अल-बक़रा · 2:178

يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِصَاصُ فِي الْقَتْلٰىۜ اَلْحُرُّ بِالْحُرِّ وَالْعَبْدُ بِالْعَبْدِ وَالْاُنْثٰى بِالْاُنْثٰىۜ فَمَنْ عُفِيَ لَهُ مِنْ اَخ۪يهِ شَيْءٌ فَاتِّبَاعٌ بِالْمَعْرُوفِ وَاَدَٓاءٌ اِلَيْهِ بِاِحْسَانٍۜ ذٰلِكَ تَخْف۪يفٌ مِنْ رَبِّكُمْ وَرَحْمَةٌۜ فَمَنِ اعْتَدٰى بَعْدَ ذٰلِكَ فَلَهُ عَذَابٌ اَل۪يمٌ

ऐ ईमान लानेवालो! मारे जानेवालों के विषय में हत्यादंड (क़िसास) तुमपर अनिवार्य किया गया, स्वतंत्र-स्वतंत्र बराबर है और ग़़ुलाम-ग़ुलाम बराबर है और औरत-औरत बराबर है। फिर यदि किसी को उसके भाई की ओर से कुछ छूट मिल जाए तो सामान्य रीति का पालन करना चाहिए; और भले तरीके से उसे अदा करना चाहिए। यह तुम्हारें रब की ओर से एक छूट और दयालुता है। फिर इसके बाद भो जो ज़्यादती करे तो उसके लिए दुखद यातना है

Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.