402. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
29 · अल-अंकबूत
وَلَا تُجَادِلُٓوا اَهْلَ الْكِتَابِ اِلَّا بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُۗ اِلَّا الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ وَقُولُٓوا اٰمَنَّا بِالَّذ۪ٓي اُنْزِلَ اِلَيْنَا وَاُنْزِلَ اِلَيْكُمْ وَاِلٰهُنَا وَاِلٰهُكُمْ وَاحِدٌ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ46
और किताबवालों से बस उत्तम रीति ही से वाद-विवाद करो - रहे वे लोग जो उनमें ज़ालिम हैं, उनकी बात दूसरी है - और कहो - "हम ईमान लाए उस चीज़ पर जो अवतरित हुई और तुम्हारी ओर भी अवतरित हुई। और हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य अकेला ही है और हम उसी के आज्ञाकारी है।"
وَكَذٰلِكَ اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ الْكِتَابَۜ فَالَّذ۪ينَ اٰتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يُؤْمِنُونَ بِه۪ۚ وَمِنْ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ مَنْ يُؤْمِنُ بِه۪ۜ وَمَا يَجْحَدُ بِاٰيَاتِنَٓا اِلَّا الْكَافِرُونَ47
इसी प्रकार हमने तुम्हारी ओर किताब अवतरित की है, तो जिन्हें हमने किताब प्रदान की है वे उसपर ईमान लाएँगे। उनमें से कुछ उसपर ईमान ला भी रहे है। हमारी आयतों का इनकार तो केवल न माननेवाले ही करते है
وَمَا كُنْتَ تَتْلُوا مِنْ قَبْلِه۪ مِنْ كِتَابٍ وَلَا تَخُطُّهُ بِيَم۪ينِكَ اِذًا لَارْتَابَ الْمُبْطِلُونَ48
इससे पहले तुम न कोई किताब पढ़ते थे और न उसे अपने हाथ से लिखते ही थे। ऐसा होता तो ये मिथ्यावादी सन्देह में पड़ सकते थे
بَلْ هُوَ اٰيَاتٌ بَيِّنَاتٌ ف۪ي صُدُورِ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَۜ وَمَا يَجْحَدُ بِاٰيَاتِنَٓا اِلَّا الظَّالِمُونَ49
नहीं, बल्कि वे तो उन लोगों के सीनों में विद्यमान खुली निशानियाँ है, जिन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ है। हमारी आयतों का इनकार तो केवल ज़ालिम ही करते है
وَقَالُوا لَوْلَٓا اُنْزِلَ عَلَيْهِ اٰيَاتٌ مِنْ رَبِّه۪ۜ قُلْ اِنَّمَا الْاٰيَاتُ عِنْدَ اللّٰهِۜ وَاِنَّمَٓا اَنَا۬ نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌ50
उनका कहना है कि "उसपर उसके रब की ओर से निशानियाँ क्यों नहीं अवतरित हुई?" कह दो, "निशानियाँ तो अल्लाह ही के पास है। मैं तो केवल स्पष्ट रूप से सचेत करनेवाला हूँ।"
اَوَلَمْ يَكْفِهِمْ اَنَّٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ يُتْلٰى عَلَيْهِمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَرَحْمَةً وَذِكْرٰى لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ۟51
क्या उनके लिए यह पर्याप्त नहीं कि हमने तुमपर किताब अवतरित की, जो उन्हें पढ़कर सुनाई जाती है? निस्संदेह उसमें उन लोगों के लिए दयालुता है और अनुस्मृति है जो ईमान लाएँ
قُلْ كَفٰى بِاللّٰهِ بَيْن۪ي وَبَيْنَكُمْ شَه۪يدًاۚ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللّٰهِۙ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ52
कह दो, "मेरे और तुम्हारे बीच अल्लाह गवाह के रूप में काफ़ी है।" वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है। जो लोग असत्य पर ईमान लाए और अल्लाह का इनकार किया वही है जो घाटे में है