अन-निसा · 4:116
اِنَّ اللّٰهَ لَا يَغْفِرُ اَنْ يُشْرَكَ بِه۪ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذٰلِكَ لِمَنْ يَشَٓاءُۜ وَمَنْ يُشْرِكْ بِاللّٰهِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَالًا بَع۪يدًا
निस्संदेह अल्लाह इस चीज़ को क्षमा नहीं करेगा कि उसके साथ किसी को शामिल किया जाए। हाँ, इससे नीचे दर्जे के अपराध को, जिसके लिए चाहेगा, क्षमा कर देगा। जो अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराता है, तो वह भटककर बहुत दूर जा पड़ा
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