आले-इमरान · 3:28

لَا يَتَّخِذِ الْمُؤْمِنُونَ الْكَافِر۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِن۪ينَۚ وَمَنْ يَفْعَلْ ذٰلِكَ فَلَيْسَ مِنَ اللّٰهِ ف۪ي شَيْءٍ اِلَّٓا اَنْ تَتَّقُوا مِنْهُمْ تُقٰيةًۜ وَيُحَذِّرُكُمُ اللّٰهُ نَفْسَهُۜ وَاِلَى اللّٰهِ الْمَص۪يرُ

ईमानवालों को चाहिए कि वे ईमानवालों से हटकर इनकारवालों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाएँ, और जो ऐसा करेगा, उसका अल्लाह से कोई सम्बन्ध नहीं, क्योंकि उससे सम्बद्ध यही बात है कि तुम उनसे बचो, जिस प्रकार वे तुमसे बचते है। और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है, और अल्लाह ही की ओर लौटना है

Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.