अत-तहरीम · 66:8

يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا تُوبُٓوا اِلَى اللّٰهِ تَوْبَةً نَصُوحًاۜ عَسٰى رَبُّكُمْ اَنْ يُكَفِّرَ عَنْكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۙ يَوْمَ لَا يُخْزِي اللّٰهُ النَّبِيَّ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُۚ نُورُهُمْ يَسْعٰى بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَبِاَيْمَانِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَٓا اَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَاۚ اِنَّكَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ

ऐ ईमान लानेवाले! अल्लाह के आगे तौबा करो, विशुद्ध तौबा। बहुत सम्भव है कि तुम्हारा रब तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे और तुम्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरे बह रही होंगी, जिस दिन अल्लाह नबी को और उनको जो ईमान लाकर उसके साथ हुए, रुसवा न करेगा। उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा होगा और उनके दाहिने हाथ मे होगा। वे कह रहे होंगे, "ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे और हमें क्षमा कर। निश्चय ही तू हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है।"

Word-by-word analysis is only wired up for the demo verses (1:1 and 1:2) for now.