अत-तहरीम · 66:1
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ لِمَ تُحَرِّمُ مَٓا اَحَلَّ اللّٰهُ لَكَۚ تَبْتَغ۪ي مَرْضَاتَ اَزْوَاجِكَۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ
ऐ नबी! जिस चीज़ को अल्लाह ने तुम्हारे लिए वैध ठहराया है उसे तुम अपनी पत्नियों की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए क्यो अवैध करते हो? अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
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