अज़-ज़ुमर - कुरान पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
تَنْز۪يلُ الْكِتَابِ مِنَ اللّٰهِ الْعَز۪يزِ الْحَك۪يمِ1
इस किताब का अवतरण अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी की ओर से है
اِنَّٓا اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ فَاعْبُدِ اللّٰهَ مُخْلِصًا لَهُ الدّ۪ينَۜ2
निस्संदेह हमने यह किताब तुम्हारी ओर सत्य के साथ अवतरित की है
اَلَا لِلّٰهِ الدّ۪ينُ الْخَالِصُۜ وَالَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَۢ مَا نَعْبُدُهُمْ اِلَّا لِيُقَرِّبُونَٓا اِلَى اللّٰهِ زُلْفٰىۜ اِنَّ اللّٰهَ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ ف۪ي مَا هُمْ ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْد۪ي مَنْ هُوَ كَاذِبٌ كَفَّارٌ3
जान रखो कि विशुद्ध धर्म अल्लाह ही के लिए है। रहे वे लोग जिन्होंने उससे हटकर दूसरे समर्थक औऱ संरक्षक बना रखे है (कहते है,) "हम तो उनकी बन्दगी इसी लिए करते है कि वे हमें अल्लाह का सामीप्य प्राप्त करा दें।" निश्चय ही अल्लाह उनके बीच उस बात का फ़ैसला कर देगा जिसमें वे विभेद कर रहे है। अल्लाह उसे मार्ग नहीं दिखाता जो झूठा और बड़ा अकृतज्ञ हो
لَوْ اَرَادَ اللّٰهُ اَنْ يَتَّخِذَ وَلَدًا لَاصْطَفٰى مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَٓاءُۙ سُبْحَانَهُۜ هُوَ اللّٰهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ4
यदि अल्लाह अपनी कोई सन्तान बनाना चाहता तो वह उसमें से, जिन्हें पैदा कर रहा है, चुन लेता। महान और उच्च है वह! वह अल्लाह है अकेला, सब पर क़ाबू रखनेवाला
خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّۚ يُكَوِّرُ الَّيْلَ عَلَى النَّهَارِ وَيُكَوِّرُ النَّهَارَ عَلَى الَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَۜ كُلٌّ يَجْر۪ي لِاَجَلٍ مُسَمًّىۜ اَلَا هُوَ الْعَز۪يزُ الْغَفَّارُ5
उसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया। रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है। और उसने सूर्य और चन्द्रमा को वशीभुत कर रखा है। प्रत्येक एक नियत समय को पूरा करने के लिए चल रहा है। जान रखो, वही प्रभुत्वशाली, बड़ा क्षमाशील है
خَلَقَكُمْ مِنْ نَفْسٍ وَاحِدَةٍ ثُمَّ جَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَاَنْزَلَ لَكُمْ مِنَ الْاَنْعَامِ ثَمَانِيَةَ اَزْوَاجٍۜ يَخْلُقُكُمْ ف۪ي بُطُونِ اُمَّهَاتِكُمْ خَلْقًا مِنْ بَعْدِ خَلْقٍ ف۪ي ظُلُمَاتٍ ثَلٰثٍۜ ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُۜ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ فَاَنّٰى تُصْرَفُونَ6
उसने तुम्हें अकेली जान पैदा किया; फिर उसी से उसका जोड़ा बनाया औऱ तुम्हारे लिए चौपायों में से आठ नर-मादा उतारे। वह तुम्हारी माँओं के पेटों में तीन अँधेरों के भीतर तुम्हें एक सृजनरूप के पश्चात अन्य एक सृजनरूप देता चला जाता है। वही अल्लाह तुम्हारा रब है। बादशाही उसी की है, उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। फिर तुम कहाँ फिरे जाते हो?
اِنْ تَكْفُرُوا فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ عَنْكُمْ وَلَا يَرْضٰى لِعِبَادِهِ الْكُفْرَۚ وَاِنْ تَشْكُرُوا يَرْضَهُ۬ لَكُمْۜ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ اُخْرٰىۜ ثُمَّ اِلٰى رَبِّكُمْ مَرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَۜ اِنَّهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ7
यदि तुम इनकार करोगे तो अल्लाह तुमसे निस्पृह है। यद्यपि वह अपने बन्दों के लिए इनकार को पसन्द नहीं करता, किन्तु यदि तुम कृतज्ञता दिखाओगे, तो उसे वह तुम्हारे लिए पसन्द करता है। कोई बोझ न उठाएगा। फिर तुम्हारी वापसी अपने रब ही की ओर है। और वह तुम्हे बता देगा, जो कुछ तुम करते रहे होगे। निश्चय ही वह सीनों तक की बातें जानता है
وَاِذَا مَسَّ الْاِنْسَانَ ضُرٌّ دَعَا رَبَّهُ مُن۪يبًا اِلَيْهِ ثُمَّ اِذَا خَوَّلَهُ نِعْمَةً مِنْهُ نَسِيَ مَا كَانَ يَدْعُٓوا اِلَيْهِ مِنْ قَبْلُ وَجَعَلَ لِلّٰهِ اَنْدَادًا لِيُضِلَّ عَنْ سَب۪يلِه۪ۜ قُلْ تَمَتَّعْ بِكُفْرِكَ قَل۪يلًاۗ اِنَّكَ مِنْ اَصْحَابِ النَّارِ8
जब मनुष्य को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वह अपने रब को उसी की ओर रुजू होकर पुकारने लगता है, फिर जब वह उसपर अपनी अनुकम्पा करता है, तो वह उस चीज़ को भूल जाता है जिसके लिए पहले पुकार रहा था और (दूसरो को) अल्लाह के समकक्ष ठहराने लगता है, ताकि इसके परिणामस्वरूप वह उसकी राह से भटका दे। कह दो, "अपने इनकार का थोड़ा मज़ा ले लो। निस्संदेह तुम आगवालों में से हो।"
اَمَّنْ هُوَ قَانِتٌ اٰنَٓاءَ الَّيْلِ سَاجِدًا وَقَٓائِمًا يَحْذَرُ الْاٰخِرَةَ وَيَرْجُوا رَحْمَةَ رَبِّه۪ۜ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الَّذ۪ينَ يَعْلَمُونَ وَالَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَۜ اِنَّمَا يَتَذَكَّرُ اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ۟9
(क्या उक्त व्यक्ति अच्छा है) या वह व्यक्ति जो रात की घड़ियों में सजदा करता और खड़ा रहता है, आख़िरत से डरता है और अपने रब की दयालुता की आशा रखता हुआ विनयशीलता के साथ बन्दगी में लगा रहता है? कहो, "क्या वे लोग जो जानते है और वे लोग जो नहीं जानते दोनों समान होंगे? शिक्षा तो बुद्धि और समझवाले ही ग्रहण करते है।"
قُلْ يَا عِبَادِ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّقُوا رَبَّكُمْۜ لِلَّذ۪ينَ اَحْسَنُوا ف۪ي هٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌۜ وَاَرْضُ اللّٰهِ وَاسِعَةٌۜ اِنَّمَا يُوَفَّى الصَّابِرُونَ اَجْرَهُمْ بِغَيْرِ حِسَابٍ10
कह दो कि "ऐ मेरे बन्दो, जो ईमान लाए हो! अपने रब का डर रखो। जिन लोगों ने अच्छा कर दिखाया उनके लिए इस संसार में अच्छाई है, और अल्लाह की धरती विस्तृत है। जमे रहनेवालों को तो उनका बदला बेहिसाब मिलकर रहेगा।"
قُلْ اِنّ۪ٓي اُمِرْتُ اَنْ اَعْبُدَ اللّٰهَ مُخْلِصًا لَهُ الدّ۪ينَۙ11
कह दो, "मुझे तो आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह की बन्दगी करूँ, धर्म (भक्तिभाव एवं निष्ठान) को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए
وَاُمِرْتُ لِاَنْ اَكُونَ اَوَّلَ الْمُسْلِم۪ينَ12
और मुझे आदेश दिया गया है कि सबसे बढ़कर मैं स्वयं आज्ञाकारी बनूँ।"
قُلْ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اِنْ عَصَيْتُ رَبّ۪ي عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ13
कहो, "यदि मैं अपने रब की अवज्ञा करूँ तो मुझे एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
قُلِ اللّٰهَ اَعْبُدُ مُخْلِصًا لَهُ د۪ين۪يۙ14
कहो, "मैं तो अल्लाह ही की बन्दगी करता हूँ, अपने धर्म को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए
فَاعْبُدُوا مَا شِئْتُمْ مِنْ دُونِه۪ۜ قُلْ اِنَّ الْخَاسِر۪ينَ الَّذ۪ينَ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ وَاَهْل۪يهِمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اَلَا ذٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُب۪ينُ15
अब तुम उससे हटकर जिसकी चाहो बन्दगी करो।" कह दो, "वास्तव में घाटे में पड़नेवाले तो वही है, जिन्होंने अपने आपको और अपने लोगों को क़ियामत के दिन घाटे में डाल दिया। जान रखो, यही खुला घाटा है
لَهُمْ مِنْ فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِنَ النَّارِ وَمِنْ تَحْتِهِمْ ظُلَلٌۜ ذٰلِكَ يُخَوِّفُ اللّٰهُ بِه۪ عِبَادَهُۜ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ16
उनके लिए उनके ऊपर से भी आग की छतरियाँ होंगी और उनके नीचे से भी छतरियाँ होंगी। यही वह चीज़ है, जिससे अल्लाह अपने बन्दों को डराता है, "ऐ मेरे बन्दो! अतः तुम मेरा डर रखो।"
وَالَّذ۪ينَ اجْتَنَبُوا الطَّاغُوتَ اَنْ يَعْبُدُوهَا وَاَنَابُٓوا اِلَى اللّٰهِ لَهُمُ الْبُشْرٰىۚ فَبَشِّرْ عِبَادِۙ17
रहे वे लोग जो इससे बचे कि वे ताग़ूत (बढ़े हुए फ़सादी) की बन्दगी करते है और अल्लाह की ओर रुजू हुए, उनके लिए शुभ सूचना है।
اَلَّذ۪ينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ اَحْسَنَهُۜ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ هَدٰيهُمُ اللّٰهُ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمْ اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ18
अतः मेरे उन बन्दों को शुभ सूचना दे दो जो बात को ध्यान से सुनते है; फिर उस अच्छी से अच्छी बात का अनुपालन करते है। वही हैं, जिन्हें अल्लाह ने मार्ग दिखाया है और वही बुद्धि और समझवाले है
اَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ الْعَذَابِۜ اَفَاَنْتَ تُنْقِذُ مَنْ فِي النَّارِۚ19
तो क्या वह व्यक्ति जिसपर यातना की बात सत्यापित हो चुकी है (यातना से बच सकता है)? तो क्या तुम छुड़ा लोगे उसको जो आग में है
لٰكِنِ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ غُرَفٌ مِنْ فَوْقِهَا غُرَفٌ مَبْنِيَّةٌۙ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۜ وَعْدَ اللّٰهِۜ لَا يُخْلِفُ اللّٰهُ الْم۪يعَادَ20
अलबत्ता जो लोग अपने रब से डरकर रहे उनके लिए ऊपरी मंज़िल पर कक्ष होंगे, जिनके ऊपर भी निर्मित कक्ष होंगे। उनके नीचे नहरें बह रही होगी। यह अल्लाह का वादा है। अल्लाह अपने वादे का उल्लंघन नहीं करता
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَسَلَكَهُ يَنَاب۪يعَ فِي الْاَرْضِ ثُمَّ يُخْرِجُ بِه۪ زَرْعًا مُخْتَلِفًا اَلْوَانُهُ ثُمَّ يَه۪يجُ فَتَرٰيهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَجْعَلُهُ حُطَامًاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَذِكْرٰى لِاُو۬لِي الْاَلْبَابِ۟21
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से पानी उतारा, फिर धरती में उसके स्रोत प्रवाहित कर दिए; फिर उसने द्वारा खेती निकालता है, जिसके विभिन्न रंग होते है; फिर वह सूखने लगती है; फिर तुम देखते हो कि वह पीली पड़ गई; फिर वह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है? निस्संदेह इसमें बुद्धि और समझवालों के लिए बड़ी याददिहानी है
اَفَمَنْ شَرَحَ اللّٰهُ صَدْرَهُ لِلْاِسْلَامِ فَهُوَ عَلٰى نُورٍ مِنْ رَبِّه۪ۜ فَوَيْلٌ لِلْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ مِنْ ذِكْرِ اللّٰهِۜ اُو۬لٰٓئِكَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ22
अब क्या वह व्यक्ति जिसका सीना (हृदय) अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया, अतः वह अपने रब की ओर से प्रकाश पर है, (उस व्यक्ति के समान होगा जो कठोर हृदय और अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल है)? अतः तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दि कठोर हो चुके है, अल्लाह की याद से ख़ाली होकर! वही खुली गुमराही में पड़े हुए है
اَللّٰهُ نَزَّلَ اَحْسَنَ الْحَد۪يثِ كِتَابًا مُتَشَابِهًا مَثَانِيَۗ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ جُلُودُ الَّذ۪ينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْۚ ثُمَّ تَل۪ينُ جُلُودُهُمْ وَقُلُوبُهُمْ اِلٰى ذِكْرِ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ هُدَى اللّٰهِ يَهْد۪ي بِه۪ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ23
अल्लाह ने सर्वोत्तम वाणी अवतरित की, एक ऐसी किताब जिसके सभी भाग परस्पर मिलते-जुलते है, जो रुख़ फेर देनेवाली (क्रांतिकारी) है। उससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है जो अपने रब से डरते है। फिर उनकी खालें (शरीर) और उनके दिल नर्म होकर अल्लाह की याद की ओर झुक जाते है। वह अल्लाह का मार्गदर्शन है, उसके द्वारा वह सीधे मार्ग पर ले आता है, जिसे चाहता है। और जिसको अल्लाह पथभ्रष्ट रहने दे, फिर उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं
اَفَمَنْ يَتَّق۪ي بِوَجْهِه۪ سُٓوءَ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَق۪يلَ لِلظَّالِم۪ينَ ذُوقُوا مَا كُنْتُمْ تَكْسِبُونَ24
अब क्या जो क़ियामत के दिन अपने चहरें को बुरी यातना (से बचने) की ढाल बनाएगा वह (यातना से सुरक्षित लोगों जैसा होगा)? और ज़ालिमों से कहा जाएगा, "चखों मज़ा उस कमाई का, जो तुम करते रहे थे!"
كَذَّبَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَاَتٰيهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ25
जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी झूठलाया। अन्ततः उनपर वहाँ से यातना आ पहुँची, जिसका उन्हें कोई पता न था
فَاَذَاقَهُمُ اللّٰهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۚ وَلَعَذَابُ الْاٰخِرَةِ اَكْبَرُۢ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ26
फिर अल्लाह ने उन्हें सांसारिक जीवन में भी रुसवाई का मज़ा चखाया और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश! वे जानते
وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ ف۪ي هٰذَا الْقُرْاٰنِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَۚ27
हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार की मिसालें पेश कर दी हैं, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें
قُرْاٰنًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذ۪ي عِوَجٍ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ28
एक अरबी क़ुरआन के रूप में, जिसमें कोई टेढ़ नहीं, ताकि वे धर्मपरायणता अपनाएँ
ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا رَجُلًا ف۪يهِ شُرَكَٓاءُ مُتَشَاكِسُونَ وَرَجُلًا سَلَمًا لِرَجُلٍۜ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًاۜ اَلْحَمْدُ لِلّٰهِۚ بَلْ اَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ29
अल्लाह एक मिसाल पेश करता है कि एक व्यक्ति है, जिसके मालिक होने में कई क्यक्ति साक्षी है, आपस में खींचातानी करनेवाले, और एक क्यक्ति वह है जो पूरा का पूरा एक ही व्यक्ति का है। क्या दोनों का हाल एक जैसा होगा? सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, किन्तु उनमें से अधिकांश लोग नहीं जानते
اِنَّكَ مَيِّتٌ وَاِنَّهُمْ مَيِّتُونَۘ30
तुम्हें भी मरना है और उन्हें भी मरना है
ثُمَّ اِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ عِنْدَ رَبِّكُمْ تَخْتَصِمُونَ۟31
फिर निश्चय ही तुम सब क़ियामत के दिन अपने रब के समक्ष झगड़ोगे
فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ كَذَبَ عَلَى اللّٰهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدْقِ اِذْ جَٓاءَهُۜ اَلَيْسَ ف۪ي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِلْكَافِر۪ينَ32
फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जिसने झूठ घड़कर अल्लाह पर थोपा और सत्य को झूठला दिया जब वह उसके पास आया। क्या जहन्नम में इनकार करनेवालों का ठिकाना नहीं हैं?
وَالَّذ۪ي جَٓاءَ بِالصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِه۪ٓ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ33
और जो व्यक्ति सच्चाई लेकर आया और उसने उसकी पुष्टि की, ऐसे ही लोग डर रखते है
لَهُمْ مَا يَشَٓاؤُ۫نَ عِنْدَ رَبِّهِمْۜ ذٰلِكَ جَزٰٓؤُا الْمُحْسِن۪ينَۚ34
उनके लिए उनके रब के पास वह सब कुछ है, जो वे चाहेंगे। यह है उत्तमकारों का बदला
لِيُكَفِّرَ اللّٰهُ عَنْهُمْ اَسْوَاَ الَّذ۪ي عَمِلُوا وَيَجْزِيَهُمْ اَجْرَهُمْ بِاَحْسَنِ الَّذ۪ي كَانُوا يَعْمَلُونَ35
ताकि जो निकृष्टतम कर्म उन्होंने किए अल्लाह उन (के बुरे प्रभाव) को उनसे दूर कर दे। औऱ जो उत्तम कर्म वे करते रहे उसका उन्हें बदला प्रदान करे
اَلَيْسَ اللّٰهُ بِكَافٍ عَبْدَهُۜ وَيُخَوِّفُونَكَ بِالَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍۚ36
क्या अल्लाह अपने बन्दे के लिए काफ़ी नहीं है, यद्यपि वे तुम्हें उनसे डराते है, जो उसके सिवा (उन्होंने अपने सहायक बना रखे) है? अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नही
وَمَنْ يَهْدِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ مُضِلٍّۜ اَلَيْسَ اللّٰهُ بِعَز۪يزٍ ذِي انْتِقَامٍ37
और जिसे अल्लाह मार्ग दिखाए उसे गुमराह करनेवाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेनेवाला नहीं है?
وَلَئِنْ سَاَلْتَهُمْ مَنْ خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللّٰهُۜ قُلْ اَفَرَاَيْتُمْ مَا تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اِنْ اَرَادَنِيَ اللّٰهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَاشِفَاتُ ضُرِّه۪ٓ اَوْ اَرَادَن۪ي بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَاتُ رَحْمَتِه۪ۜ قُلْ حَسْبِيَ اللّٰهُۜ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُونَ38
यदि तुम उनसे पूछो कि "आकाशों और धरती को किसने पैदा किया?" को वे अवश्य कहेंगे, "अल्लाह ने।" कहो, "तुम्हारा क्या विचार है? यदि अल्लाह मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचानी चाहे तो क्या अल्लाह से हटकर जिनको तुम पुकारते हो वे उसकी पहुँचाई हुई तकलीफ़ को दूर कर सकते है? या वह मुझपर कोई दयालुता दर्शानी चाहे तो क्या वे उसकी दयालुता को रोक सकते है?" कह दो, "मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। भरोसा करनेवाले उसी पर भरोसा करते है।"
قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلٰى مَكَانَتِكُمْ اِنّ۪ي عَامِلٌۚ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۙ39
कह दो, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह काम करो। मैं (अपनी जगह) काम करता हूँ। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे
مَنْ يَاْت۪يهِ عَذَابٌ يُخْز۪يهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُق۪يمٌ40
कि किस पर वह यातना आती है जो उसे रुसवा कर देगी और किसपर अटल यातना उतरती है।"
اِنَّٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ لِلنَّاسِ بِالْحَقِّۚ فَمَنِ اهْتَدٰى فَلِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ ضَلَّ فَاِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَاۚ وَمَٓا اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِوَك۪يلٍ۟41
निश्चय ही हमने लोगों के लिए हक़ के साथ तुमपर किताब अवतरित की है। अतः जिसने सीधा मार्ग ग्रहण किया तो अपने ही लिए, और जो भटका, तो वह भटककर अपने ही को हानि पहुँचाता है। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो
اَللّٰهُ يَتَوَفَّى الْاَنْفُسَ ح۪ينَ مَوْتِهَا وَالَّت۪ي لَمْ تَمُتْ ف۪ي مَنَامِهَاۚ فَيُمْسِكُ الَّت۪ي قَضٰى عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَيُرْسِلُ الْاُخْرٰٓى اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّىۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ42
अल्लाह ही प्राणों को उनकी मृत्यु के समय ग्रस्त कर लेता है और जिसकी मृत्यु नहीं आई उसे उसकी निद्रा की अवस्था में (ग्रस्त कर लेता है) । फिर जिसकी मृत्यु का फ़ैसला कर दिया है उसे रोक रखता है। और दूसरों को एक नियत समय तक के लिए छोड़ देता है। निश्चय ही इसमें कितनी ही निशानियाँ है सोच-विचार करनेवालों के लिए
اَمِ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ شُفَعَٓاءَۜ قُلْ اَوَلَوْ كَانُوا لَا يَمْلِكُونَ شَيْـًٔا وَلَا يَعْقِلُونَ43
(क्या उनके उपास्य प्रभुता में साझीदार है) या उन्होंने अल्लाह से हटकर दूसरों को सिफ़ारिशी बना रखा है? कहो, "क्या यद्यपि वे किसी चीज़ का अधिकार न रखते हों और न कुछ समझते ही हो तब भी?"
قُلْ لِلّٰهِ الشَّفَاعَةُ جَم۪يعًاۜ لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ ثُمَّ اِلَيْهِ تُرْجَعُونَ44
कहो, "सिफ़ारिश तो सारी की सारी अल्लाह के अधिकार में है। आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।"
وَاِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَحْدَهُ اشْمَاَزَّتْ قُلُوبُ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِۚ وَاِذَا ذُكِرَ الَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ٓ اِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ45
अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल भिंचने लगते है, किन्तु जब उसके सिवा दूसरों का ज़िक्र होता है तो क्या देखते है कि वे खुशी से खिले जा रहे है
قُلِ اللّٰهُمَّ فَاطِرَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ اَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ46
कहो, "ऐ अल्लाह, आकाशो और धरती को पैदा करनेवाले; परोक्ष और प्रत्यक्ष के जाननेवाले! तू ही अपने बन्दों के बीच उस चीज़ का फ़ैसला करेगा, जिसमें वे विभेद कर रहे है।"
وَلَوْ اَنَّ لِلَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لَافْتَدَوْا بِه۪ مِنْ سُٓوءِ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَبَدَا لَهُمْ مِنَ اللّٰهِ مَا لَمْ يَكُونُوا يَحْتَسِبُونَ47
जिन लोगों ने ज़ुल्म किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उसके साथ उतना ही और भी, तो वे क़ियामत के दिन बुरी यातना से बचने के लिए वह सब फ़िदया (प्राण-मुक्ति के बदले) में दे डाले। बात यह है कि अल्लाह की ओर से उनके सामने वह कुछ आ जाएगा जिसका वे गुमान तक न करते थे
وَبَدَا لَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُوا وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ48
और जो कुछ उन्होंने कमाया उसकी बुराइयाँ उनपर प्रकट हो जाएँगी। और वही चीज़ उन्हें घेर लेगी जिसकी वे हँसी उड़ाया करते थे
فَاِذَا مَسَّ الْاِنْسَانَ ضُرٌّ دَعَانَاۘ ثُمَّ اِذَا خَوَّلْنَاهُ نِعْمَةً مِنَّاۙ قَالَ اِنَّمَٓا اُو۫ت۪يتُهُ عَلٰى عِلْمٍۜ بَلْ هِيَ فِتْنَةٌ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ49
अतः जब मनुष्य को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वह हमें पुकारने लगता है, फिर जब हमारी ओर से उसपर कोई अनुकम्पा होती है तो कहता है, "यह तो मुझे ज्ञान के कारण प्राप्त हुआ।" नहीं, बल्कि यह तो एक परीक्षा है, किन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं
قَدْ قَالَهَا الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ50
यही बात वे लोग भी कह चुके है, जो उनसे पहले गुज़रे है। किन्तु जो कुछ कमाई वे करते है, वह उनके कुछ काम न आई
فَاَصَابَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواۜ وَالَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مِنْ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ سَيُص۪يبُهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواۙ وَمَا هُمْ بِمُعْجِز۪ينَ51
फिर जो कुछ उन्होंने कमाया, उसकी बुराइयाँ उनपर आ पड़ी और इनमें से भी जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उनपर भी जो कुछ उन्होंने कमाया उसकी बुराइयाँ जल्द ही आ पड़ेगी। और वे काबू से बाहर निकलनेवाले नहीं
اَوَلَمْ يَعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ۟52
क्या उन्हें मालूम नहीं कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है? निस्संदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ है जो ईमान लाएँ
قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذ۪ينَ اَسْرَفُوا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِنْ رَحْمَةِ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ جَم۪يعًاۜ اِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُ53
कह दो, "ऐ मेरे बन्दो, जिन्होंने अपने आप पर ज्यादती की है, अल्लाह की दयालुता से निराश न हो। निस्संदेह अल्लाह सारे ही गुनाहों का क्षमा कर देता है। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
وَاَن۪يبُٓوا اِلٰى رَبِّكُمْ وَاَسْلِمُوا لَهُ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَاْتِيَكُمُ الْعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنْصَرُونَ54
रुजू हो अपने रब की ओर और उसके आज्ञाकारी बन जाओ, इससे पहले कि तुमपर यातना आ जाए। फिर तुम्हारी सहायता न की जाएगी
وَاتَّبِعُٓوا اَحْسَنَ مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَاْتِيَكُمُ الْعَذَابُ بَغْتَةً وَاَنْتُمْ لَا تَشْعُرُونَۙ55
और अनुसर्ण करो उस सर्वोत्तम चीज़ का जो तुम्हारे रब की ओर से अवतरित हुई है, इससे पहले कि तुम पर अचानक यातना आ जाए और तुम्हें पता भी न हो।"
اَنْ تَقُولَ نَفْسٌ يَا حَسْرَتٰى عَلٰى مَا فَرَّطْتُ ف۪ي جَنْبِ اللّٰهِ وَاِنْ كُنْتُ لَمِنَ السَّاخِر۪ينَۙ56
कहीं ऐसा न हो कि कोई व्यक्ति कहने लगे, "हाय, अफ़सोस उसपर! जो कोताही अल्लाह के हक़ में मैंने की। और मैं तो परिहास करनेवालों मं ही सम्मिलित रहा।"
اَوْ تَقُولَ لَوْ اَنَّ اللّٰهَ هَدٰين۪ي لَكُنْتُ مِنَ الْمُتَّق۪ينَۙ57
या, कहने लगे कि "यदि अल्लाह मुझे मार्ग दिखाता तो अवश्य ही मैं डर रखनेवालों में से होता।"
اَوْ تَقُولَ ح۪ينَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ اَنَّ ل۪ي كَرَّةً فَاَكُونَ مِنَ الْمُحْسِن۪ينَ58
या, जब वह यातना देखे तो कहने लगे, "काश! मुझे एक बार फिर लौटकर जाना हो, तो मैं उत्तमकारों में सम्मिलित हो जाऊँ।"
بَلٰى قَدْ جَٓاءَتْكَ اٰيَات۪ي فَكَذَّبْتَ بِهَا وَاسْتَكْبَرْتَ وَكُنْتَ مِنَ الْكَافِر۪ينَ59
"क्यों नहीं, मेरी आयतें तेरे पास आ चुकी थीं, किन्तु तूने उनको झूठलाया और घमंड किया और इनकार करनेवालों में सम्मिलित रहा
وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِ تَرَى الَّذ۪ينَ كَذَبُوا عَلَى اللّٰهِ وُجُوهُهُمْ مُسْوَدَّةٌۜ اَلَيْسَ ف۪ي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِلْمُتَكَبِّر۪ينَ60
और क़ियामत के दिन तुम उन लोगों को देखोगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ घड़कर थोपा है कि उनके चेहरे स्याह है। क्या अहंकारियों का ठिकाना जहन्नम में नहीं हैं?"
وَيُنَجِّي اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا بِمَفَازَتِهِمْۘ لَا يَمَسُّهُمُ السُّٓوءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ61
इसके विपरीत अल्लाह उन लोगों को जिन्होंने डर रखा उन्हें उनकी सफलता के साथ मुक्ति प्रदान करेगा। न तो उन्हें कोई अनिष्ट् छू सकेगा और न वे शोकाकुल होंगे
اَللّٰهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍۘ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ وَك۪يلٌ62
अल्लाह हर चीज़ का स्रष्टा है और वही हर चीज़ का ज़िम्मा लेता है
لَهُ مَقَال۪يدُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ۟63
उसी के पास आकाशों और धरती की कुँजियाँ है। और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही है जो घाटे में है
قُلْ اَفَغَيْرَ اللّٰهِ تَاْمُرُٓونّ۪ٓي اَعْبُدُ اَيُّهَا الْجَاهِلُونَ64
कहो, "क्या फिर भी तुम मुझसे कहते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की बन्दगी करूँ, ऐ अज्ञानियों?"
وَلَقَدْ اُو۫حِيَ اِلَيْكَ وَاِلَى الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكَۚ لَئِنْ اَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ65
तुम्हारी ओर और जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनकी ओर भी वह्यस की जा चुकी है कि "यदि तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा किया-धरा अनिवार्यतः अकारथ जाएगा और तुम अवश्य ही घाटे में पड़नेवालों में से हो जाओगे।"
بَلِ اللّٰهَ فَاعْبُدْ وَكُنْ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ66
नहीं, बल्कि अल्लाह ही की बन्दगी करो और कृतज्ञता दिखानेवालों में से हो जाओ
وَمَا قَدَرُوا اللّٰهَ حَقَّ قَدْرِه۪ۗ وَالْاَرْضُ جَم۪يعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَالسَّمٰوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَم۪ينِه۪ۜ سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ67
उन्होंने अल्लाह की क़द्र न जानी, जैसी क़द्र उसकी जाननी चाहिए थी। हालाँकि क़ियामत के दिन सारी की सारी धरती उसकी मुट्ठी में होगी और आकाश उसके दाएँ हाथ में लिपटे हुए होंगे। महान और उच्च है वह उससे, जो वे साझी ठहराते है
وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَمَنْ فِي الْاَرْضِ اِلَّا مَنْ شَٓاءَ اللّٰهُۚ ثُمَّ نُفِخَ ف۪يهِ اُخْرٰى فَاِذَا هُمْ قِيَامٌ يَنْظُرُونَ68
और सूर (नरसिंघा) फूँका जाएगा, तो जो कोई आकाशों और जो कोई धरती में होगा वह अचेत हो जाएगा सिवाय उसके जिसको अल्लाह चाहे। फिर उसे दूबारा फूँका जाएगा, तो क्या देखेगे कि सहसा वे खड़े देख रहे है
وَاَشْرَقَتِ الْاَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ الْكِتَابُ وَج۪ٓيءَ بِالنَّبِيّ۪نَ وَالشُّهَدَٓاءِ وَقُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ69
और धरती रब के प्रकाश से जगमगा उठेगी, और किताब रखी जाएगी और नबियों और गवाहों को लाया जाएगा और लोगों के बीच हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उनपर कोई ज़ुल्म न होगा
وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَا عَمِلَتْ وَهُوَ اَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ۟70
और प्रत्येक व्यक्ति को उसका किया भरपूर दिया जाएगा। और वह भली-भाँति जानता है, जो कुछ वे करते है
وَس۪يقَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اِلٰى جَهَنَّمَ زُمَرًاۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاؤُ۫هَا فُتِحَتْ اَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَٓا اَلَمْ يَاْتِكُمْ رُسُلٌ مِنْكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ اٰيَاتِ رَبِّكُمْ وَيُنْذِرُونَكُمْ لِقَٓاءَ يَوْمِكُمْ هٰذَاۜ قَالُوا بَلٰى وَلٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ الْعَذَابِ عَلَى الْكَافِر۪ينَ71
जिन लोगों ने इनकार किया, वे गिरोह के गिरोह जहन्नम की ओर ले जाए जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेगे तो उसके द्वार खोल दिए जाएँगे और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, "क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे जो तुम्हें तुम्हारे रब की आयतें सुनाते रहे हों और तुम्हें इस दिन की मुलाक़ात से सचेत करते रहे हों?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं (वे तो आए थे) ।" किन्तु इनकार करनेवालों पर यातना की बात सत्यापित होकर रही
ق۪يلَ ادْخُلُٓوا اَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۚ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّر۪ينَ72
कहा जाएगा, "जहन्नम के द्वारों में प्रवेश करो। उसमें सदैव रहने के लिए।" तो बहुत ही बुरा ठिकाना है अहंकारियों का!
وَس۪يقَ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ اِلَى الْجَنَّةِ زُمَرًاۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاؤُ۫هَا وَفُتِحَتْ اَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا سَلَامٌ عَلَيْكُمْ طِبْتُمْ فَادْخُلُوهَا خَالِد۪ينَ73
और जो लोग अपने रब का डर रखते थे, वे गिरोह के गिरोह जन्नत की ओर ले जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेंगे इस हाल में कि उसके द्वार खुले होंगे। और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, "सलाम हो तुमपर! बहुत अच्छे रहे! अतः इसमें प्रवेश करो सदैव रहने के लिए तो (उनकी ख़ुशियों का क्या हाल होगा!)
وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي صَدَقَنَا وَعْدَهُ وَاَوْرَثَنَا الْاَرْضَ نَتَبَوَّاُ مِنَ الْجَنَّةِ حَيْثُ نَشَٓاءُۚ فَنِعْمَ اَجْرُ الْعَامِل۪ينَ74
और वे कहेंगे, "प्रशंसा अल्लाह के लिए, जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया, और हमें इस भूमि का वारिस बनाया कि हम जन्नत में जहाँ चाहें वहाँ रहें-बसे।" अतः क्या ही अच्छा प्रतिदान है कर्म करनेवालों का!-
وَتَرَى الْمَلٰٓئِكَةَ حَٓافّ۪ينَ مِنْ حَوْلِ الْعَرْشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْۚ وَقُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْحَقِّ وَق۪يلَ الْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ75
और तुम फ़रिश्तों को देखोगे कि वे सिंहासन के गिर्द घेरा बाँधे हुए, अपने रब का गुणगान कर रहे है। और लोगों के बीच ठीक-ठीक फ़ैसला कर दिया जाएगा और कहा जाएगा, "सारी प्रशंसा अल्लाह, सारे संसार के रब, के लिए है।"