अल-क़मर - कुरान पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اِقْتَرَبَتِ السَّاعَةُ وَانْشَقَّ الْقَمَرُ1
वह घड़ी निकट और लगी और चाँद फट गया;
وَاِنْ يَرَوْا اٰيَةً يُعْرِضُوا وَيَقُولُوا سِحْرٌ مُسْتَمِرٌّ2
किन्तु हाल यह है कि यदि वे कोई निशानी देख भी लें तो टाल जाएँगे और कहेंगे, "यह तो जादू है, पहले से चला आ रहा है!"
وَكَذَّبُوا وَاتَّبَعُٓوا اَهْوَٓاءَهُمْ وَكُلُّ اَمْرٍ مُسْتَقِرٌّ3
उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का अनुसरण किया; किन्तु हर मामले के लिए एक नियत अवधि है।
وَلَقَدْ جَٓاءَهُمْ مِنَ الْاَنْبَٓاءِ مَا ف۪يهِ مُزْدَجَرٌۙ4
उनके पास अतीत को ऐसी खबरें आ चुकी है, जिनमें ताड़ना अर्थात पूर्णतः तत्वदर्शीता है।
حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ فَمَا تُغْنِ النُّذُرُۙ5
किन्तु चेतावनियाँ उनके कुछ काम नहीं आ रही है! -
فَتَوَلَّ عَنْهُمْۢ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ اِلٰى شَيْءٍ نُكُرٍۙ6
अतः उनसे रुख़ फेर लो - जिस दिन पुकारनेवाला एक अत्यन्त अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा;
خُشَّعًا اَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْاَجْدَاثِ كَاَنَّهُمْ جَرَادٌ مُنْتَشِرٌۙ7
वे अपनी झुकी हुई निगाहों के साथ अपनी क्रबों से निकल रहे होंगे, मानो वे बिखरी हुई टिड्डियाँ है;
مُهْطِع۪ينَ اِلَى الدَّاعِۜ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ8
दौड़ पड़ने को पुकारनेवाले की ओर। इनकार करनेवाले कहेंगे, "यह तो एक कठिन दिन है!"
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ9
उनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया। उन्होंने हमारे बन्दे को झूठा ठहराया और कहा, "यह तो दीवाना है!" और वह बुरी तरह झिड़का गया
فَدَعَا رَبَّهُٓ اَنّ۪ي مَغْلُوبٌ فَانْتَصِرْ10
अन्त में उसने अपने रब को पुकारा कि "मैं दबा हुआ हूँ। अब तू बदला ले।"
فَفَتَحْنَٓا اَبْوَابَ السَّمَٓاءِ بِمَٓاءٍ مُنْهَمِرٍۘ11
तब हमने मूसलाधार बरसते हुए पानी से आकाश के द्वार खोल दिए;
وَفَجَّرْنَا الْاَرْضَ عُيُونًا فَالْتَقَى الْمَٓاءُ عَلٰٓى اَمْرٍ قَدْ قُدِرَۚ12
और धरती को प्रवाहित स्रोतों में परिवर्तित कर दिया, और सारा पानी उस काम के लिए मिल गया जो नियत हो चुका था
وَحَمَلْنَاهُ عَلٰى ذَاتِ اَلْوَاحٍ وَدُسُرٍۙ13
और हमने उसे एक तख़्तों और कीलोंवाली (नौका) पर सवार किया,
تَجْر۪ي بِاَعْيُنِنَاۚ جَزَٓاءً لِمَنْ كَانَ كُفِرَ14
जो हमारी निगाहों के सामने चल रही थी - यह बदला था उस व्यक्ति के लिए जिसकी क़द्र नहीं की गई।
وَلَقَدْ تَرَكْنَاهَٓا اٰيَةً فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ15
हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ दिया; फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
فَكَيْفَ كَانَ عَذَاب۪ي وَنُذُرِ16
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْاٰنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ17
और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत करनेवाला?
كَذَّبَتْ عَادٌ فَكَيْفَ كَانَ عَذَاب۪ي وَنُذُرِ18
आद ने भी झुठलाया, फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरा डराना?
اِنَّٓا اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ ر۪يحًا صَرْصَرًا ف۪ي يَوْمِ نَحْسٍ مُسْتَمِرٍّۙ19
निश्चय ही हमने एक निरन्तर अशुभ दिन में तेज़ प्रचंड ठंडी हवा भेजी, उसे उनपर मुसल्लत कर दिया, तो वह लोगों को उखाड़ फेंक रही थी
تَنْزِعُ النَّاسَۙ كَاَنَّهُمْ اَعْجَازُ نَخْلٍ مُنْقَعِرٍ20
मानो वे उखड़े खजूर के तने हो
فَكَيْفَ كَانَ عَذَاب۪ي وَنُذُرِ21
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْاٰنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ۟22
और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِالنُّذُرِ23
समूद ने चेतावनियों को झुठलाया;
فَقَالُٓوا اَبَشَرًا مِنَّا وَاحِدًا نَتَّبِعُهُٓۙ اِنَّٓا اِذًا لَف۪ي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ24
और कहने लगे, "एक अकेला आदमी, जो हम ही में से है, क्या हम उसके पीछे चलेंगे? तब तो वास्तव में हम गुमराही और दीवानापन में पड़ गए!
ءَاُلْقِيَ الذِّكْرُ عَلَيْهِ مِنْ بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ اَشِرٌ25
"क्या हमारे बीच उसी पर अनुस्मृति उतारी है? नहीं, बल्कि वह तो परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।"
سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَنِ الْكَذَّابُ الْاَشِرُ26
"कल को ही वे जान लेंगे कि कौन परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।
اِنَّا مُرْسِلُوا النَّاقَةِ فِتْنَةً لَهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْۘ27
हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे है। अतः तुम उन्हें देखते जाओ और धैर्य से काम लो
وَنَبِّئْهُمْ اَنَّ الْمَٓاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْۚ كُلُّ شِرْبٍ مُحْتَضَرٌ28
"और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।"
فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطٰى فَعَقَرَ29
अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी
فَكَيْفَ كَانَ عَذَاب۪ي وَنُذُرِ30
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
اِنَّٓا اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَش۪يمِ الْمُحْتَظِرِ31
हमने उनपर एक धमाका छोड़ा, फिर वे बाड़ लगानेवाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह चूरा होकर रह गए
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْاٰنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ32
हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ33
लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया
اِنَّٓا اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا اِلَّٓا اٰلَ لُوطٍۜ نَجَّيْنَاهُمْ بِسَحَرٍۙ34
हमने लूत के घरवालों के सिवा उनपर पथराव करनेवाली तेज़ वायु भेजी।
نِعْمَةً مِنْ عِنْدِنَاۜ كَذٰلِكَ نَجْز۪ي مَنْ شَكَرَ35
हमने अपनी विशेष अनुकम्पा से प्रातःकाल उन्हें बचा लिया। हम इसी तरह उस व्यक्ति को बदला देते है जो कृतज्ञता दिखाए
وَلَقَدْ اَنْذَرَهُمْ بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِالنُّذُرِ36
उसने जो उन्हें हमारी पकड़ से सावधान कर दिया था। किन्तु वे चेतावनियों के विषय में संदेह करते रहे
وَلَقَدْ رَاوَدُوهُ عَنْ ضَيْفِه۪ فَطَمَسْنَٓا اَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا عَذَاب۪ي وَنُذُرِ37
उन्होंने उसे फुसलाकर उसके पास से उसके अतिथियों को बलाना चाहा। अन्ततः हमने उसकी आँखें मेट दीं, "लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"
وَلَقَدْ صَبَّحَهُمْ بُكْرَةً عَذَابٌ مُسْتَقِرٌّۚ38
सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची,
فَذُوقُوا عَذَاب۪ي وَنُذُرِ39
"लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْاٰنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ۟40
और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
وَلَقَدْ جَٓاءَ اٰلَ فِرْعَوْنَ النُّذُرُۚ41
और फ़िरऔनियों के पास चेतावनियाँ आई;
كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا كُلِّهَا فَاَخَذْنَاهُمْ اَخْذَ عَز۪يزٍ مُقْتَدِرٍ42
उन्होंने हमारी सारी निशानियों को झुठला दिया। अन्ततः हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार एक ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली पकड़ता है
اَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِنْ اُو۬لٰٓئِكُمْ اَمْ لَكُمْ بَرَٓاءَةٌ فِي الزُّبُرِۚ43
क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है?
اَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَم۪يعٌ مُنْتَصِرٌ44
या वे कहते है, "और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है?"
سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ45
शीघ्र ही वह जत्था पराजित होकर रहेगा और वे पीठ दिखा जाएँगे
بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ اَدْهٰى وَاَمَرُّ46
नहीं, बल्कि वह घड़ी है, जिसका समय उनके लिए नियत है और वह बड़ी आपदावाली और कटु घड़ी है!
اِنَّ الْمُجْرِم۪ينَ ف۪ي ضَلَالٍ وَسُعُرٍۢ47
निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है
يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلٰى وُجُوهِهِمْۜ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ48
जिस दिन वे अपने मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे, "चखो मज़ा आग की लपट का!"
اِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ49
निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है
وَمَٓا اَمْرُنَٓا اِلَّا وَاحِدَةٌ كَلَمْحٍ بِالْبَصَرِ50
और हमारा आदेश (और काम) तो बस एक दम की बात होती है जैसे आँख का झपकना
وَلَقَدْ اَهْلَكْنَٓا اَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ51
और हम तुम्हारे जैसे लोगों को विनष्ट कर चुके है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
وَكُلُّ شَيْءٍ فَعَلُوهُ فِي الزُّبُرِ52
जो कुछ उन्होंने किया है, वह पन्नों में अंकित है
وَكُلُّ صَغ۪يرٍ وَكَب۪يرٍ مُسْتَطَرٌ53
और हर छोटी और बड़ी चीज़ लिखित है
اِنَّ الْمُتَّق۪ينَ ف۪ي جَنَّاتٍ وَنَهَرٍۙ54
निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ो और नहरों के बीच होंगे,
ف۪ي مَقْعَدِ صِدْقٍ عِنْدَ مَل۪يكٍ مُقْتَدِرٍ55
प्रतिष्ठित स्थान पर, प्रभुत्वशाली सम्राट के निकट