اَهْلَكْنَاهُمْ بِعَذَابٍ مِنْ قَبْلِه۪ لَقَالُوا رَبَّنَا لَوْلَٓا اَرْسَلْتَ اِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ اٰيَاتِكَ مِنْ قَبْلِ اَنْ نَذِلَّ وَنَخْزٰى134
यदि हम उसके पहले इन्हें किसी यातना से विनष्ट कर देते तो ये कहते कि "ऐ हमारे रब, तूने हमारे पास कोई रसूल क्यों न भेजा कि इससे पहले कि हम अपमानित और रुसवा होते, तेरी आयतों का अनुपालन करने लगते?"
قُلْ كُلٌّ مُتَرَبِّصٌ فَتَرَبَّصُواۚ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ اَصْحَابُ الصِّرَاطِ السَّوِيِّ وَمَنِ اهْتَدٰى135
कह दो, "हर एक प्रतीक्षा में है। अतः अब तुम भी प्रतीक्षा करो। शीघ्र ही तुम जान लोगे कि कौन सीधे मार्गवाला है और किनको मार्गदर्शन प्राप्त है।"