अल-मुजादिला · 58:9

يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوٰىۜ وَاتَّقُوا اللّٰهَ الَّذ۪ٓي اِلَيْهِ تُحْشَرُونَ

ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम आपस में गुप्त॥ वार्ता करो तो गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की गुप्त वार्ता न करो, बल्कि नेकी और परहेज़गारी के विषय में आपस में एकान्त वार्ता करो। और अल्लाह का डर रखो, जिसके पास तुम इकट्ठे होगे

Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.