अल-मुल्क - कुरान पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
تَبَارَكَ الَّذ۪ي بِيَدِهِ الْمُلْكُۘ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌۙ1
बड़ा बरकतवाला है वह जिसके हाथ में सारी बादशाही है और वह हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है। -
اَلَّذ۪ي خَلَقَ الْمَوْتَ وَالْحَيٰوةَ لِيَبْلُوَكُمْ اَيُّكُمْ اَحْسَنُ عَمَلًاۜ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْغَفُورُۙ2
जिसने पैदा किया मृत्यु और जीवन को, ताकि तुम्हारी परीक्षा करे कि तुममें कर्म की दृष्टि से कौन सबसे अच्छा है। वह प्रभुत्वशाली, बड़ा क्षमाशील है। -
اَلَّذ۪ي خَلَقَ سَبْعَ سَمٰوَاتٍ طِبَاقًاۜ مَا تَرٰى ف۪ي خَلْقِ الرَّحْمٰنِ مِنْ تَفَاوُتٍۜ فَارْجِعِ الْبَصَرَۙ هَلْ تَرٰى مِنْ فُطُورٍ3
जिसने ऊपर-तले सात आकाश बनाए। तुम रहमान की रचना में कोई असंगति और विषमता न देखोगे। फिर नज़र डालो, "क्या तुम्हें कोई बिगाड़ दिखाई देता है?"
ثُمَّ ارْجِعِ الْبَصَرَ كَرَّتَيْنِ يَنْقَلِبْ اِلَيْكَ الْبَصَرُ خَاسِئًا وَهُوَ حَس۪يرٌ4
फिर दोबारा नज़र डालो। निगाह रद्द होकर और थक-हारकर तुम्हारी ओर पलट आएगी
وَلَقَدْ زَيَّنَّا السَّمَٓاءَ الدُّنْيَا بِمَصَاب۪يحَ وَجَعَلْنَاهَا رُجُومًا لِلشَّيَاط۪ينِ وَاَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابَ السَّع۪يرِ5
हमने निकटवर्ती आकाश को दीपों से सजाया और उन्हें शैतानों के मार भगाने का साधन बनाया और उनके लिए हमने भड़कती आग की यातना तैयार कर रखी है
وَلِلَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ عَذَابُ جَهَنَّمَۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ6
जिन लोगों ने अपने रब के साथ कुफ़्र किया उनके लिए जहन्नम की यातना है और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है
اِذَٓا اُلْقُوا ف۪يهَا سَمِعُوا لَهَا شَه۪يقًا وَهِيَ تَفُورُۙ7
जब वे उसमें डाले जाएँगे तो उसकी दहाड़ने की भयानक आवाज़ सुनेंगे और वह प्रकोप से बिफर रही होगी।
تَكَادُ تَمَيَّزُ مِنَ الْغَيْظِۜ كُلَّمَٓا اُلْقِيَ ف۪يهَا فَوْجٌ سَاَلَهُمْ خَزَنَتُهَٓا اَلَمْ يَاْتِكُمْ نَذ۪يرٌ8
ऐसा प्रतीत होगा कि प्रकोप के कारण अभी फट पड़ेगी। हर बार जब भी कोई समूह उसमें डाला जाएगा तो उसके कार्यकर्ता उनसे पूछेंगे, "क्या तुम्हारे पास कोई सावधान करनेवाला नहीं आया?"
قَالُوا بَلٰى قَدْ جَٓاءَنَا نَذ۪يرٌ فَكَذَّبْنَا وَقُلْنَا مَا نَزَّلَ اللّٰهُ مِنْ شَيْءٍۚ اِنْ اَنْتُمْ اِلَّا ف۪ي ضَلَالٍ كَب۪يرٍ9
वे कहेंगे, "क्यों नहीं, अवश्य हमारे पास आया था, किन्तु हमने झुठला दिया और कहा कि अल्लाह ने कुछ भी नहीं अवतरित किया। तुम तो बस एक बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो।"
وَقَالُوا لَوْ كُنَّا نَسْمَعُ اَوْ نَعْقِلُ مَا كُنَّا ف۪ٓي اَصْحَابِ السَّع۪يرِ10
और वे कहेंगे, "यदि हम सुनते या बुद्धि से काम लेते तो हम दहकती आग में पड़नेवालों में सम्मिलित न होते।"
فَاعْتَرَفُوا بِذَنْبِهِمْۚ فَسُحْقًا لِاَصْحَابِ السَّع۪يرِ11
इस प्रकार वे अपने गुनाहों को स्वीकार करेंगे, तो धिक्कार हो दहकती आगवालों पर!
اِنَّ الَّذ۪ينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ بِالْغَيْبِ لَهُمْ مَغْفِرَةٌ وَاَجْرٌ كَب۪يرٌ12
जो लोग परोक्ष में रहते हुए अपने रब से डरते है, उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है
وَاَسِرُّوا قَوْلَكُمْ اَوِ اجْهَرُوا بِه۪ۜ اِنَّهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ13
तुम अपनी बात छिपाओ या उसे व्यक्त करो, वह तो सीनों में छिपी बातों तक को जानता है
اَلَا يَعْلَمُ مَنْ خَلَقَۜ وَهُوَ اللَّط۪يفُ الْخَب۪يرُ۟14
क्या वह नहीं जानेगा जिसने पैदा किया? वह सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है
هُوَ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ ذَلُولًا فَامْشُوا ف۪ي مَنَاكِبِهَا وَكُلُوا مِنْ رِزْقِه۪ۜ وَاِلَيْهِ النُّشُورُ15
वही तो है जिसने तुम्हारे लिए धरती को वशीभूत किया। अतः तुम उसके (धरती के) कन्धों पर चलो और उसकी रोज़ी में से खाओ, उसी की ओर दोबारा उठकर (जीवित होकर) जाना है
ءَاَمِنْتُمْ مَنْ فِي السَّمَٓاءِ اَنْ يَخْسِفَ بِكُمُ الْاَرْضَ فَاِذَا هِيَ تَمُورُۙ16
क्या तुम उससे निश्चिन्त हो जो आकाश में है कि तुम्हें धरती में धँसा दे, फिर क्या देखोगे कि वह डाँवाडोल हो रही है?
اَمْ اَمِنْتُمْ مَنْ فِي السَّمَٓاءِ اَنْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًاۜ فَسَتَعْلَمُونَ كَيْفَ نَذ۪يرِ17
या तुम उससे निश्चिन्त हो जो आकाश में है कि वह तुमपर पथराव करनेवाली वायु भेज दे? फिर तुम जान लोगे कि मेरी चेतावनी कैसी होती है
وَلَقَدْ كَذَّبَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَكَيْفَ كَانَ نَك۪يرِ18
उन लोगों ने भी झुठलाया जो उनसे पहले थे, फिर कैसा रहा मेरा इनकार!
اَوَلَمْ يَرَوْا اِلَى الطَّيْرِ فَوْقَهُمْ صَٓافَّاتٍ وَيَقْبِضْنَۜ مَا يُمْسِكُهُنَّ اِلَّا الرَّحْمٰنُۜ اِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ بَص۪يرٌ19
क्या उन्होंने अपने ऊपर पक्षियों को पंक्तबन्द्ध पंख फैलाए और उन्हें समेटते नहीं देखा? उन्हें रहमान के सिवा कोई और नहीं थामें रहता। निश्चय ही वह हर चीज़ को देखता है
اَمَّنْ هٰذَا الَّذ۪ي هُوَ جُنْدٌ لَكُمْ يَنْصُرُكُمْ مِنْ دُونِ الرَّحْمٰنِۜ اِنِ الْكَافِرُونَ اِلَّا ف۪ي غُرُورٍۚ20
या वह कौन है जो तुम्हारी सेना बनकर रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी सहायता करे। इनकार करनेवाले तो बस धोखे में पड़े हुए है
اَمَّنْ هٰذَا الَّذ۪ي يَرْزُقُكُمْ اِنْ اَمْسَكَ رِزْقَهُۚ بَلْ لَجُّوا ف۪ي عُتُوٍّ وَنُفُورٍ21
या वह कौन है जो तुम्हें रोज़ी दे, यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? नहीं, बल्कि वे तो सरकशी और नफ़रत ही पर अड़े हुए है
اَفَمَنْ يَمْش۪ي مُكِبًّا عَلٰى وَجْهِه۪ٓ اَهْدٰٓى اَمَّنْ يَمْش۪ي سَوِيًّا عَلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ22
तो क्या वह व्यक्ति जो अपने मुँह के बल औंधा चलता हो वह अधिक सीधे मार्ग पर ह या वह जो सीधा होकर सीधे मार्ग पर चल रहा है?
قُلْ هُوَ الَّذ۪ٓي اَنْشَاَكُمْ وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْاَبْصَارَ وَالْاَفْـِٔدَةَۜ قَل۪يلًا مَا تَشْكُرُونَ23
कह दो, "वही है जिसने तुम्हें पैदा किया और तुम्हारे लिए कान और आँखे और दिल बनाए। तुम कृतज्ञता थोड़े ही दिखाते हो।"
قُلْ هُوَ الَّذ۪ي ذَرَاَكُمْ فِي الْاَرْضِ وَاِلَيْهِ تُحْشَرُونَ24
कह दो, "वही है जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और उसी की ओर तुम एकत्र किए जा रहे हो।"
وَيَقُولُونَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ25
वे कहते है, "यदि तुम सच्चे हो तो यह वादा कब पूरा होगा?"
قُلْ اِنَّمَا الْعِلْمُ عِنْدَ اللّٰهِۖ وَاِنَّمَٓا اَنَا۬ نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌ26
कह दो, "इसका ज्ञान तो बस अल्लाह ही के पास है और मैं तो एक स्पष्ट॥ सचेत करनेवाला हूँ।"
فَلَمَّا رَاَوْهُ زُلْفَةً س۪ٓيـَٔتْ وُجُوهُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَق۪يلَ هٰذَا الَّذ۪ي كُنْتُمْ بِه۪ تَدَّعُونَ27
फिर जब वे उसे निकट देखेंगे तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार की नीति अपनाई; और कहा जाएगा, "यही है वह चीज़ जिसकी तुम माँग कर रहे थे।"
قُلْ اَرَاَيْتُمْ اِنْ اَهْلَكَنِيَ اللّٰهُ وَمَنْ مَعِيَ اَوْ رَحِمَنَاۙ فَمَنْ يُج۪يرُ الْكَافِر۪ينَ مِنْ عَذَابٍ اَل۪يمٍ28
कहो, "क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि अल्लाह मुझे और उन्हें भी, जो मेरे साथ है, विनष्ट ही कर दे या वह हम पर दया करे, आख़िर इनकार करनेवालों को दुखद यातना से कौन पनाह देगा?"
قُلْ هُوَ الرَّحْمٰنُ اٰمَنَّا بِه۪ وَعَلَيْهِ تَوَكَّلْنَاۚ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ29
कह दो, "वह रहमान है। उसी पर हम ईमान लाए है और उसी पर हमने भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि खुली गुमराही में कौन पड़ा हुआ है।"
قُلْ اَرَاَيْتُمْ اِنْ اَصْبَحَ مَٓاؤُ۬كُمْ غَوْرًا فَمَنْ يَاْت۪يكُمْ بِمَٓاءٍ مَع۪ينٍ30
कहो, "क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि तुम्हारा पानी (धरती में) नीचे उतर जाए तो फिर कौन तुम्हें लाकर देगा निर्मल प्रवाहित जल?"