अल-बक़रा · 2:284

لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَاِنْ تُبْدُوا مَا ف۪ٓي اَنْفُسِكُمْ اَوْ تُخْفُوهُ يُحَاسِبْكُمْ بِهِ اللّٰهُۜ فَيَغْفِرُ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيُعَذِّبُ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ

अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। और जो कुछ तुम्हारे मन है, यदि तुम उसे व्यक्त करो या छिपाओं, अल्लाह तुमसे उसका हिसाब लेगा। फिर वह जिसे चाहे क्षमा कर दे और जिसे चाहे यातना दे। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है

Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.