अल-बक़रा · 2:191

وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْ وَاَخْرِجُوهُمْ مِنْ حَيْثُ اَخْرَجُوكُمْ وَالْفِتْنَةُ اَشَدُّ مِنَ الْقَتْلِۚ وَلَا تُقَاتِلُوهُمْ عِنْدَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ حَتّٰى يُقَاتِلُوكُمْ ف۪يهِۚ فَاِنْ قَاتَلُوكُمْ فَاقْتُلُوهُمْۜ كَذٰلِكَ جَزَٓاءُ الْكَافِر۪ينَ

और जहाँ कहीं उनपर क़ाबू पाओ, क़त्ल करो और उन्हें निकालो जहाँ से उन्होंने तुम्हें निकाला है, इसलिए कि फ़ितना (उत्पीड़न) क़त्ल से भी बढ़कर गम्भीर है। लेकिन मस्जिदे हराम (काबा) के निकट तुम उनसे न लड़ो जब तक कि वे स्वयं तुमसे वहाँ युद्ध न करें। अतः यदि वे तुमसे युद्ध करें तो उन्हें क़त्ल करो - ऐसे इनकारियों का ऐसा ही बदला है

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