अन-निसा · 4:131

وَلِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَلَقَدْ وَصَّيْنَا الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَاِيَّاكُمْ اَنِ اتَّقُوا اللّٰهَۜ وَاِنْ تَكْفُرُوا فَاِنَّ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَنِيًّا حَم۪يدًا

आकाशों और धरती में जो कुछ है, सब अल्लाह ही का है। तुमसे पहले जिन्हें किताब दी गई थी, उन्हें और तुम्हें भी हमने ताकीद की है कि "अल्लाह का डर रखो।" यदि तुम इनकार करते हो, तो इससे क्या होने का? आकाशों और धरती में जो कुछ है, सब अल्लाह ही का रहेगा। अल्लाह तो निस्पृह, प्रशंसनीय है

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