अल-हश्र · 59:7

مَٓا اَفَٓاءَ اللّٰهُ عَلٰى رَسُولِه۪ مِنْ اَهْلِ الْقُرٰى فَلِلّٰهِ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبٰى وَالْيَتَامٰى وَالْمَسَاك۪ينِ وَابْنِ السَّب۪يلِۙ كَيْ لَا يَكُونَ دُولَةً بَيْنَ الْاَغْنِيَٓاءِ مِنْكُمْۜ وَمَٓا اٰتٰيكُمُ الرَّسُولُ فَخُذُوهُ وَمَا نَهٰيكُمْ عَنْهُ فَانْتَهُواۚ وَاتَّقُوا اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعِقَابِۢ

जो कुछ अल्लाह ने अपने रसूल की ओर बस्तियोंवालों से लेकर पलटाया वह अल्लाह और रसूल और (मुहताज) नातेदार और अनाथों और मुहताजों और मुसाफ़िर के लिए है, ताकि वह (माल) तुम्हारे मालदारों ही के बीच चक्कर न लगाता रहे - रसूल जो कुछ तुम्हें दे उसे ले लो और जिस चीज़ से तुम्हें रोक दे उससे रुक जाओ, और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह की यातना बहुत कठोर है। -

Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.