अल-फ़जर · 89:15

فَاَمَّا الْاِنْسَانُ اِذَا مَا ابْتَلٰيهُ رَبُّهُ فَاَكْرَمَهُ وَنَعَّمَهُ فَيَقُولُ رَبّ۪ٓي اَكْرَمَنِۜ

किन्तु मनुष्य का हाल यह है कि जब उसका रब इस प्रकार उसकी परीक्षा करता है कि उसे प्रतिष्ठा और नेमत प्रदान करता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मुझे प्रतिष्ठित किया।"

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