अन-निसा · 4:77
اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذ۪ينَ ق۪يلَ لَهُمْ كُفُّٓوا اَيْدِيَكُمْ وَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَۚ فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ الْقِتَالُ اِذَا فَر۪يقٌ مِنْهُمْ يَخْشَوْنَ النَّاسَ كَخَشْيَةِ اللّٰهِ اَوْ اَشَدَّ خَشْيَةًۚ وَقَالُوا رَبَّنَا لِمَ كَتَبْتَ عَلَيْنَا الْقِتَالَۚ لَوْلَٓا اَخَّرْتَنَٓا اِلٰٓى اَجَلٍ قَر۪يبٍۜ قُلْ مَتَاعُ الدُّنْيَا قَل۪يلٌۚ وَالْاٰخِرَةُ خَيْرٌ لِمَنِ اتَّقٰى وَلَا تُظْلَمُونَ فَت۪يلًا
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनसे कहा गया था कि अपने हाथ रोके रखो और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो? फिर जब उन्हें युद्ध का आदेश दिया गया तो क्या देखते है कि उनमें से कुछ लोगों का हाल यह है कि वे लोगों से ऐसा डरने लगे जैसे अल्लाह का डर हो या यह डर उससे भी बढ़कर हो। कहने लगे, "हमारे रब! तूने हमपर युद्ध क्यों अनिवार्य कर दिया? क्यों न थोड़ी मुहलत हमें और दी?" कह दो, "दुनिया की पूँजी बहुत थोड़ी है, जबकि आख़िरत उस व्यक्ति के अधिक अच्छी है जो अल्लाह का डर रखता हो और तुम्हारे साथ तनिक भी अन्याय न किया जाएगा।
Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.