सबा - कुरान पढ़ें

34सबा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي لَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِ وَلَهُ الْحَمْدُ فِي الْاٰخِرَةِۜ وَهُوَ الْحَك۪يمُ الْخَب۪يرُ1
प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जिसका वह सब कुछ है जो आकाशों और धरती में है। और आख़िरत में भी उसी के लिए प्रशंसा है। और वही तत्वदर्शी, ख़बर रखनेवाला है
يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِي الْاَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنْزِلُ مِنَ السَّمَٓاءِ وَمَا يَعْرُجُ ف۪يهَاۜ وَهُوَ الرَّح۪يمُ الْغَفُورُ2
वह जानता है जो कुछ धरती में प्रविष्ट होता है और जो कुथ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। और वही अत्यन्त दयावान, क्षमाशील है
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَا تَاْت۪ينَا السَّاعَةُۜ قُلْ بَلٰى وَرَبّ۪ي لَتَاْتِيَنَّكُمْ عَالِمِ الْغَيْبِۚ لَا يَعْزُبُ عَنْهُ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ فِي السَّمٰوَاتِ وَلَا فِي الْاَرْضِ وَلَٓا اَصْغَرُ مِنْ ذٰلِكَ وَلَٓا اَكْبَرُ اِلَّا ف۪ي كِتَابٍ مُب۪ينٍۙ3
जिन लोगों ने इनकार किया उनका कहना है कि "हमपर क़ियामत की घड़ी नहीं आएगी।" कह दो, "क्यों नहीं, मेरे परोक्ष ज्ञाता रब की क़सम! वह तो तुमपर आकर रहेगी - उससे कणभर भी कोई चीज़ न तो आकाशों में ओझल है और न धरती में, और न इससे छोटी कोई चीज़ और न बड़ी। किन्तु वह एक स्पष्ट किताब में अंकित है। -
لِيَجْزِيَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِۜ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ مَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَر۪يمٌ4
"ताकि वह उन लोगों को बदला दे, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए। वहीं है जिनके लिए क्षमा और प्रतिष्ठामय आजीविका है
وَالَّذ۪ينَ سَعَوْ ف۪ٓي اٰيَاتِنَا مُعَاجِز۪ينَ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مِنْ رِجْزٍ اَل۪يمٌۗ5
"रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयतों को मात करने का प्रयास किया, वह है जिनके लिए बहुत ही बुरे प्रकार की दुखद यातना है।"
وَيَرَى الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَ الَّذ۪ٓي اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ هُوَ الْحَقَّۙ وَيَهْد۪ٓي اِلٰى صِرَاطِ الْعَز۪يزِ الْحَم۪يدِ6
जिन लोगों को ज्ञान प्राप्त हुआ है वे स्वयं देखते है कि जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है वही सत्य है, और वह उसका मार्ग दिखाता है जो प्रभुत्वशाली, प्रशंसा का अधिकारी है
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا هَلْ نَدُلُّكُمْ عَلٰى رَجُلٍ يُنَبِّئُكُمْ اِذَا مُزِّقْتُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍۙ اِنَّكُمْ لَف۪ي خَلْقٍ جَد۪يدٍۚ7
जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है कि "क्या हम तुम्हें एक ऐसा आदमी बताएँ जो तुम्हें ख़बर देता है कि जब तुम बिलकुल चूर्ण-विचूर्ण हो जाओगे तो तुम नवीन काय में जीवित होगे?"
اَفْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا اَمْ بِه۪ جِنَّةٌۜ بَلِ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ فِي الْعَذَابِ وَالضَّلَالِ الْبَع۪يدِ8
क्या उसने अल्लाह पर झूठ घड़कर थोपा है, या उसे कुछ उन्माद है? नहीं, बल्कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वे यातना और परले दरजे की गुमराही में हैं
اَفَلَمْ يَرَوْا اِلٰى مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ مِنَ السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِۜ اِنْ نَشَاْ نَخْسِفْ بِهِمُ الْاَرْضَ اَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًا مِنَ السَّمَٓاءِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِكُلِّ عَبْدٍ مُن۪يبٍ۟9
क्या उन्होंने आकाश और धरती को नहीं देखा, जो उनके आगे भी है और उनके पीछे भी? यदि हम चाहें तो उन्हें धरती में धँसा दें या उनपर आकाश से कुछ टुकड़े गिरा दें। निश्चय ही इसमें एक निशानी है हर उस बन्दे के लिए जो रुजू करनेवाला हो
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا دَاوُ۫دَ مِنَّا فَضْلًاۜ يَا جِبَالُ اَوِّب۪ي مَعَهُ وَالطَّيْرَۚ وَاَلَنَّا لَهُ الْحَد۪يدَۙ10
हमने दाऊद को अपनी ओर से श्रेष्ठ ता प्रदान की, "ऐ पर्वतों! उसके साथ तसबीह को प्रतिध्वनित करो, और पक्षियों तुम भी!" और हमने उसके लिए लोहे को नर्म कर दिया
اَنِ اعْمَلْ سَابِغَاتٍ وَقَدِّرْ فِي السَّرْدِ وَاعْمَلُوا صَالِحًاۜ اِنّ۪ي بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ11
कि "पूरी कवचें बना और कड़ियों को ठीक अंदाज़ें से जोड।" - और तुम अच्छा कर्म करो। निस्संदेह जो कुछ तुम करते हो उसे मैं देखता हूँ
وَلِسُلَيْمٰنَ الرّ۪يحَ غُدُوُّهَا شَهْرٌ وَرَوَاحُهَا شَهْرٌۚ وَاَسَلْنَا لَهُ عَيْنَ الْقِطْرِۜ وَمِنَ الْجِنِّ مَنْ يَعْمَلُ بَيْنَ يَدَيْهِ بِاِذْنِ رَبِّه۪ۜ وَمَنْ يَزِغْ مِنْهُمْ عَنْ اَمْرِنَا نُذِقْهُ مِنْ عَذَابِ السَّع۪يرِ12
और सुलैमान के लिए वायु को वशीभुत कर दिया था। प्रातः समय उसका चलना एक महीने की राह तक और सायंकाल को उसका चलना एक महीने की राह तक - और हमने उसके लिए पिघले हुए ताँबे का स्रोत बहा दिया - और जिन्नों में से भी कुछ को (उसके वशीभूत कर दिया था,) जो अपने रब की अनुज्ञा से उसके आगे काम करते थे। (हमारा आदेशा था,) "उनमें से जो हमारे हुक्म से फिरेगा उसे हम भडकती आग का मज़ा चखाएँगे।"
يَعْمَلُونَ لَهُ مَا يَشَٓاءُ مِنْ مَحَار۪يبَ وَتَمَاث۪يلَ وَجِفَانٍ كَالْجَوَابِ وَقُدُورٍ رَاسِيَاتٍۜ اِعْمَلُٓوا اٰلَ دَاوُ۫دَ شُكْرًاۜ وَقَل۪يلٌ مِنْ عِبَادِيَ الشَّكُورُ13
वे उसके लिए बनाते, जो कुछ वह चाहता - बड़े-बड़े भवन, प्रतिमाएँ, बड़े हौज़ जैसे थाल और जमी रहनेवाली देगें - "ऐ दाऊद के लोगों! कर्म करो, कृतज्ञता दिखाने रूप में। मेरे बन्दों में कृतज्ञ थोड़े ही हैं।"
فَلَمَّا قَضَيْنَا عَلَيْهِ الْمَوْتَ مَا دَلَّهُمْ عَلٰى مَوْتِه۪ٓ اِلَّا دَٓابَّةُ الْاَرْضِ تَاْكُلُ مِنْسَاَتَهُۚ فَلَمَّا خَرَّ تَبَيَّنَتِ الْجِنُّ اَنْ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ الْغَيْبَ مَا لَبِثُوا فِي الْعَذَابِ الْمُه۪ينِ14
फिर जब हमने उसके लिए मौत का फ़ैसला लागू किया तो फिर उन जिन्नों को उसकी मौत का पता बस भूमि के उस कीड़े ने दिया जो उसकी लाठी को खा रहा था। फिर जब वह गिर पड़ा, तब जिन्नों पर प्रकट हुआ कि यदि वे परोक्ष के जाननेवाले होते तो इस अपमानजनक यातना में पड़े न रहते
لَقَدْ كَانَ لِسَبَاٍ ف۪ي مَسْكَنِهِمْ اٰيَةٌۚ جَنَّتَانِ عَنْ يَم۪ينٍ وَشِمَالٍۜ كُلُوا مِنْ رِزْقِ رَبِّكُمْ وَاشْكُرُوا لَهُۜ بَلْدَةٌ طَيِّبَةٌ وَرَبٌّ غَفُورٌ15
सबा के लिए उनके निवास-स्थान ही में एक निशानी थी - दाएँ और बाएँ दो बाग, "खाओ अपने रब की रोज़ी, और उसके प्रति आभार प्रकट करो। भूमि भी अच्छी-सी और रब भी क्षमाशील।"
فَاَعْرَضُوا فَاَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ سَيْلَ الْعَرِمِ وَبَدَّلْنَاهُمْ بِجَنَّتَيْهِمْ جَنَّتَيْنِ ذَوَاتَيْ اُكُلٍ خَمْطٍ وَاَثْلٍ وَشَيْءٍ مِنْ سِدْرٍ قَل۪يلٍ16
किन्तु वे ध्यान में न लाए तो हमने उनपर बँध-तोड़ बाढ़ भेज दी और उनके दोनों बाग़ों के बदले में उन्हें दो दूसरे बाग़ दिए, जिनमें कड़वे-कसैले फल और झाड़ थे, और कुछ थोड़ी-सी झड़-बेरियाँ
ذٰلِكَ جَزَيْنَاهُمْ بِمَا كَفَرُواۜ وَهَلْ نُجَاز۪ٓي اِلَّا الْكَفُورَ17
यह बदला हमने उन्हें इसलिए दिया कि उन्होंने कृतध्नता दिखाई। ऐसा बदला तो हम कृतध्न लोगों को ही देते है
وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ الْقُرَى الَّت۪ي بَارَكْنَا ف۪يهَا قُرًى ظَاهِرَةً وَقَدَّرْنَا ف۪يهَا السَّيْرَۜ س۪يرُوا ف۪يهَا لَيَالِيَ وَاَيَّامًا اٰمِن۪ينَ18
और हमने उनके और उन बस्तियों के बीच जिनमें हमने बरकत रखी थी प्रत्यक्ष बस्तियाँ बसाई और उनमें सफ़र की मंज़िलें ख़ास अंदाज़े पर रखीं, "उनमें रात-दिन निश्चिन्त होकर चलो फिरो!"
فَقَالُوا رَبَّنَا بَاعِدْ بَيْنَ اَسْفَارِنَا وَظَلَمُٓوا اَنْفُسَهُمْ فَجَعَلْنَاهُمْ اَحَاد۪يثَ وَمَزَّقْنَاهُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ19
किन्तु उन्होंने कहा, "ऐ हमारे रब! हमारी यात्राओं में दूरी कर दे।" उन्होंने स्वयं अपने ही ऊपर ज़ुल्म किया। अन्ततः हम उन्हें (अतीत की) कहानियाँ बनाकर रहे, औऱ उन्हें बिल्कुल छिन्न-भिन्न कर डाला। निश्चय ही इसमें निशानियाँ है प्रत्येक बड़े धैर्यवान, कृतज्ञ के लिए
وَلَقَدْ صَدَّقَ عَلَيْهِمْ اِبْل۪يسُ ظَنَّهُ فَاتَّبَعُوهُ اِلَّا فَر۪يقًا مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ20
इबलीस ने उनके विषय में अपना गुमान सत्य पाया और ईमानवालो के एक गिरोह के सिवा उन्होंने उसी का अनुसरण किया
وَمَا كَانَ لَهُ عَلَيْهِمْ مِنْ سُلْطَانٍ اِلَّا لِنَعْلَمَ مَنْ يُؤْمِنُ بِالْاٰخِرَةِ مِمَّنْ هُوَ مِنْهَا ف۪ي شَكٍّۜ وَرَبُّكَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ حَف۪يظٌ۟21
यद्यपि उसको उनपर कोई ज़ोर और अधिकार प्राप्त न था, किन्तु यह इसलिए कि हम उन लोगों को जो आख़िरत पर ईमान रखते है उन लोगों से अलग जान ले जो उसकी ओर से किसी सन्देह में पड़े हुए है। तुम्हारा रब हर चीज़ का अभिरक्षक है
قُلِ ادْعُوا الَّذ۪ينَ زَعَمْتُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِۚ لَا يَمْلِكُونَ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ فِي السَّمٰوَاتِ وَلَا فِي الْاَرْضِ وَمَا لَهُمْ ف۪يهِمَا مِنْ شِرْكٍ وَمَا لَهُ مِنْهُمْ مِنْ ظَه۪يرٍ22
कह दो, "अल्लाह को छोड़कर जिनका तुम्हें (उपास्य होने का) दावा है, उन्हें पुकार कर देखो। वे न अल्लाह में कणभर चीज़ के मालिक है और न धरती में और न उन दोनों में उनका कोई साझी है और न उनमें से कोई उसका सहायक है।"
وَلَا تَنْفَعُ الشَّفَاعَةُ عِنْدَهُٓ اِلَّا لِمَنْ اَذِنَ لَهُۜ حَتّٰٓى اِذَا فُزِّعَ عَنْ قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَاۙ قَالَ رَبُّكُمْۜ قَالُوا الْحَقَّۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَب۪يرُ23
और उसके यहाँ कोई सिफ़ारिश काम नहीं आएगी, किन्तु उसी की जिसे उसने (सिफ़ारिश करने की) अनुमति दी हो। यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर हो जाएगी, तो वे कहेंगे, "तुम्हारे रब ने क्या कहा?" वे कहेंगे, "सर्वथा सत्य। और वह अत्यन्त उच्च, महान है।"
قُلْ مَنْ يَرْزُقُكُمْ مِنَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ قُلِ اللّٰهُۙ وَاِنَّٓا اَوْ اِيَّاكُمْ لَعَلٰى هُدًى اَوْ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ24
कहो, "कौन तुम्हें आकाशों और धरती में रोज़ी देता है?" कहो, "अल्लाह!" अब अवश्य ही हम है या तुम ही हो मार्ग पर, या खुली गुमराही में
قُلْ لَا تُسْـَٔلُونَ عَمَّٓا اَجْرَمْنَا وَلَا نُسْـَٔلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ25
कहो, "जो अपराध हमने किए, उसकी पूछ तुमसे न होगी और न उसकी पूछ हमसे होगी जो तुम कर रहे हो।"
قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّۜ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَل۪يمُ26
कह दो, "हमारा रब हम सबको इकट्ठा करेगा। फिर हमारे बीच ठीक-ठीक फ़ैसला कर देगा। वही ख़ूब फ़ैसला करनेवाला, अत्यन्त ज्ञानवान है।"
قُلْ اَرُونِيَ الَّذ۪ينَ اَلْحَقْتُمْ بِه۪ شُرَكَٓاءَ كَلَّاۜ بَلْ هُوَ اللّٰهُ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ27
कहो, "मुझे उनको दिखाओ तो, जिनको तुमने साझीदार बनाकर उसके साथ जोड रखा है। कुछ नहीं, बल्कि बही अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
وَمَٓا اَرْسَلْنَاكَ اِلَّا كَٓافَّةً لِلنَّاسِ بَش۪يرًا وَنَذ۪يرًا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ28
हमने तो तुम्हें सारे ही मनुष्यों को शुभ-सूचना देनेवाला और सावधान करनेवाला बनाकर भेजा, किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं
وَيَقُولُونَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ29
वे कहते है, "यह वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?"
قُلْ لَكُمْ م۪يعَادُ يَوْمٍ لَا تَسْتَاْخِرُونَ عَنْهُ سَاعَةً وَلَا تَسْتَقْدِمُونَ۟30
कह दो, "तुम्हारे लिए एक विशेष दिन की अवधि नियत है, जिससे न एक घड़ी भर पीछे हटोगे और न आगे बढ़ोगे।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَنْ نُؤْمِنَ بِهٰذَا الْقُرْاٰنِ وَلَا بِالَّذ۪ي بَيْنَ يَدَيْهِۜ وَلَوْ تَرٰٓى اِذِ الظَّالِمُونَ مَوْقُوفُونَ عِنْدَ رَبِّهِمْۚ يَرْجِعُ بَعْضُهُمْ اِلٰى بَعْضٍۨ الْقَوْلَۚ يَقُولُ الَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا لَوْلَٓا اَنْتُمْ لَكُنَّا مُؤْمِن۪ينَ31
जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है, "हम इस क़ुरआन को कदापि न मानेंगे और न उसको जो इसके आगे है।" और यदि तुम देख पाते जब ज़ालिम अपने रब के सामने खड़े कर दिए जाएँगे। वे आपस में एक-दूसरे पर इल्ज़ाम डाल रहे होंगे। जो लोग कमज़ोर समझे गए वे उन लोगों से जो बड़े बनते थे कहेंगे, "यदि तुम न होते तो हम अवश्य ही ईमानवाले होते।"
قَالَ الَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا لِلَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُٓوا اَنَحْنُ صَدَدْنَاكُمْ عَنِ الْهُدٰى بَعْدَ اِذْ جَٓاءَكُمْ بَلْ كُنْتُمْ مُجْرِم۪ينَ32
वे लोग जो बड़े बनते थे उन लोगों से जो कमज़ोर समझे गए थे, कहेंगे, "क्या हमने तुम्हे उस मार्गदर्शन से रोका था, वह तुम्हारे पास आया था? नहीं, बल्कि तुम स्वयं ही अपराधी हो।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا بَلْ مَكْرُ الَّيْلِ وَالنَّهَارِ اِذْ تَاْمُرُونَنَٓا اَنْ نَكْفُرَ بِاللّٰهِ وَنَجْعَلَ لَهُٓ اَنْدَادًاۜ وَاَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَاَوُا الْعَذَابَۜ وَجَعَلْنَا الْاَغْلَالَ ف۪ٓي اَعْنَاقِ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ هَلْ يُجْزَوْنَ اِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ33
वे लोग कमज़ोर समझे गए थे बड़े बननेवालों से कहेंगे, "नहीं, बल्कि रात-दिन की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे कि हम अल्लाह के साथ कुफ़्र करें और दूसरों को उसका समकक्ष ठहराएँ।" जब वे यातना देखेंगे तो मन ही मन पछताएँगे और हम उन लोगों की गरदनों में जिन्होंने कुफ़्र की नीति अपनाई, तौक़ डाल देंगे। वे वही तो बदले में पाएँगे, जो वे करते रहे थे?
وَمَٓا اَرْسَلْنَا ف۪ي قَرْيَةٍ مِنْ نَذ۪يرٍ اِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَٓاۙ اِنَّا بِمَٓا اُرْسِلْتُمْ بِه۪ كَافِرُونَ34
हमने जिस बस्ती में भी कोई सचेतकर्ता भेजा तो वहाँ के सम्पन्न लोगों ने यही कहा कि "जो कुछ देकर तुम्हें भेजा गया है, हम तो उसको नहीं मानते।"
وَقَالُوا نَحْنُ اَكْثَرُ اَمْوَالًا وَاَوْلَادًاۙ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّب۪ينَ35
उन्होंने यह भी कहा कि "हम तो धन और संतान में तुमसे बढ़कर है और हम यातनाग्रस्त होनेवाले नहीं।"
قُلْ اِنَّ رَبّ۪ي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ۟36
कहो, "निस्संदेह मेरा रब जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसे चाहता है नपी-तुली देता है। किन्तु अधिकांश लोग जानते नहीं।"
وَمَٓا اَمْوَالُكُمْ وَلَٓا اَوْلَادُكُمْ بِالَّت۪ي تُقَرِّبُكُمْ عِنْدَنَا زُلْفٰٓى اِلَّا مَنْ اٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًاۘ فَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ جَزَٓاءُ الضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا وَهُمْ فِي الْغُرُفَاتِ اٰمِنُونَ37
वह चीज़ न तुम्हारे धन है और न तुम्हारी सन्तान, जो तुम्हें हमसे निकट कर दे। अलबता, जो कोई ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो ऐसे ही लोग है जिनके लिए उसका कई गुना बदला है, जो उन्होंने किया। और वे ऊपरी मंजिल के कक्षों में निश्चिन्तता-पूर्वक रहेंगे
وَالَّذ۪ينَ يَسْعَوْنَ ف۪ٓي اٰيَاتِنَا مُعَاجِز۪ينَ اُو۬لٰٓئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ38
रहे वे लोग जो हमारी आयतों को मात करने के लिए प्रयासरत है, वे लाकर यातनाग्रस्त किए जाएँगे
قُلْ اِنَّ رَبّ۪ي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ وَيَقْدِرُ لَهُۜ وَمَٓا اَنْفَقْتُمْ مِنْ شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُۚ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِق۪ينَ39
कह दो, "मेरा रब ही है जो अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है। और जो कुछ भी तुमने ख़र्च किया, उसकी जगह वह तुम्हें और देगा। वह सबसे अच्छा रोज़ी देनेवाला है।"
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَم۪يعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلٰٓئِكَةِ اَهٰٓؤُ۬لَٓاءِ اِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ40
याद करो जिस दिन वह उन सबको इकट्ठा करेगा, फिर फ़रिश्तों से कहेगा, "क्या तुम्ही को ये पूजते रहे है?"
قَالُوا سُبْحَانَكَ اَنْتَ وَلِيُّنَا مِنْ دُونِهِمْۚ بَلْ كَانُوا يَعْبُدُونَ الْجِنَّۚ اَكْثَرُهُمْ بِهِمْ مُؤْمِنُونَ41
वे कहेंगे, "महान है तू, हमारा निकटता का मधुर सम्बन्ध तो तुझी से है, उनसे नहीं; बल्कि बात यह है कि वे जिन्नों को पूजते थे। उनमें से अधिकतर उन्हीं पर ईमान रखते थे।"
فَالْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَفْعًا وَلَا ضَرًّاۜ وَنَقُولُ لِلَّذ۪ينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّت۪ي كُنْتُمْ بِهَا تُكَذِّبُونَ42
"अतः आज न तो तुम परस्पर एक-दूसरे के लाभ का अधिकार रखते हो और न हानि का।" और हम उन ज़ालिमों से कहेंगे, "अब उस आग की यातना का मज़ा चखो, जिसे तुम झुठलाते रहे हो।"
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هٰذَٓا اِلَّا رَجُلٌ يُر۪يدُ اَنْ يَصُدَّكُمْ عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ اٰبَٓاؤُ۬كُمْۚ وَقَالُوا مَا هٰذَٓا اِلَّٓا اِفْكٌ مُفْتَرًىۜ وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَٓاءَهُمْۙ اِنْ هٰذَٓا اِلَّا سِحْرٌ مُب۪ينٌ43
उन्हें जब हमारी स्पष्ट़ आयतें पढ़कर सुनाई जाती है तो वे कहते है, "यह तो बस ऐसा व्यक्ति है जो चाहता है कि तुम्हें उनसे रोक दें जिनको तुम्हारे बाप-दादा पूजते रहे है।" और कहते है, "यह तो एक घड़ा हुआ झूठ है।" जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने सत्य के विषय में, जबकि वह उनके पास आया, कह दिया, "यह तो बस एक प्रत्यक्ष जादू है।"
وَمَٓا اٰتَيْنَاهُمْ مِنْ كُتُبٍ يَدْرُسُونَهَا وَمَٓا اَرْسَلْنَٓا اِلَيْهِمْ قَبْلَكَ مِنْ نَذ۪يرٍۜ44
हमने उन्हें न तो किताबे दी थीं, जिनको वे पढ़ते हों और न तुमसे पहले उनकी ओर कोई सावधान करनेवाला ही भेजा था
وَكَذَّبَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۙ وَمَا بَلَغُوا مِعْشَارَ مَٓا اٰتَيْنَاهُمْ فَكَذَّبُوا رُسُل۪ي۠ فَكَيْفَ كَانَ نَك۪يرِ۟45
और झूठलाया उन लोगों ने भी जो उनसे पहले थे। और जो कुछ हमने उन्हें दिया था ये तो उसके दसवें भाग को भी नहीं पहुँचे है। तो उन्होंने मेरे रसूलों को झुठलाया। तो फिर कैसी रही मेरी यातना!
قُلْ اِنَّمَٓا اَعِظُكُمْ بِوَاحِدَةٍۚ اَنْ تَقُومُوا لِلّٰهِ مَثْنٰى وَفُرَادٰى ثُمَّ تَتَفَكَّرُوا۠ مَا بِصَاحِبِكُمْ مِنْ جِنَّةٍۜ اِنْ هُوَ اِلَّا نَذ۪يرٌ لَكُمْ بَيْنَ يَدَيْ عَذَابٍ شَد۪يدٍ46
कहो, "मैं तुम्हें बस एक बात की नसीहत करता हूँ कि अल्लाह के लिए दो-दो औऱ एक-एक करके उठ रखे हो; फिर विचार करो। तुम्हारे साथी को कोई उन्माद नहीं है। वह तो एक कठोर यातना से पहले तुम्हें सचेत करनेवाला ही है।"
قُلْ مَا سَاَلْتُكُمْ مِنْ اَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْۜ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلَى اللّٰهِۚ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَه۪يدٌ47
कहो, "मैं तुमसे कोई बदला नहीं माँगता वह तुम्हें ही मुबारक हो। मेरा बदला तो बस अल्लाह के ज़िम्मे है और वह हर चीज का साक्षी है।"
قُلْ اِنَّ رَبّ۪ي يَقْذِفُ بِالْحَقِّۚ عَلَّامُ الْغُيُوبِ48
कहो, "निश्चय ही मेरा रब सत्य को असत्य पर ग़ालिब करता है। वह परोक्ष की बातें भली-भाँथि जानता है।"
قُلْ جَٓاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُع۪يدُ49
कह दो, "सत्य आ गया (असत्य मिट गया) और असत्य न तो आरम्भ करता है और न पुनरावृत्ति ही।"
قُلْ اِنْ ضَلَلْتُ فَاِنَّمَٓا اَضِلُّ عَلٰى نَفْس۪يۚ وَاِنِ اهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوح۪ٓي اِلَيَّ رَبّ۪يۜ اِنَّهُ سَم۪يعٌ قَر۪يبٌ50
कहो, "यदि मैं पथभ्रष्ट॥ हो जाऊँ तो पथभ्रष्ट होकर मैं अपना ही बुरा करूँगा, और यदि मैं सीधे मार्ग पर हूँ, तो इसका कारण वह प्रकाशना है जो मेरा रब मेरी ओर करता है। निस्संदेह वह सब कुछ सुनता है, निकट है।"
وَلَوْ تَرٰٓى اِذْ فَزِعُوا فَلَا فَوْتَ وَاُخِذُوا مِنْ مَكَانٍ قَر۪يبٍۙ51
और यदि तुम देख लेते जब वे घबराए हुए होंगे; फिर बचकर भाग न सकेंगे और निकट स्थान ही से पकड़ लिए जाएँगे
وَقَالُٓوا اٰمَنَّا بِه۪ۚ وَاَنّٰى لَهُمُ التَّنَاوُشُ مِنْ مَكَانٍ بَع۪يدٍۚ52
और कहेंगे, "हम उसपर ईमान ले आए।" हालाँकि उनके लिए कहाँ सम्भव है कि इतने दूरस्थ स्थान से उसको पास सकें
وَقَدْ كَفَرُوا بِه۪ مِنْ قَبْلُۚ وَيَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ مِنْ مَكَانٍ بَع۪يدٍ53
इससे पहले तो उन्होंने उसका इनकार किया और दूरस्थ स्थान से बिन देखे तीर-तूक्के चलाते रहे
وَح۪يلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِاَشْيَاعِهِمْ مِنْ قَبْلُۜ اِنَّهُمْ كَانُوا ف۪ي شَكٍّ مُر۪يبٍ54
उनके और उनकी चाहतों के बीच रोक लगा दी जाएगी; जिस प्रकार इससे पहले उनके सहमार्गी लोगों के साथ मामला किया गया। निश्चय ही वे डाँवाडोल कर देनेवाले संदेह में पड़े रहे हैं