अल-बक़रा · 2:165
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَتَّخِذُ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَنْدَادًا يُحِبُّونَهُمْ كَحُبِّ اللّٰهِۜ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَشَدُّ حُبًّا لِلّٰهِۜ وَلَوْ يَرَى الَّذ۪ينَ ظَلَمُٓوا اِذْ يَرَوْنَ الْعَذَابَۙ اَنَّ الْقُوَّةَ لِلّٰهِ جَم۪يعًاۙ وَاَنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعَذَابِ
कुछ लोग ऐसे भी है जो अल्लाह से हटकर दूसरों को उसके समकक्ष ठहराते है, उनसे ऐसा प्रेम करते है जैसा अल्लाह से प्रेम करना चाहिए। और कुछ ईमानवाले है उन्हें सबसे बढ़कर अल्लाह से प्रेम होता है। और ये अत्याचारी (बहुदेववादी) जबकि यातना देखते है, यदि इस तथ्य को जान लेते कि शक्ति सारी की सारी अल्लाह ही को प्राप्त हो और यह कि अल्लाह अत्यन्त कठोर यातना देनेवाला है (तो इनकी नीति कुछ और होती)
Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.