अल-हज - कुरान पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْۚ اِنَّ زَلْزَلَةَ السَّاعَةِ شَيْءٌ عَظ۪يمٌ1
ऐ लोगो! अपने रब का डर रखो! निश्चय ही क़ियामत की घड़ी का भूकम्प बड़ी भयानक चीज़ है
يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّٓا اَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى النَّاسَ سُكَارٰى وَمَا هُمْ بِسُكَارٰى وَلٰكِنَّ عَذَابَ اللّٰهِ شَد۪يدٌ2
जिस जिन तुम उसे देखोगे, हाल यह होगा कि प्रत्येक दूध पिलानेवाली अपने दूध पीते बच्चे को भूल जाएगी और प्रत्येक गर्भवती अपना गर्भभार रख देगी। और लोगों को तुम नशे में देखोगे, हालाँकि वे नशे में न होंगे, बल्कि अल्लाह की यातना है ही बड़ी कठोर चीज़
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يُجَادِلُ فِي اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيْطَانٍ مَر۪يدٍۙ3
लोगों में कोई ऐसा भी है, जो ज्ञान के बिना अल्लाह के विषय में झगड़ता है और प्रत्येक सरकश शैतान का अनुसरण करता है
كُتِبَ عَلَيْهِ اَنَّهُ مَنْ تَوَلَّاهُ فَاَنَّهُ يُضِلُّهُ وَيَهْد۪يهِ اِلٰى عَذَابِ السَّع۪يرِ4
जबकि उसके लिए लिख दिया गया है कि जो उससे मित्रता का सम्बन्ध रखेगा उसे वह पथभ्रष्ट करके रहेगा और उसे दहकती अग्नि की यातना की ओर ले जाएगा
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اِنْ كُنْتُمْ ف۪ي رَيْبٍ مِنَ الْبَعْثِ فَاِنَّا خَلَقْنَاكُمْ مِنْ تُرَابٍ ثُمَّ مِنْ نُطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِنْ مُضْغَةٍ مُخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِنُبَيِّنَ لَكُمْۜ وَنُقِرُّ فِي الْاَرْحَامِ مَا نَشَٓاءُ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُٓوا اَشُدَّكُمْۚ وَمِنْكُمْ مَنْ يُتَوَفّٰى وَمِنْكُمْ مَنْ يُرَدُّ اِلٰٓى اَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِنْ بَعْدِ عِلْمٍ شَيْـًٔاۜ وَتَرَى الْاَرْضَ هَامِدَةً فَاِذَٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَٓاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ وَاَنْبَتَتْ مِنْ كُلِّ زَوْجٍ بَه۪يجٍ5
ऐ लोगो! यदि तुम्हें दोबारा जी उठने के विषय में कोई सन्देह हो तो देखो, हमने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर लोथड़े से, फिर माँस की बोटी से जो बनावट में पूर्ण दशा में भी होती है और अपूर्ण दशा में भी, ताकि हम तुमपर स्पष्ट कर दें और हम जिसे चाहते है एक नियत समय तक गर्भाशयों में ठहराए रखते है। फिर तुम्हें एक बच्चे के रूप में निकाल लाते है। फिर (तुम्हारा पालन-पोषण होता है) ताकि तुम अपनी युवावस्था को प्राप्त हो और तुममें से कोई तो पहले मर जाता है और कोई बुढ़ापे की जीर्ण अवस्था की ओर फेर दिया जाता है जिसके परिणामस्वरूप, जानने के पश्चात वह कुछ भी नहीं जानता। और तुम भूमि को देखते हो कि सूखी पड़ी है। फिर जहाँ हमने उसपर पानी बरसाया कि वह फबक उठी और वह उभर आई और उसने हर प्रकार की शोभायमान चीज़े उगाई
ذٰلِكَ بِاَنَّ اللّٰهَ هُوَ الْحَقُّ وَاَنَّهُ يُحْيِ الْمَوْتٰى وَاَنَّهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌۙ6
यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है और वह मुर्दों को जीवित करता है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्ती है
وَاَنَّ السَّاعَةَ اٰتِيَةٌ لَا رَيْبَ ف۪يهَاۙ وَاَنَّ اللّٰهَ يَبْعَثُ مَنْ فِي الْقُبُورِ7
और यह कि क़ियामत की घड़ी आनेवाली है, इसमें कोई सन्देह नहीं है। और यह कि अल्लाह उन्हें उठाएगा जो क़ब्रों में है
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يُجَادِلُ فِي اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُن۪يرٍۙ8
और लोगों मे कोई ऐसा है जो किसी ज्ञान, मार्गदर्शन और प्रकाशमान किताब के बिना अल्लाह के विषय में (घमंड से) अपने पहलू मोड़ते हुए झगड़ता है,
ثَانِيَ عِطْفِه۪ لِيُضِلَّ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِۜ لَهُ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ وَنُذ۪يقُهُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ عَذَابَ الْحَر۪يقِ9
ताकि अल्लाह के मार्ग से भटका दे। उसके लिए दुनिया में भी रुसवाई है और क़ियामत के दिन हम उसे जलने की यातना का मज़ा चखाएँगे
ذٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ يَدَاكَ وَاَنَّ اللّٰهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِلْعَب۪يدِ۟10
(कहा जाएगा,) यह उसके कारण है जो तेरे हाथों ने आगे भेजा था और इसलिए कि अल्लाह बन्दों पर तनिक भी ज़ुल्म करनेवाला नहीं
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَعْبُدُ اللّٰهَ عَلٰى حَرْفٍۚ فَاِنْ اَصَابَهُ خَيْرٌۨ اطْمَاَنَّ بِه۪ۚ وَاِنْ اَصَابَتْهُ فِتْنَةٌۨ انْقَلَبَ عَلٰى وَجْهِه۪۠ خَسِرَ الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةَۜ ذٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُب۪ينُ11
और लोगों में कोई ऐसा है, जो एक किनारे पर रहकर अल्लाह की बन्दगी करता है। यदि उसे लाभ पहुँचा तो उससे सन्तुष्ट हो गया और यदि उसे कोई आज़माइश पेश आ गई तो औंधा होकर पलट गया। दुनिया भी खोई और आख़िरत भी। यही है खुला घाटा
يَدْعُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَضُرُّهُ وَمَا لَا يَنْفَعُهُۜ ذٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَع۪يدُ12
वह अल्लाह को छोड़कर उसे पुकारता है, जो न उसे हानि पहुँचा सके और न उसे लाभ पहुँचा सके। यही हैं परले दर्जे की गुमराही
يَدْعُوا لَمَنْ ضَرُّهُٓ اَقْرَبُ مِنْ نَفْعِه۪ۜ لَبِئْسَ الْمَوْلٰى وَلَبِئْسَ الْعَش۪يرُ13
वह उसको पुकारता है जिससे पहुँचनेवाली हानि उससे अपेक्षित लाभ की अपेक्षा अधिक निकट है। बहुत ही बुरा संरक्षक है वह और बहुत ही बुरा साथी!
اِنَّ اللّٰهَ يُدْخِلُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۜ اِنَّ اللّٰهَ يَفْعَلُ مَا يُر۪يدُ14
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। निस्संदेह अल्लाह जो चाहे करे
مَنْ كَانَ يَظُنُّ اَنْ لَنْ يَنْصُرَهُ اللّٰهُ فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ اِلَى السَّمَٓاءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنْظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُ مَا يَغ۪يظُ15
जो कोई यह समझता है कि अल्लाह दुनिया औऱ आख़िरत में उसकी (रसूल की) कदापि कोई सहायता न करेगा तो उसे चाहिए कि वह आकाश की ओर एक रस्सी ताने, फिर (अल्लाह की सहायता के सिलसिले को) काट दे। फिर देख ले कि क्या उसका उपाय उस चीज़ को दूर कर सकता है जो उसे क्रोध में डाले हुए है
وَكَذٰلِكَ اَنْزَلْنَاهُ اٰيَاتٍ بَيِّنَاتٍۙ وَاَنَّ اللّٰهَ يَهْد۪ي مَنْ يُر۪يدُ16
इसी प्रकार हमने इस (क़ुरआन) को स्पष्ट आयतों के रूप में अवतरित किया। और बात यह है कि अल्लाह जिसे चाहता है मार्ग दिखाता है
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَالَّذ۪ينَ هَادُوا وَالصَّابِـ۪ٔينَ وَالنَّصَارٰى وَالْمَجُوسَ وَالَّذ۪ينَ اَشْرَكُواۗ اِنَّ اللّٰهَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَه۪يدٌ17
जो लोग ईमान लाए और जो यहूदी हुए और साबिई और ईसाई और मजूस और जिन लोगों ने शिर्क किया - इस सबके बीच अल्लाह क़ियामत के दिन फ़ैसला कर देगा। निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि में हर चीज़ है
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ يَسْجُدُ لَهُ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَمَنْ فِي الْاَرْضِ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ وَالنُّجُومُ وَالْجِبَالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوَٓابُّ وَكَث۪يرٌ مِنَ النَّاسِۜ وَكَث۪يرٌ حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُۜ وَمَنْ يُهِنِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ مُكْرِمٍۜ اِنَّ اللّٰهَ يَفْعَلُ مَا يَشَٓاءُ18
क्या तुमनें देखा नहीं कि अल्लाह ही को सजदा करते है वे सब जो आकाशों में है और जो धरती में है, और सूर्य, चन्द्रमा, तारे पहाड़, वृक्ष, जानवर और बहुत-से मनुष्य? और बहुत-से ऐसे है जिनपर यातना का औचित्य सिद्ध हो चुका है, और जिसे अल्लाह अपमानित करे उस सम्मानित करनेवाला कोई नहीं। निस्संदेह अल्लाह जो चाहे करता है
هٰذَانِ خَصْمَانِ اخْتَصَمُوا ف۪ي رَبِّهِمْۘ فَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا قُطِّعَتْ لَهُمْ ثِيَابٌ مِنْ نَارٍۜ يُصَبُّ مِنْ فَوْقِ رُؤُ۫سِهِمُ الْحَم۪يمُۚ19
ये दो विवादी हैं, जो अपने रब के विषय में आपस में झगड़े। अतः जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए आग के वस्त्र काटे जा चुके है। उनके सिरों पर खौलता हुआ पानी डाला जाएगा
يُصْهَرُ بِه۪ مَا ف۪ي بُطُونِهِمْ وَالْجُلُودُۜ20
इससे जो कुछ उनके पेटों में है, वह पिघल जाएगा और खालें भी
وَلَهُمْ مَقَامِعُ مِنْ حَد۪يدٍ21
और उनके लिए (दंड देने को) लोहे के गुर्ज़ होंगे
كُلَّمَٓا اَرَادُٓوا اَنْ يَخْرُجُوا مِنْهَا مِنْ غَمٍّ اُع۪يدُوا ف۪يهَا وَذُوقُوا عَذَابَ الْحَر۪يقِ۟22
जब कभी भी घबराकर उससे निकलना चाहेंगे तो उसी में लौटा दिए जाएँगे और (कहा जाएगा,) "चखो दहकती आग की यातना का मज़ा!"
اِنَّ اللّٰهَ يُدْخِلُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ يُحَلَّوْنَ ف۪يهَا مِنْ اَسَاوِرَ مِنْ ذَهَبٍ وَلُؤْلُؤً۬اۜ وَلِبَاسُهُمْ ف۪يهَا حَر۪يرٌ23
निस्संदेह अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचें नहरें बह रही होंगी। वहाँ वे सोने के कंगनों और मोती से आभूषित किए जाएँगे और वहाँ उनका परिधान रेशमी होगा
وَهُدُٓوا اِلَى الطَّيِّبِ مِنَ الْقَوْلِۗ وَهُدُٓوا اِلٰى صِرَاطِ الْحَم۪يدِ24
निर्देशित किया गया उन्हें अच्छे पाक बोल की ओर और उनको प्रशंसित अल्लाह का मार्ग दिखाया गया
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَيَصُدُّونَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ الَّذ۪ي جَعَلْنَاهُ لِلنَّاسِ سَوَٓاءًۨ الْعَاكِفُ ف۪يهِ وَالْبَادِۜ وَمَنْ يُرِدْ ف۪يهِ بِاِلْحَادٍ بِظُلْمٍ نُذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ اَل۪يمٍ۟25
जिन लोगों ने इनकार किया और वे अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं और प्रतिष्ठित मस्जिद (काबा) से, जिसे हमने सब लोगों के लिए ऐसा बनाया है कि उसमें बराबर है वहाँ का रहनेवाला और बाहर से आया हुआ। और जो व्यक्ति उस (प्रतिष्ठित मस्जिद) में कुटिलता अर्थात ज़ूल्म के साथ कुछ करना चाहेगा, उसे हम दुखद यातना का मज़ा चखाएँगे
وَاِذْ بَوَّاْنَا لِاِبْرٰه۪يمَ مَكَانَ الْبَيْتِ اَنْ لَا تُشْرِكْ ب۪ي شَيْـًٔا وَطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّٓائِف۪ينَ وَالْقَٓائِم۪ينَ وَالرُّكَّعِ السُّجُودِ26
याद करो जब कि हमने इबराहीम के लिए अल्लाह के घर को ठिकाना बनाया, इस आदेश के साथ कि "मेरे साथ किसी चीज़ को साझी न ठहराना और मेरे घर को तवाफ़ (परिक्रमा) करनेवालों और खड़े होने और झुकने और सजदा करनेवालों के लिए पाक-साफ़ रखना।"
وَاَذِّنْ فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ يَاْتُوكَ رِجَالًا وَعَلٰى كُلِّ ضَامِرٍ يَاْت۪ينَ مِنْ كُلِّ فَجٍّ عَم۪يقٍۙ27
और लोगों में हज के लिए उद्घोषणा कर दो कि "वे प्रत्येक गहरे मार्ग से, पैदल भी और दुबली-दुबली ऊँटनियों पर, तेरे पास आएँ
لِيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ ف۪ٓي اَيَّامٍ مَعْلُومَاتٍ عَلٰى مَا رَزَقَهُمْ مِنْ بَه۪يمَةِ الْاَنْعَامِۚ فَكُلُوا مِنْهَا وَاَطْعِمُوا الْبَٓائِسَ الْفَق۪يرَۘ28
ताकि वे उन लाभों को देखें जो वहाँ उनके लिए रखे गए है। और कुछ ज्ञात और निश्चित दिनों में उन चौपाए अर्थात मवेशियों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें दिए है। फिर उसमें से स्वयं भी खाओ और तंगहाल मुहताज को भी खिलाओ।"
ثُمَّ لْيَقْضُوا تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا بِالْبَيْتِ الْعَت۪يقِ29
फिर उन्हें चाहिए कि अपना मैल-कुचैल दूर करें और अपनी मन्नतें पूरी करें और इस पुरातन घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करें
ذٰلِكَۗ وَمَنْ يُعَظِّمْ حُرُمَاتِ اللّٰهِ فَهُوَ خَيْرٌ لَهُ عِنْدَ رَبِّه۪ۜ وَاُحِلَّتْ لَكُمُ الْاَنْعَامُ اِلَّا مَا يُتْلٰى عَلَيْكُمْ فَاجْتَنِبُوا الرِّجْسَ مِنَ الْاَوْثَانِ وَاجْتَنِبُوا قَوْلَ الزُّورِۙ30
इन बातों का ध्यान रखों और जो कोई अल्लाह द्वारा निर्धारित मर्यादाओं का आदर करे, तो यह उसके रब के यहाँ उसी के लिए अच्छा है। और तुम्हारे लिए चौपाए हलाल है, सिवाय उनके जो तुम्हें बताए गए हैं। तो मूर्तियों की गन्दगी से बचो और बचो झूठी बातों से
حُنَفَٓاءَ لِلّٰهِ غَيْرَ مُشْرِك۪ينَ بِه۪ۜ وَمَنْ يُشْرِكْ بِاللّٰهِ فَكَاَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَٓاءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ اَوْ تَهْو۪ي بِهِ الرّ۪يحُ ف۪ي مَكَانٍ سَح۪يقٍ31
इस तरह कि अल्लाह ही की ओर के होकर रहो। उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ, क्योंकि जो कोई अल्लाह के साथ साझी ठहराता है तो मानो वह आकाश से गिर पड़ा। फिर चाहे उसे पक्षी उचक ले जाएँ या वायु उसे किसी दूरवर्ती स्थान पर फेंक दे
ذٰلِكَۗ وَمَنْ يُعَظِّمْ شَعَٓائِرَ اللّٰهِ فَاِنَّهَا مِنْ تَقْوَى الْقُلُوبِ32
इन बातों का ख़याल रखो। और जो कोई अल्लाह के नाम लगी चीज़ों का आदर करे, तो निस्संदेह वे (चीज़ें) दिलों के तक़वा (धर्मपरायणता) से सम्बन्ध रखती है
لَكُمْ ف۪يهَا مَنَافِعُ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّى ثُمَّ مَحِلُّهَٓا اِلَى الْبَيْتِ الْعَت۪يقِ۟33
उनमें एक निश्चित समय तक तुम्हारे लिए फ़ायदे है। फिर उनको उस पुरातन घर तक (क़ुरबानी के लिए) पहुँचना है
وَلِكُلِّ اُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنْسَكًا لِيَذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلٰى مَا رَزَقَهُمْ مِنْ بَه۪يمَةِ الْاَنْعَامِۜ فَاِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌ فَلَهُٓ اَسْلِمُواۜ وَبَشِّرِ الْمُخْبِت۪ينَۙ34
और प्रत्येक समुदाय के लिए हमने क़ुरबानी का विधान किया, ताकि वे उन जानवरों अर्थात मवेशियों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। अतः तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला पूज्य-प्रभु है। तो उसी के आज्ञाकारी बनकर रहो और विनम्रता अपनानेवालों को शुभ सूचना दे दो
اَلَّذ۪ينَ اِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَالصَّابِر۪ينَ عَلٰى مَٓا اَصَابَهُمْ وَالْمُق۪يمِي الصَّلٰوةِۙ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنْفِقُونَ35
ये वे लोग है कि जब अल्लाह को याद किया जाता है तो उनके दिल दहल जाते है और जो मुसीबत उनपर आती है उसपर धैर्य से काम लेते है और नमाज़ को क़ायम करते है, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते है
وَالْبُدْنَ جَعَلْنَاهَا لَكُمْ مِنْ شَعَٓائِرِ اللّٰهِ لَكُمْ ف۪يهَا خَيْرٌۗ فَاذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلَيْهَا صَوَٓافَّۚ فَاِذَا وَجَبَتْ جُنُوبُهَا فَكُلُوا مِنْهَا وَاَطْعِمُوا الْقَانِعَ وَالْمُعْتَرَّۜ كَذٰلِكَ سَخَّرْنَاهَا لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ36
(क़ुरबानी के) ऊँटों को हमने तुम्हारे लिए अल्लाह की निशानियों में से बनाया है। तुम्हारे लिए उनमें भलाई है। अतः खड़ा करके उनपर अल्लाह का नाम लो। फिर जब उनके पहलू भूमि से आ लगें तो उनमें से स्वयं भी खाओ औऱ संतोष से बैठनेवालों को भी खिलाओ और माँगनेवालों को भी। ऐसी ही करो। हमने उनको तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, ताकि तुम कृतज्ञता दिखाओ
لَنْ يَنَالَ اللّٰهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَٓاؤُ۬هَا وَلٰكِنْ يَنَالُهُ التَّقْوٰى مِنْكُمْۜ كَذٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمْ لِتُكَبِّرُوا اللّٰهَ عَلٰى مَا هَدٰيكُمْۜ وَبَشِّرِ الْمُحْسِن۪ينَ37
न उनके माँस अल्लाह को पहुँचते है और न उनके रक्त। किन्तु उसे तुम्हारा तक़वा (धर्मपरायणता) पहुँचता है। इस प्रकार उसने उन्हें तुम्हारे लिए वशीभूत किया है, ताकि तुम अल्लाह की बड़ाई बयान करो, इसपर कि उसने तुम्हारा मार्गदर्शन किया और सुकर्मियों को शुभ सूचना दे दो
اِنَّ اللّٰهَ يُدَافِعُ عَنِ الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ۟38
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों की ओर से प्रतिरक्षा करता है, जो ईमान लाए। निस्संदेह अल्लाह किसी विश्वासघाती, अकृतज्ञ को पसन्द नहीं करता
اُذِنَ لِلَّذ۪ينَ يُقَاتَلُونَ بِاَنَّهُمْ ظُلِمُواۜ وَاِنَّ اللّٰهَ عَلٰى نَصْرِهِمْ لَقَد۪يرٌۙ39
अनुमति दी गई उन लोगों को जिनके विरुद्ध युद्ध किया जा रहा है, क्योंकि उनपर ज़ुल्म किया गया - और निश्चय ही अल्लाह उनकी सहायता की पूरी सामर्थ्य रखता है। -
اَلَّذ۪ينَ اُخْرِجُوا مِنْ دِيَارِهِمْ بِغَيْرِ حَقٍّ اِلَّٓا اَنْ يَقُولُوا رَبُّنَا اللّٰهُۜ وَلَوْلَا دَفْعُ اللّٰهِ النَّاسَ بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لَهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ ف۪يهَا اسْمُ اللّٰهِ كَث۪يرًاۜ وَلَيَنْصُرَنَّ اللّٰهُ مَنْ يَنْصُرُهُۜ اِنَّ اللّٰهَ لَقَوِيٌّ عَز۪يزٌ40
ये वे लोग है जो अपने घरों से नाहक़ निकाले गए, केवल इसलिए कि वे कहते है कि "हमारा रब अल्लाह है।" यदि अल्लाह लोगों को एक-दूसरे के द्वारा हटाता न रहता तो मठ और गिरजा और यहूदी प्रार्थना भवन और मस्जिदें, जिनमें अल्लाह का अधिक नाम लिया जाता है, सब ढा दी जातीं। अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा, जो उसकी सहायता करेगा - निश्चय ही अल्लाह बड़ा बलवान, प्रभुत्वशाली है
اَلَّذ۪ينَ اِنْ مَكَّنَّاهُمْ فِي الْاَرْضِ اَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتَوُا الزَّكٰوةَ وَاَمَرُوا بِالْمَعْرُوفِ وَنَهَوْا عَنِ الْمُنْكَرِۜ وَلِلّٰهِ عَاقِبَةُ الْاُمُورِ41
ये वे लोग है कि यदि धरती में हम उन्हें सत्ता प्रदान करें तो वे नमाज़ का आयोजन करेंगे और ज़कात देंगे और भलाई का आदेश करेंगे और बुराई से रोकेंगे। और सब मामलों का अन्तिम परिणाम अल्लाह ही के हाथ में है
وَاِنْ يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُۙ42
यदि वे तुम्हें झुठलाते है तो उनसे पहले नूह की क़ौम, आद और समूद
وَقَوْمُ اِبْرٰه۪يمَ وَقَوْمُ لُوطٍۙ43
और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
وَاَصْحَابُ مَدْيَنَۚ وَكُذِّبَ مُوسٰى فَاَمْلَيْتُ لِلْكَافِر۪ينَ ثُمَّ اَخَذْتُهُمْۚ فَكَيْفَ كَانَ نَك۪يرِ44
और मदयनवाले भी झुठला चुके है और मूसा को भी झूठलाया जा चुका है। किन्तु मैंने इनकार करनेवालों को मुहलत दी, फिर उन्हें पकड़ लिया। तो कैसी रही मेरी यंत्रणा!
فَكَاَيِّنْ مِنْ قَرْيَةٍ اَهْلَكْنَاهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلٰى عُرُوشِهَا وَبِئْرٍ مُعَطَّلَةٍ وَقَصْرٍ مَش۪يدٍ45
कितनी ही बस्तियाँ है जिन्हें हमने विनष्ट कर दिया इस दशा में कि वे ज़ालिम थी, तो वे अपनी छतों के बल गिरी पड़ी है। और कितने ही परित्यक्त (उजाड़) कुएँ पड़े है और कितने ही पक्के महल भी!
اَفَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَٓا اَوْ اٰذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَاۚ فَاِنَّهَا لَا تَعْمَى الْاَبْصَارُ وَلٰكِنْ تَعْمَى الْقُلُوبُ الَّت۪ي فِي الصُّدُورِ46
क्या वे धरती में चले फिरे नहीं है कि उनके दिल होते जिनसे वे समझते या (कम से कम) कान होते जिनसे वे सुनते? बात यह है कि आँखें अंधी नहीं हो जातीं, बल्कि वे दिल अंधे हो जाते है जो सीनों में होते है
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَلَنْ يُخْلِفَ اللّٰهُ وَعْدَهُۜ وَاِنَّ يَوْمًا عِنْدَ رَبِّكَ كَاَلْفِ سَنَةٍ مِمَّا تَعُدُّونَ47
और वे तुमसे यातना के लिए जल्दी मचा रहे है! अल्लाह कदापि अपने वादे के विरुद्ध न करेंगा। किन्तु तुम्हारे रब के यहाँ एक दिन, तुम्हारी गणना के अनुसार, एक हजार वर्ष जैसा है
وَكَاَيِّنْ مِنْ قَرْيَةٍ اَمْلَيْتُ لَهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ ثُمَّ اَخَذْتُهَاۚ وَاِلَيَّ الْمَص۪يرُ۟48
कितनी ही बस्तियाँ है जिनको मैंने मुहलत दी इस दशा में कि वे ज़ालिम थीं। फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया और अन्ततः आना तो मेरी ही ओर है
قُلْ يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اِنَّمَٓا اَنَا۬ لَكُمْ نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌۚ49
कह दो, "ऐ लोगों! मैं तो तुम्हारे लिए बस एक साफ़-साफ़ सचेत करनेवाला हूँ।"
فَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ مَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَر۪يمٌ50
फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए क्षमादान और सम्मानपूर्वक आजीविका है
وَالَّذ۪ينَ سَعَوْا ف۪ٓي اٰيَاتِنَا مُعَاجِز۪ينَ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَح۪يمِ51
किन्तु जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने की कोशिश की, वही भड़कती आगवाले है
وَمَٓا اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ وَلَا نَبِيٍّ اِلَّٓا اِذَا تَمَنّٰٓى اَلْقَى الشَّيْطَانُ ف۪ٓي اُمْنِيَّتِه۪ۚ فَيَنْسَخُ اللّٰهُ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ ثُمَّ يُحْكِمُ اللّٰهُ اٰيَاتِه۪ۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌۙ52
तुमसे पहले जो रसूल और नबी भी हमने भेजा, तो जब भी उसने कोई कामना की तो शैतान ने उसकी कामना में विघ्न डालता है, अल्लाह उसे मिटा देता है। फिर अल्लाह अपनी आयतों को सुदृढ़ कर देता है। - अल्लाह सर्वज्ञ, बड़ा तत्वदर्शी है
لِيَجْعَلَ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِتْنَةً لِلَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ وَالْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْۜ وَاِنَّ الظَّالِم۪ينَ لَف۪ي شِقَاقٍ بَع۪يدٍۙ53
ताकि शैतान के डाले हुए विघ्न को उन लोगों के लिए आज़माइश बना दे जिनके दिलों में रोग है और जिनके दिल कठोर है। निस्संदेह ज़ालिम परले दर्ज के विरोध में ग्रस्त है। -
وَلِيَعْلَمَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَ اَنَّهُ الْحَقُّ مِنْ رَبِّكَ فَيُؤْمِنُوا بِه۪ فَتُخْبِتَ لَهُ قُلُوبُهُمْۜ وَاِنَّ اللّٰهَ لَهَادِ الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ54
और ताकि वे लोग जिन्हें ज्ञान मिला है, जान लें कि यह तुम्हारे रब की ओर से सत्य है। अतः वे इसपर ईमान लाएँ और उसके सामने उनके दिल झुक जाएँ और निश्चय ही अल्लाह ईमान लानेवालों को अवश्य सीधा मार्ग दिखाता है
وَلَا يَزَالُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا ف۪ي مِرْيَةٍ مِنْهُ حَتّٰى تَاْتِيَهُمُ السَّاعَةُ بَغْتَةً اَوْ يَاْتِيَهُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَق۪يمٍ55
जिन लोगों ने इनकार किया वे सदैव इसकी ओर से सन्देह में पड़े रहेंगे, यहाँ तक कि क़ियामत की घड़ी अचानक उनपर आ जाए या एक अशुभ दिन की यातना उनपर आ पहुँचे
اَلْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ لِلّٰهِۜ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْۜ فَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ف۪ي جَنَّاتِ النَّع۪يمِ56
उस दिन बादशाही अल्लाह ही की होगी। वह उनके बीच फ़ैसला कर देगा। अतः जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे नेमत भरी जन्नतों में होंगे
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا فَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُه۪ينٌ57
और जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, उनके लिए अपमानजनक यातना है
وَالَّذ۪ينَ هَاجَرُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ ثُمَّ قُتِلُٓوا اَوْ مَاتُوا لَيَرْزُقَنَّهُمُ اللّٰهُ رِزْقًا حَسَنًاۜ وَاِنَّ اللّٰهَ لَهُوَ خَيْرُ الرَّازِق۪ينَ58
और जिन लोगों ने अल्लाह के मार्ग में घरबार छोड़ा, फिर मारे गए या मर गए, अल्लाह अवश्य उन्हें अच्छी आजीविका प्रदान करेगा। और निस्संदेह अल्लाह ही उत्तम आजीविका प्रदान करनेवाला है
لَيُدْخِلَنَّهُمْ مُدْخَلًا يَرْضَوْنَهُۜ وَاِنَّ اللّٰهَ لَعَل۪يمٌ حَل۪يمٌ59
वह उन्हें ऐसी जगह प्रवेश कराएगा जिससे वे प्रसन्न हो जाएँगे। और निश्चय ही अल्लाह सर्वज्ञ, अत्यन्त सहनशील है
ذٰلِكَۚ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوقِبَ بِه۪ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيْهِ لَيَنْصُرَنَّهُ اللّٰهُۜ اِنَّ اللّٰهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ60
यह बात तो सुन ली। और जो कोई बदला लें, वैसा ही जैसा उसके साथ किया गया और फिर उसपर ज़्यादती की गई, तो अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा। निश्चय ही अल्लाह दरगुज़र करनेवाला (छोड़ देनेवाला), बहुत क्षमाशील है
ذٰلِكَ بِاَنَّ اللّٰهَ يُولِجُ الَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي الَّيْلِ وَاَنَّ اللّٰهَ سَم۪يعٌ بَص۪يرٌ61
यह इसलिए कि अल्लाह ही है जो रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में पिरोता हुआ ले आता है। और यह कि अल्लाह सुनता, देखता है
ذٰلِكَ بِاَنَّ اللّٰهَ هُوَ الْحَقُّ وَاَنَّ مَا يَدْعُونَ مِنْ دُونِه۪ هُوَ الْبَاطِلُ وَاَنَّ اللّٰهَ هُوَ الْعَلِيُّ الْكَب۪يرُ62
यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है और जिसे वे उसको छोड़कर पुकारते है, वे सब असत्य है, और यह कि अल्लाह ही सर्वोच्च, महान है
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءًۘ فَتُصْبِحُ الْاَرْضُ مُخْضَرَّةًۜ اِنَّ اللّٰهَ لَط۪يفٌ خَب۪يرٌۚ63
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह आकाश से पानी बरसाता है, तो धरती हरी-भरी हो जाती है? निस्संदेह अल्लाह सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है
لَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَاِنَّ اللّٰهَ لَهُوَ الْغَنِيُّ الْحَم۪يدُ۟64
उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। निस्संदेह अल्लाह ही निस्पृह प्रशंसनीय है
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ سَخَّرَ لَكُمْ مَا فِي الْاَرْضِ وَالْفُلْكَ تَجْر۪ي فِي الْبَحْرِ بِاَمْرِه۪ۜ وَيُمْسِكُ السَّمَٓاءَ اَنْ تَقَعَ عَلَى الْاَرْضِ اِلَّا بِاِذْنِه۪ۜ اِنَّ اللّٰهَ بِالنَّاسِ لَرَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌ65
क्या तुमने देखा नहीं कि धरती में जो कुछ भी है उसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए वशीभूत कर रखा है और नौका को भी कि उसके आदेश से दरिया में चलती है, और उसने आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है। उसकी अनुज्ञा हो तो बात दूसरी है। निस्संदेह अल्लाह लोगों के हक़ में बड़ा करुणाशील, दयावान है
وَهُوَ الَّذ۪ٓي اَحْيَاكُمْۘ ثُمَّ يُم۪يتُكُمْ ثُمَّ يُحْي۪يكُمْۜ اِنَّ الْاِنْسَانَ لَكَفُورٌ66
और वही है जिसने तुम्हें जीवन प्रदान किया। फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है और फिर वही तुम्हें जीवित करनेवाला है। निस्संदेह मानव बड़ा ही अकृतज्ञ है
لِكُلِّ اُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنْسَكًا هُمْ نَاسِكُوهُ فَلَا يُنَازِعُنَّكَ فِي الْاَمْرِ وَادْعُ اِلٰى رَبِّكَۜ اِنَّكَ لَعَلٰى هُدًى مُسْتَق۪يمٍ67
प्रत्येक समुदाय के लिए हमने बन्दगी की एक रीति निर्धारित कर दी है, जिसका पालन उसके लोग करते है। अतः इस मामले में वे तुमसे झगड़ने की राह न पाएँ। तुम तो अपने रब की ओर बुलाए जाओ। निस्संदेह तुम सीधे मार्ग पर हो
وَاِنْ جَادَلُوكَ فَقُلِ اللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ68
और यदि वे तुमसे झगड़ा करें तो कह दो कि "तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
اَللّٰهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ69
अल्लाह क़ियामत के दिन तुम्हारे बीच उस चीज़ का फ़ैसला कर देगा, जिसमें तुम विभेद करते हो।"
اَلَمْ تَعْلَمْ اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِۜ اِنَّ ذٰلِكَ ف۪ي كِتَابٍۜ اِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرٌ70
क्या तुम्हें नहीं मालूम कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाश और धरती मैं हैं? निश्चय ही वह (लोगों का कर्म) एक किताब में अंकित है। निस्संदेह वह (फ़ैसला करना) अल्लाह के लिए अत्यन्त सरल है
وَيَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِه۪ سُلْطَانًا وَمَا لَيْسَ لَهُمْ بِه۪ عِلْمٌۜ وَمَا لِلظَّالِم۪ينَ مِنْ نَص۪يرٍ71
और वे अल्लाह से इतर उनकी बन्दगी करते है जिनके लिए न तो उसने कोई प्रमाण उतारा और न उन्हें उनके विषय में कोई ज्ञान ही है। और इन ज़ालिमों को कोई सहायक नहीं
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ تَعْرِفُ ف۪ي وُجُوهِ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا الْمُنْكَرَۜ يَكَادُونَ يَسْطُونَ بِالَّذ۪ينَ يَتْلُونَ عَلَيْهِمْ اٰيَاتِنَاۜ قُلْ اَفَاُنَبِّئُكُمْ بِشَرٍّ مِنْ ذٰلِكُمْۜ اَلنَّارُۜ وَعَدَهَا اللّٰهُ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ۟72
और जब उन्हें हमारी स्पष्ट आयतें सुनाई जाती है, तो इनकार करनेवालों के चेहरों पर तुम्हें नागवारी प्रतीत होती है। लगता है कि अभी वे उन लोगों पर टूट पड़ेगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते है। कह दो, "क्या मैं तुम्हे इससे बुरी चीज़ की ख़बर दूँ? आग है वह - अल्लाह ने इनकार करनेवालों से उसी का वादा कर रखा है - और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है।"
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌ فَاسْتَمِعُوا لَهُۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ لَنْ يَخْلُقُوا ذُبَابًا وَلَوِ اجْتَمَعُوا لَهُۜ وَاِنْ يَسْلُبْهُمُ الذُّبَابُ شَيْـًٔا لَا يَسْتَنْقِذُوهُ مِنْهُۜ ضَعُفَ الطَّالِبُ وَالْمَطْلُوبُ73
ऐ लोगों! एक मिसाल पेश की जाती है। उसे ध्यान से सुनो, अल्लाह से हटकर तुम जिन्हें पुकारते हो वे एक मक्खी भी पैदा नहीं कर सकते। यद्यपि इसके लिए वे सब इकट्ठे हो जाएँ और यदि मक्खी उनसे कोई चीज़ छीन ले जाए तो उससे वे उसको छुड़ा भी नहीं सकते। बेबस और असहाय रहा चाहनेवाला भी (उपासक) और उसका अभीष्ट (उपास्य) भी
مَا قَدَرُوا اللّٰهَ حَقَّ قَدْرِه۪ۜ اِنَّ اللّٰهَ لَقَوِيٌّ عَز۪يزٌ74
उन्होंने अल्लाह की क़द्र ही नहीं पहचानी जैसी कि उसकी क़द्र पहचाननी चाहिए थी। निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त बलवान, प्रभुत्वशाली है
اَللّٰهُ يَصْطَف۪ي مِنَ الْمَلٰٓئِكَةِ رُسُلًا وَمِنَ النَّاسِۜ اِنَّ اللّٰهَ سَم۪يعٌ بَص۪يرٌۚ75
अल्लाह फ़रिश्तों में से संदेशवाहक चुनता और मनुष्यों में से भी। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुनता, देखता है
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْۜ وَاِلَى اللّٰهِ تُرْجَعُ الْاُمُورُ76
वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है। और सारे मामले अल्लाह ही की ओर पलटते है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا ارْكَعُوا وَاسْجُدُوا وَاعْبُدُوا رَبَّكُمْ وَافْعَلُوا الْخَيْرَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَۚ77
ऐ ईमान लानेवालो! झुको और सजदा करो और अपने रब की बन्दही करो और भलाई करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो
وَجَاهِدُوا فِي اللّٰهِ حَقَّ جِهَادِه۪ۜ هُوَ اجْتَبٰيكُمْ وَمَا جَعَلَ عَلَيْكُمْ فِي الدّ۪ينِ مِنْ حَرَجٍۜ مِلَّةَ اَب۪يكُمْ اِبْرٰه۪يمَۜ هُوَ سَمّٰيكُمُ الْمُسْلِم۪ينَ مِنْ قَبْلُ وَف۪ي هٰذَا لِيَكُونَ الرَّسُولُ شَه۪يدًا عَلَيْكُمْ وَتَكُونُوا شُهَدَٓاءَ عَلَى النَّاسِۚ فَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَ وَاعْتَصِمُوا بِاللّٰهِۜ هُوَ مَوْلٰيكُمْۚ فَنِعْمَ الْمَوْلٰى وَنِعْمَ النَّص۪يرُ78
और परस्पर मिलकर जिहाद करो अल्लाह के मार्ग में, जैसा कि जिहाद का हक़ है। उसने तुम्हें चुन लिया है - और धर्म के मामले में तुमपर कोई तंगी और कठिनाई नहीं रखी। तुम्हारे बाप इबराहीम के पंथ को तुम्हारे लिए पसन्द किया। उसने इससे पहले तुम्हारा नाम मुस्लिम (आज्ञाकारी) रखा था और इस ध्येय से - ताकि रसूल तुमपर गवाह हो और तुम लोगों पर गवाह हो। अतः नमाज़ का आयोजन करो और ज़कात दो और अल्लाह को मज़बूती से पकड़े रहो। वही तुम्हारा संरक्षक है। तो क्या ही अच्छा संरक्षक है और क्या ही अच्छा सहायक!