अल-बक़रा · 2:9

يُخَادِعُونَ اللّٰهَ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُواۚ وَمَا يَخْدَعُونَ اِلَّٓا اَنْفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَۜ

वे अल्लाह और ईमानवालों के साथ धोखेबाज़ी कर रहे हैं, हालाँकि धोखा वे स्वयं अपने-आपको ही दे रहे हैं, परन्तु वे इसको महसूस नहीं करते

يُخَادِعُونَ
युख़ादिऊन

रंगीन अक्षर मूल (धातु) हैं — अर्थ का केंद्र। बाक़ी उपसर्ग, स्वर-चिह्न और साँचा हैं। इन्हें पहचानना सीख लें तो किसी अनजान शब्द में भी मूल ढूँढ़ सकते हैं।

अर्थ
धोखा देने का यत्न करते
शब्द-भेद
क्रिया (فعل)
मूल (धातु)
خ د ع
मूल का अर्थ
धोखा देना। خَادَعَ (धोखे का यत्न), خَدَعَ (धोखा दिया), خِدَاع (छल)।
शब्दकोश रूप
خَادَعَ
व्युत्पत्ति
तीसरा बाब (मुफ़ाअला) — प्रयास/पारस्परिकता का अर्थ
क्रिया रूप (बाब)
तीसरा बाब (فَاعَلَ)
काल
वर्तमान/सामान्य काल
वाच्य
कर्तृवाच्य
वृत्ति (भाव)
सूचक (पेश वाला)
पुरुष
वे (तृतीय पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन)
वाक्य में भूमिका
मुख्य क्रिया; कर्ता ‘वाव’ (वे)
कारक (स्थिति)
सूचक भाव (नून सुरक्षित)
व्याकरण
‘धोखा देने का यत्न करते हैं’ — तीसरा बाब (मुफ़ाअला) प्रायः प्रयास या पारस्परिकता जताता, अतः ‘धोखा देने का यत्न’। सूचक भाव; ‘वाव’ कर्ता।
क्रिया रूप

वर्तमान में उपसर्ग कर्ता दर्शाता है (मैं/हम/तू/वह)।